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मुसलमान ऐसी स्किल पैदा करें कि कभी रिज़र्वेशन न माँगना पड़े

 Sabahat Vijeta |  2016-04-21 17:10:06.0

तहलका न्यूज़ ब्यूरो


ali dayलखनऊ, 21 अप्रैल. मुसलमान खुद पढ़ें और अपने बच्चों को भी पढ़ाएं. वह अपने अन्दर इस तरह की स्किल पैदा करें कि उन्हें किसी के आगे मदद के लिए हाथ न फैलाना पड़े. यह बात आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना डॉ. कल्बे सादिक ने आज उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान में डेमोक्रेटिक इंटलेकचुल फोरम की ओर से हजरत अली की यौम ए विलादत पर आयोजित अली डे सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए कही. मौलाना ने कहा कि मुसलमानों को आरक्षण नहीं चाहिए इससे उनका भला नहीं होगा. यह सेमिनार इस्लाम में इल्म की अहमियत पर था. सेमिनार में दारूल उलूम नदवातुल उलेमा के प्रिसिंपल डॉ. सईदुर्रहमान आजमी ने कहा कि हजरत अली जैसा कोई नहीं. अल्लाह ने हर इल्म से अली को नवाजा था, हजरत अली हर विद्या में सर्वश्रेष्ठ थे.


मौलाना कल्बे सादिक ने कहा कि जितने इंसानों का कत्ल जंगों में नहीं हुआ उससे ज्यादा का कत्ल मौलवियों व मुफ्तियों की फतवे से हुआ. उन्होंने कहा कि सर सैयद ने मुसलमानों को जगाया और उनको आधुनिक शिक्षा के लिए जागृत किया लेकिन मौलवियों ने उनके भी कत्ल का फतवा जारी कर दिया था. डॉक्टर कल्बे सादिक़ ने यूनिटी कॉलेज का ज़िक्र करते हुए कहा की कॉलेज के लिए ज़मीन मुलायम सिंह यादव ने नौ मिनट में दी थी उसके बाद वह एक प्रोग्राम में आये और पुछा लड़कियों के लिए कॉलेज खोल सकते हो तो मैंने कहा ज़मीन आप दीजिये तो मैं कॉलेज बनाऊंगा मुलायम सिंह से घंटा घर के पास की ज़मीन का ज़िक्र किया मैं तैयार हो गया गर्ल्स कॉलेज बनाने को लेकिन नौ साल हो गया आज तक ज़मीन नहीं दी जिसकी वजह यही है जब वह खुश थे नौ मिनट में ज़मीन दे दी और अब नाराज़ हैं तो नौ साल में भी ज़मीन नहीं मिली.


डॉ. कल्बे सादिक ने कहा कि मुसलमान खुद आधुनिक शिक्षा ग्रहण करें और अपने बच्चो खासतौर पर लड़कियों को तालीम याफ्ता करें. सिर्फ आधुनिक शिक्षा ही नहीं बल्कि घरों में दीनी तालीम भी दे ताकि बच्चे अच्छे इंसान बन सके. उन्होंने कहा कि खुद रसूल ने मस्जिद नबवी में आधुनिक शिक्षा पर जोर दिया. मौलाना ने फरमाया कि पांचवें इमाम मोहम्मद बाकर व छठे इमाम जाफर.ए.सादिक ने मस्जिद-ए-नबवी में हजारों बच्चों को विज्ञान व गणित की तालीम दी.


डॉ. सादिक ने कहा कि मुसलमानों ने मौलवियों व मुफ्तियों की बात तो सुनी लेकिन हजरत अली की बात नहीं सुनी जिससे उनका पतन हुआ। उन्होंने कहा कि दो कलाम बुलंदियों पर पहुंचे एक मौलाना अबुल कलाम आजाद जो आजाद भारत के पहले शिक्षा मंत्री थे और दूसरे गरीब हाकर एपीजे अबुल कलाम तो बड़े वैज्ञानिक के साथ देश के राष्ट्रपति बने.


डॉ. सईदुर्रहमान नदवी ने लोगों से कहा कि वह हजरत अली के बताये रास्ते पर चलें और उस पर अमल करें तथा इदारों को कायम करें. डॉक्टर सईदुर्रहमान नदवी ने कहा की नहजुल बलाग़ा को पढ़ कर हज़रत अली की शिक्षाओं पर अमल किया जा सकता है उन्होंने कहा कि एकता के लिए ऐसे कार्यक्रमों की सख्त ज़रुरत हैं जिसमे हिन्दू शिया सुन्नी सब हों.


डॉ. रमेश दीक्षित ने कहा कि बचपन में उनकी मां की दोस्त एक पड़ोसन ने मुझे हजरत अली के बारे में बताया. हजरत अली ने सातवीं शताब्दी में केंद्र व राज्यों के संबंध, कृषि, प्रशासन व न्याय व्यवस्था तथा प्रजातंत्र के बारे में बताया. हजरत अली ने ही दुनिया को बताया कि जंग में मानवधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए. उन्होने कभी निहत्थों से जंग नहीं की. हजरत अली ने ही विधवाओं की पेंशन की सबसे पहले व्यवस्था की. डॉ. दीक्षित ने कहा कि मु्स्लिम शासकों ने ही हर जगह नहर व्यवस्था की जिससे कृषि की पैदावार हो. उन्होंने कहा कि मुझे इस्लाम और मुसलमानों की सबसे अच्छी बात बराबरी की लगती है जबकि हमारे यहां यह व्यवस्था आज तक नहीं हो सकी.


ख्वाजा मुईनउद्दीन चिश्ती उर्दू अरबी फारसी विश्वविद्लाय के कुलपति प्रो. खान मसूद ने कहा कि मुसलमानों में आज भी शिक्षा विशेषकर उच्च शिक्षा की कमी है. उन्होंने कहा कि मलयेशिया सरकार ने इस्लामी बैकिंग यूनिवर्सिटी कायम की है लेकिन वहां ज्यादातर अंग्रेज प्रोफेसर है.


डॉ. इक्तेदार हुसैन फारूखी ने कहा कि यूरोप व पश्चिमी राष्ट्रों ने जो भी तरक्की की है वह मुसलमानों की बदौलत. आज यूरोप के विश्वविद्यालयों में जो भी विज्ञान व गणित पढ़ाई जा रही है वह मुस्लिम वैज्ञानिकों व विद्धानों की ही है. उन्होंने बताया कि वह एक बारे यूरोप में एक चर्च में गये और वह पादरी ने जो 50 मिनट का भाषण दिया उसमें 40 वह साइंस पर बोला यह पादरी पीएचडी था. उन्होंने कहा कि मुझकों यह जानकार हैरत हुई कि 50 फीसदी पादरी सांइस में पीएचडी होते है. डॉ. फारूकी ने कहा कि मुसलमान इल्म से दूर हो गये जबकि आज विश्व में हर चौथा व्यक्ति मुसलमान है. उन्होंने कहा कि हजरत अली को हर इल्म में महारत हासिल थी. वह लोगों से कहते थे कि मैं बता सकता हूं कि कुरान की आयते कब-कब और किस वक्त कहां-कहाँ नाजिल हुई.


सेमिनार में की नोट पढ़ते हुए अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. सिराज अजमली ने कहा कि हजरत अली की कबिलियत के उनके दुश्मन भी कायल थे. अली की महानता को शब्दों में ब्यान नहीं किया जा सकता. खुद रसूल ने कहा था कि मैं इल्म का शहर हूं और अली उसका दरवाजा. उन्होंने कहा कि इस्लाम में इल्म की बहुत अहमियत है. अली मुश्किल कुशा थे तभी तो हजरत उमर ने कहा था कि अगर अली न होते तो मै हलाक कर दिया जाता. कहा कि अल्लाह के सिवा और कोई ताकत नहीं जो कह सके कि उसने रसूल को इल्म दिया और रसूल के अलावा और कोई नहीं कह सकता था कि उसने अली को इल्म दिया. सेमिनार को सुरेंद्र उपेंद्र पाल और सुहैल काकोरवी ने भी संबोधित किया.


सेमिनार के संयोजक सैयद वकार रिजवी ने कहा कि अली डे के आयोजन का यह भी उदेश्य था कि आज जो छुट्टी हुई है वह किस हस्ती के बारे में हुई और वह कौन थे. जिसे दूसरे मजहब के लोग भी जानें.


उन्होंने सेमिनार में भाग ले रहे सभी वक्ताओं का और जो लोग सेमिनार में आये उनका शुक्रिया भी अदा किया. सेमिनार की निजामत यश भारती पुरस्कार प्राप्त अनवर जलालपुरी ने शायराना व सूफियाना अंदाज में की.


सेमिनार में पूर्व मेयर डाण्दाऊजी गुप्त व हिंदी संस्थान के निदेशक मनीष शुक्ल सहित बड़ी संख्या में श्रोता थे। आयोजकों की ओर से सभी वक्ताओं को बुके और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

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