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लोग जानना चाहते हैं, गीतों को किसने आवाज दी!

 Tahlka News |  2016-04-19 04:48:14.0

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दुर्गा चक्रवर्ती


नई दिल्ली, 19 अप्रैल.  'परेशान', 'दारू देसी' और 'बलम पिचकारी' जैसे गीतों के लिए मशहूर गायिका शलमली खोलगड़े का कहना है कि अब लोग यह जानना चाहते हैं कि गीत को किसने आवाज दी है और कौन सा गीत किसने गाया है। कलाकार गीतों के बोलों पर अपने होंठ हिलाते हैं, क्या इसके कारण पाश्र्वगायक के काम को कम पहचान मिलती है, शलमली ने इस सवाल पर आईएएनएस से कहा, "अब हम पहले से काफी बेहतर स्थिति में हैं। मैं शुक्रगुजार हूं कि अब यह चलन बदल रहा है और अब लोग जानना चाहते हैं कि कौन सा गीत किसने गाया है।"


उन्होंने कहा, "वे जानते हैं कि फिल्म के कलाकार हकीकत में नहीं गा रहे। इसे देखते हुए मैं कह सकती हूं कि हां, पाश्र्वगायन एक तरह से दूसरे दर्जे का काम है।"

'लत लग गई' की गायिका का मानना है कि संगीत उद्योग में अपनी पहचान बनाने के लिए काफी मेहनत करनी जरूरी है।

उन्होंने कहा, "खुद को आगे बढ़ाने के लिए काफी अवसर हैं। लोगों को यह जानने दें कि मैने यह गाना गाया है और यह मेरे काम की शैली है। यह सचमुच आप पर निर्भर करता है कि आप अपने काम की पहचान बनाने के लिए कितना प्रयास करते हैं।"

अपने विविध प्रकार के गायन के लिए मशहूर गायिका ने 'बेशर्मी की हाइट' से लेकर 'दारू देसी', 'शायराना' और 'अगा बाई' जैसे गीतों को अपनी आवाज से सजाया है।

उन्हें यह कब पता चला कि वह बहुमुखी गायिका बन सकती हैं? इस सवाल के जवाब में शलमली ने कहा, "मुझे यह अहसास तब हुआ कि मैं विविध प्रकार के गीत गा सकती हूं, जब मुझे इस प्रकार के अवसर दिए गए। इसलिए मुझे नहीं लगता कि मुझे यह अहसास हुआ कि मैं बहुमुखी हूं, बल्कि उन्हें ऐसा लगा जिन्होंने मुझे इस प्रकार का काम दिया।"

शलमली ने कहा, "उन्होंने इस बात का लाभ उठाया कि मैं अपनी आवाज को खास अंदाज में ढाल सकती हूं और आज मैं यह कह सकती हूं कि हर गायक, कई अंदाजों में अपनी आवाज का प्रयोग कर सकता है।"

विविध किस्मों के गीतों के गायन से हिंदी फिल्म उद्योग में धूम मचाने वाली गायिका का साथ ही यह भी मानना है कि अब संगीत उद्योग में बदलाव हो रहा है।

वह चार वर्षो से संगीत उद्योग में हैं और उनका कहना है कि संगीत उद्योग के चलन में हो रहे बदलावों को देखने के लिए इतना समय काफी है।

गायिका ने कहा, "लोग जैसा संगीत पसंद करते हैं, उसमें बदलाव हुआ है। मैं यह नहीं कहूंगी कि यह बदलाव बहुत बड़ा है, लेकिन कोई छोटा सा बदलाव भी अच्छा होता है।"

'चिंगम चबाके' की गायिका ने जोर देकर कहा कि संगीत में बदलाव जरूरी है।

(आईएएनएस)

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