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सामने आया 2011 का सर्जिकल स्ट्राईक, काट लाये थे 3 पाक सैनिको के सर

 Tahlka News |  2016-10-09 11:46:41.0

सामने आया 2011 का सर्जिकल स्ट्राईक, काट लाये थे 3 पाक सैनिको के सर

तहलका न्यूज ब्यूरो

देश में सर्जिकल स्ट्राईक के बारे में उठी चर्चा के बाद अब सेना के सूत्रों के हवाले से प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार “द हिन्दू” ने 2011 में भारतीय सेना द्वारा किए गए सर्जिकल स्ट्राईक का खुलासा किया है. अखबार का दावा है कि आपरेशंन जिंजर से जुड़े सारे आधिकारिक सबूत उसके पास मौजूद हैं.

इस खुलासे के बाद भाजपा के उस दावे पर सवाल खड़े होने लगे हैं जिसमे भाजपा नेताओं ने कहा था कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व के बाद पहली बार सेना का मनोबल इतना बढ़ा कि वह सर्जिकल स्ट्राईक जैसे कदम उठा सके. दूसरी तरफ कांग्रेस का कहना है कि उसकी सरकार ने काफी सैन्य कार्यवाही का राजनितिक इस्तेमाल नहीं किया इसलिए सेना कि कार्यवाहियाँ गुप्त रखी गयी.


कुपवाड़ा की 28 डिवीजन के चीफ और इस ऑपरेशन को अमलीजामा पहनाने वाले रिटायर्ड मेजर जनरल एस. के. चक्रवर्ती ने अखबार से इसकी पुष्टि की है. यह आपरेशन 25 पैरा कमांडोज ने अंजाम दिया है.

2011 में पाक सेना द्वारा 2 भारतीय सैनिको ने सर काटे गए थे और इसके जवाब में भारतीय सेना ने लगातार किए ख़ुफ़िया आपरेशंस में 3 पाक सैनिको के सर काट कर ले आई थी. इस दौरान 13 सैनिक भी मारे गए.

इस घटना की शुरुआत 30 जुलाई को कुपवाड़ा में पाक सेना द्वारा अचानक किए गए हमले के साथ हुयी थी जब 19 राजपूत बटालियन को 20 कुमाऊं रेजिमेंट से रिप्लेस किया जाना था. मौके का फायदा उठाते हुए पाकिस्तानी बॉर्डर एक्शन टीम (BAT) ने पोस्ट हमला कर दिया और हवलदार जयपाल सिंह अधिकारी और लांस नायक देवेंदर सिंह के सिर काट कर अपने साथ ले गई.

इसके बाद भारतीय सेना ने बदले की योजना बनायीं और अब तक के सबसे खतरनाक आपरेशन को अंजाम दिया. इस आपरेशन का नाम “आपरेशन जिंजर” रखा गया था. इसके लिए भारतीय सेना ने एयर सर्विलांस और फिजिकल तरीकों का उपयोग किया और अपने टारगेट चिन्हित किए.

भारतीय सेना ने पाकिस्तान की एक पुलिस चौकी और जोर, हिफाजत और लशदत इलाके के पास स्थित आर्मी पोस्ट को लक्ष्य बनाया. सेना की योजना पुलिस चौकी पर हमला करने की थी, ताकि ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा सके।
दो महीने तक लगातार तैयारी के बाद सेना ने 30 अगस्त, मंगलवार को 'ऑपरेशन जिंजर' लॉन्च किया. ऑपरेशन में शामिल एक अधिकारी के मुताबिक 'हमने मंगलवार का दिन इसलिए चुना, क्योंकि करगिल युद्ध सहित पिछले कई मौकों पर हमें जीत मिली थी. हमने ईद से ठीक एक दिन पहले की योजना बनाई क्योंकि पाकिस्तानी इस समय जवाबी हमले उम्मीद कम करते हैं.'

हमले के लिए पैरा कमांडोज के 25 जवान, 29 अगस्त को अपने लॉन्च पैड पर सुबह 3 बजे पहुंच गए और रात के 10 बजे तक वहीं छुपे रहे. इसके बाद उन्होंने एलओसी क्रॉस किया और पाकिस्तानी पुलिस चौकी के पास पहुंच गए। सुबह 4 बजे हमलावर टीम दुश्मन के क्षेत्र में हमले के इंतजार में थी. अगले एक घंटे में क्षेत्र में माइंस बिछा दी गई और हमले के लिए कमांडोज ने अपनी जगह ले ली. 30 अगस्त को सुबह सात बजे के करीब उन्हें चार पाकिस्तानी सैनिक दिखाई दिए, जिसका नेतृत्व एक जूनियर कमीशंड अधिकारी कर रहा था. भारतीय सेना के जवानों ने उनके हमले की जगह पर पहुंचने का इंतजार किया और फिर माइंस को डेटोनेट कर दिया. धमाके में चारों गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद कमांडोज ने ग्रेनेड से उन पर हमला कर दिया. इनमें से एक पाकिस्तानी सैनिक भागते हुए नीचे गिर गया. भारतीय सैनिकों ने अन्य तीन मरे हुए सैनिकों के सिर काट डाले और उनके रैंक चिन्ह, हथियार और दूसरे निजी सामान ले लिए.

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