Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

रुक्मणि विवाह की झांकी से भाव विभोर हुए लोग

 Girish Tiwari |  2016-11-13 14:01:45.0

shreemad-bhagvat

लखनऊ. नियम और संयम व्यक्ति के जीवन में हो तो विपरीत परिस्थितियों में भी उसे सफलता हासिल हो सकती है। यह बातें महत्तम राय सेवा ट्रस्ट की ओर से राजाजीपुरम के सत्संग पार्क में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन कथा व्यास श्री पुरूषोत्तम रामानुजाचार्य जी महराज ने भगवान श्री कृष्ण की महारास लीला का वर्णन करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि वृन्दावन में शरद पूर्णिमा की चांदनी रात का मनोहारी चित्रण किया.


व्यास जी ने कहा कि भगवान को प्रेम करने वाले की कोई इच्छा कभी अधूरी नहीं रहती है। उन्होंने भक्तों को शंखचूर, अरिष्टासुर वध, अक्रूर जी का वृन्दावन आगमन, भगवान श्रीकृष्ण को मथुरा आने का निमंत्रण, कुब्जा उद्धार, कंस वध, रूक्मिणी हरण और रूक्मिणी विवाह को आज की कथा के सूत्र में इस तरह से बांधा कि भक्त अपनी सुध-बुध खो बैठे. कथा के अंत में रूक्मिणी विवाह की सुन्दर झांकी प्रस्तुत की गयी।


महत्तम राय सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में व्यास जी कथा के माध्यम से भक्तों को ज़िन्दगी की जद्दोजेहद भी बताते चल रहे हैं और समस्याओं से बचने का मार्ग भी दिखाते जा रहे हैं. इसी वजह से भक्तों को इस ज्ञान यज्ञ में आनंद के साथ-साथ ज्ञानार्जन भी हो रहा है.


कथा के बीच-बीच में लोगों से संवाद करते समय वह यह बता चुके हैं कि दहेज समाज की बुराई है. परिवार में आनंद बेटी से ही आता है. उनका कहना है कि समाज में जो प्रकृति से मिलता है वह लक्ष्मी है और जो मनुष्य से मिलता है वह माया है.

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top