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जन्मदिन विशेष : जनता के शहीद-ए-आजम को आज भी सरकार मानती है ‘क्रांतिकारी आतंकी’

 Vikas Tiwari |  2016-09-28 10:57:00.0

भगत सिंह

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

नई दिल्ली. 28 सितम्बर 1907 को शहीद-ए-आजम भगत सिंह का जन्म हुआ और 23 मार्च को देश की आजादी के लिए लड़ते हुए फांसी पर चढ़ गए. लेकिन यह हमारा दुर्भाग्य है की आज भी सरकारी रिकॉर्ड में शहीद नहीं बल्कि अपराधी माना जाता है. शाहिदें आजम भगत सिंह के प्रपौत्र यादवेंद्र सिंह संधू बाताते हैं कि ‘जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्‍यमंत्री थे तब मैंने भगत सिंह को शहीद घोषित करवाने के बारे में उनसे गांधी नगर में मुलाकात करके समर्थन मांगा था. उन्‍होंने भरोसा दिया था कि केंद्र में भाजपा की सरकार आई तो वह भगत सिंह को शहीद का दर्जा दिला देंगे. अब उनकी सरकार के दो साल से अधिक हो चुके हैं लेकिन इस बारे में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है.‘


आजादी के 69 साल के बाद भी यादवेंद्र सिंह संधू भगत सिंह को शाहीद घोषित करने  की लड़ाई ‘शहीद भगत सिंह ब्रिगेड’ के नाम से लड़ रहे हैं. अपनी इसी मांग के लिए संधू जलियावाला बाग से इंडिया गेट तक शहीद सम्‍मान जागृति यात्रा निकाल रहे हैं. अप्रैल 2013 में एक आरटीआई के जवाब में खुलास हुआ कि शहीद-ए-आजम को अब भी किताबों में ‘क्रांतिकारी आतंकी’ कहा जा रहा है. तब से भगत सिंह के वंशज भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को सरकारी रिकॉर्ड में शहीद घोषित करवाने की लड़ाई लड़ रहे हैं.

देश का बच्‍चा-बच्‍चा जानता है कि भगत सिंह ने देश के लिए अपनी जान दे दी, फिर सरकार को शहीद घोषित करने में क्‍या दिक्‍कत हो सकती है. यह दुर्भाग्‍यपूर्ण है. सरकार जब चाहे तब भगत सिंह को दस्‍तावेजों में शहीद घोषित कर सकती है, इसमें कोई तकनीकी दिक्‍कत नहीं है. भगत सिंह अंग्रेजों के लिए क्रांतिकारी आतंकी थे, हमारे लिए वह शहीद हैं लेकिन यह दुखद है कि हमारे देश के इतिहासकारों ने उनके साथ न्‍याय नहीं किया.

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