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पत्र से छेड़छाड़ नहीं हुई, D.I.G. ने कहा मुस्लिम आतंकियों का धर्म

 Sabahat Vijeta |  2016-06-04 14:55:43.0


  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केन्द्रीय गृह सचिव को भेजा नोटिस

  • केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने महानिदेशक सी.आर.पी.एफ. से माँगा जवाब


dig-2शबाहत हुसैन विजेता

लखनऊ. सी.आर.पी.एफ. के डीआईजी डी.के. त्रिपाठी के पत्र के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई थी. विशेषज्ञ द्वारा की गई जांच रिपोर्ट आने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केन्द्रीय गृह सचिव और यूपी सी.आर.पी.एफ. के महानिदेशक को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा है. इस सम्बन्ध में केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सी.आर.पी.एफ. के डीआईजी डी.के. त्रिपाठी को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है.


दरअसल गाजीपुर के शम्स तबरेज़ ने सी.आर.पी.एफ. और पुलिस में नौकरी के लिए एग्जाम दिया था. शम्स दोनों जगह पास हुए और दोनों जगह मेडिकल परीक्षा के लिए बुलाये गए. पुलिस की मेडिकल परीक्षा में उन्हें फिट घोषित किया गया लेकिन सी.आर.पी.एफ. उन्हें मेडिकली अनफिट बताया गया. शम्स ने सूचना के अधिकार के तहत सी.आर.पी.एफ. के डी.आई.जी.को पत्र लिखकर मेडिकल रिपोर्ट की मांग की.


इस्लाम आतंकियों का धर्म: बुरे फंसे DIG, मानवाधिकार आयोग ने थमाया नोटिस


शम्स को जो जवाब मिला उसमें बताया गया कि आप मुस्लिम समुदाय से सम्बंधित हैं जो आतंकियों का धर्म है. अत: जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के सेक्शन 8 (1)(क) के तहत सुरक्षा कारणों से दस्तावेज़ नहीं दिया जा सकता. शम्स इस जवाब को हासिल करने के बाद जब डी.आई.जी. के खिलाफ एफ.आई.आर. कराने पर आमादा हो गए तो डी.आई.जी. डी.के.त्रिपाठी ने शम्स के खिलाफ धारा 420,467,468 और 153 बी के तहत एफ.आई.आर. दर्ज करा दी. शम्स को सरकारी पत्र के साथ छेड़छाड़ के इलज़ाम में गिरफ्तार करने की तैयारी शुरू हो गई. शम्स की गिरफ्तारी पर तो हाईकोर्ट ने जांच शुरू कर दी लेकिन उस पत्र की फारेंसिक जांच भी शुरू हो गई.


digडी.आई.जी. के पत्र की 6 पेज की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि पत्र के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है.पत्र की जांच हर पहलू से की गई है. रिपोर्ट में लिखा है कि जिस स्थान पर कागज़ में छेड़छाड़ होती है वहां कागज़ का रंग बदल जाता है. कागज़ के फाइबर में भी बदलाव आता है. पात्र में लिखे अक्षरों और शब्दों के बीच की दूरी, पंक्तियों के बीच की दूरी का भी अध्ययन किया गया और कहीं भी छेड़छाड़ की गुंजाइश नज़र नहीं आई.


पत्र की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद आल इण्डिया मुस्लिम काउंसिल के जनरल सेक्रेटरी अल्लामा ज़मीर नकवी ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केन्द्रीय गृह मंत्री और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर कार्यवाही के लिए लिखा.


राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केन्द्रीय गृह सचिव को नोटिस जारी करते हुए डी.आई.जी. की भाषा को मजहबी आज़ादी देने वाले हिन्दुस्तान के कानून की धारा 14 और 15 के सिद्धान्तों के खिलाफ बताया है. आयोग ने 4 हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है.


नोटिस मिलने के बाद गृह मंत्रालय भी सक्रिय हो गया है. केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सी.आर.पी.एफ. के महानिदेशक को नोटिस भेजकर जवाब माँगा है.


शम्स तबरेज़ के इस प्रकरण का खुलासा करते हुए तहलका न्यूज़ ने डी.आई.जी. डी.के. त्रिपाठी का पत्र प्रकाशित किया था लेकिन तब डी.आई.जी. ने तहलका न्यूज़ को उसी पत्र की दूसरी प्रति भेजते हुए उसे असली बताया था और कहा था कि उनके पत्र में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं लिखा था. उनके पत्र के साथ छेड़छाड़ कर आपतिजनक चीज़ें जोड़ी गई हैं.

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