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अब BCCI की आय और व्यय पर नजर रखेंगे लेखा परीक्षक

 Vikas Tiwari |  2016-10-21 17:13:46.0

BCCI


नई दिल्ली. सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के वित्तीय मामलों पर निगरानी रखने के लिए लोढ़ा समिति एक स्वतंत्र लेखा परीक्षक की नियुक्ति करेगी। इन मामलों में मीडिया अधिकार को लेकर किए गए करार भी शामिल हैं।

लेखा परीक्षक बीसीसीआई की आय और व्यय की जांच और ऑडिट करेंगे। टेंडर प्रक्रिया के मामले में लोढ़ा समिति को लेखा परीक्षक की सलाह लेने की छूट होगी। लेखा परीक्षकों पर होने वाला सभी खर्च बीसीसीआई को वहन करना होगा।


सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी.एस. ठाकुर, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ ने कहा कि बीसीसीआई अपने प्रदेश निकायों (राज्य क्रिकेट संघों) को तब तक धन का आवंटन नहीं करेगा, जब तक ये संघ न्यायालय के निर्देशों और लोढ़ा समिति की सिफारिशों का पालन किए जाने पर रजामंदी नहीं जता देते।

अदालत ने बीसीसीआई को आदेश लागू करने के लिए तीन दिसम्बर तक का समय दिया है और पांच दिसंबर को अनुपालन रिपोर्ट दायर करने को कहा है।

न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा, "बीसीसीआई को किसी भी राज्य संघ को किसी भी उद्देश्य से किसी भी तरह के कोष के वितरण से तब तक रोका जाता है जब तक कि संबंधित राज्य संघ इस अदालत द्वारा 18 जुलाई 2016 के फैसले में स्वीकार की गई समिति की सिफारिशों को लागू करने की शपथ का प्रस्ताव स्वीकार नहीं करते।"

पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि यह प्रस्ताव पारित होने के बाद, संबंधित राज्य संघों को किसी भी तरह का भुगतान देने से पहले प्रस्ताव की प्रति इस अदालत और लोढ़ा समिति के समक्ष दी जानी चाहिए, जिसके साथ राज्य संघ के अध्यक्ष का हलफनामा भी होना चाहिए जिसमें इस अदालत द्वारा संशोधित समिति की रिपोर्ट में शामिल सुधारवादी कदमों को मानने की शपथ ली गई हो।

शीर्ष अदालत ने कहा कि बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को समिति के सामने पेश होना होगा और अदालत के निर्देशों और समिति की अनुशंसाओं को राज्य संघों द्वारा मनवाने के संबंध में उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी।

न्यायालय ने कहा कि लोढ़ा समिति के सचिव इस आदेश की एक प्रति अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के अध्यक्ष शशांक मनोहर को भेजेंगे। अदालत के इस आदेश से इस शंका का निवारण भी हो गया कि लेखा परीक्षकों की नियुक्ति के मामले में आईसीसी और बीसीसीआई के बीच किस तरह के पत्रों का आदान-प्रदान हुआ था। अब अदालत का आदेश आईसीसी के सामने होगा।

बीसीसीआई अध्यक्ष ठाकुर ने शुक्रवार को कहा कि वह लोढ़ा समिति को बोर्ड के वित्तीय मामलों की जांच एवं निगरानी के लिए स्वतंत्र लेखा परीक्षक नियुक्त करने के शीर्ष अदालत के फैसले का पहले अध्ययन करेंगे और उसके बाद इस पर प्रतिक्रिया देंगे।

ठाकुर ने यहां संवाददाताओं को बताया, इस फैसले का क्रिकेट पर क्या असर होगा? इस पर अदालत के आदेश की पूरी जानकारी हासिल करने के बाद ही प्रतिक्रिया दी जाएगी। एक बार हमें आदेश की प्रतिलिपि मिल जाए, उसके बाद हम अपना बयान देंगे। कुछ परेशानियां ऐसी हैं, जिन्हें अदालत के सामने पेश किया गया है।

उन्होंने कहा, मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। राज्य के संघों को लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करना है। एक बार उन्हें आदेश मिल जाए, तो हम उनके साथ चर्चा कर उन्हें इन सिफारिशों को लागू करने के लिए कहेंगे।

सर्वोच्च न्यायालय की ओर से नियुक्त की गई लोढ़ा समिति ने कई बदलावों का सुझाव दिया है, जो देश में क्रिकेट के प्रशासन को बदल सकता है।

लोढ़ा समिति ने अपनी सिफारिशों में ठाकुर सहित बीसीसीआई के सभी आला अधिकारियों को हटाने को कहा है।

शीर्ष अदालत ने 18 जुलाई को अपने एक फैसले में बीसीसीआई में सुधारों पर लोढ़ा समिति की सिफारिशों को स्वीकृति दे दी थी और इन्हें लागू करने के लिए निर्देश भी जारी किए थे।

बीसीसीआई ने समिति की सिफारिशों को लागू करने में आनाकानी की। इस पर लोढ़ा समिति ने बोर्ड पर सुधारों को रोकने और शीर्ष अदालत द्वारा दिए गए निदेशरें का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।

शीर्ष अदालत के निदेशरें का उल्लंघन करने और सिफारिशों को लागू न करने का आरोप लगाते हुए लोढ़ा समिति ने बीसीसीआई के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी और साथ ही बोर्ड के सभी आला अधिकारियों को उनके पद से हटाने की भी अपील की।

इस माह की शुरूआत में, बीसीसीअई की विशेष आम बैठक (एसजीएम) में लोढ़ा समिति की कुछ सिफारिशों को लागू करने पर मंजूरी दी गई। लेकिन, बोर्ड ने अपने शीर्ष आला अधिकारियों को हटाने की मांग का विरोध जारी रखा है।

सर्वोच्च न्यायालय में लोढ़ा समिति की ओर से प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस विशेष बैठक में बीसीसीआई के कार्य पर निगरानी रखने के लिए एक शीर्ष परिषद के गठन का भी फैसला लिया गया।


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