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वाराणसी सहित पूर्वांचल के ट्रैफिक को मिलेगी रफ़्तार, 2019 तक पूरा होगा PM का ड्रीम प्रोजेक्ट

 Tahlka News |  2016-05-09 07:55:57.0

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तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और पूर्वांचल के अन्य जिलों में ट्रैफिक सिस्टम व्यवस्था सुधारने के लिए केंद्र सरकार हाईवे प्रोजेक्ट्स को गति देने जा रही है। सरकार इसके लिए सुल्तानपुर होकर जाने वाली वाराणसी-लखनऊ सहित विभिन्न रोड प्रोजेक्ट्स पर 20 हजार करोड़ रुपये खर्च करने वाली है। लगभग 900 किलोमीटर लम्बे इस नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट काम चालू हो चुका है और जमीन अधिग्रहण के लिए पैसा भी जारी कर दी गई है। यह सभी फोर लेन प्रोजेक्ट 2019 पूरे कर लिए जाएंगे।


पूरे प्रदेश के हाइवे बजट का आधा पैसा पूर्वांचल के लिए
नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स का रिव्यु करने वाराणसी पहुंचे नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (एनएचएआई) के चेयरमैन राघव चंद्रा ने बताया कि कि पूरे उत्तर प्रदेश में 3200 किलोमीटर लम्बे हाईवे प्रोजेक्ट लगभग 40 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। उन्होंने बताया कि इसमें से लगभग आधी राशी पूर्वांचल के हाईवे के लिए 20 हजार करोड़ एलॉट की गई है। यह सभी हाइवे पूरी तरह कंक्रीट-सीमेंट के बनेंगे। राघव चंद्रा ने बताया कि प्रोजेक्ट के रास्ते में आने वाले कस्बों के बाजारों के साथ कोई भी छेड़छाड़ नहीं होगी। बल्कि इन बाजारों के बाहर से बाई पास का कंस्ट्रक्शन होगा। हाईवे के बीच में पड़ने वाली सभी लिंक रोड्स के लिए सबवे या फ्लाई ओवर बनाए जाएंगे।


वाराणसी से गुजरने वाली 6 लेन 60 फीसदी पूरी

एनएचएआई के चेयरमैन ने बताया कि वाराणसी से होकर गुजरने वाली 6 लेन प्रोजेक्ट का 60 फीसदी काम पूरा हो चुका है। इसके लिए किसानों की जमीने ली गई थी उन्हें पर्याप्त मुआवजा भी दे दिया गया है। टांडा से होते हुए वाराणसी और आजमगढ़ को जोड़ने वाले प्रस्तावित हाईवे का कंस्ट्रक्शन दो फेज में होना है और इसमें 15 जगहों पर बाई पास बनेंगे, जिनकी लंबाई करीब 70 किलोमीटर होगी। यह प्रोजेक्ट साल 2019 में पूरा हो जाएगा।

वाराणसी के आसपास बन रहे हैं 8 हाईवे
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर पीएमओ बनारस के आस-पास कुल 8 हाईवे विकसित करने की योजना तैयार की थी। इनमें बनारस रिंग रोड भी शामिल है। इन हाईवे के डेवलप होने से पूर्वांचल के आजमगढ़, गोरखपुर, टांडा, सुल्तानपुर और सारनाथ व आसपास के इलाकों को खासतौर पर फायदा पहुंचेगा।

वाराणसी रिंग रोड
- वाराणसी शहर को ट्रैफिक के बोझ से निजात दिलाने के लिए एनएच-56 को एनएच-29 से जोड़ने और दूसरे चरण में एनएच-29 को एनएच-2 से जोड़ने की योजना पर काम चल रहा है।
- फर्स्ट फेज में रिंग रोड के कंस्ट्रक्शन पर करीब 394 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
- पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के बजाय मोदी सरकार ने रिंग रोड का कंस्ट्रक्शन अपने बजट (ईपीसी मॉडल) से कराने का फैसला किया है। यह प्रोजेक्ट 2017 के अंत तक पूरा हो जाएगा।

वाराणसी- बाबतपुर एयरपोर्ट रोड
- बनारस से बाबतपुर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी सुधारने के लिए एनएच-56 के 20 किमी। हिस्से को विकसित किया जा रहा।

सारनाथ रोड
बनारस क्लब क्रासिंग से सारनाथ के बीच 6 किलोमीटर सारनाथ रोड का डेवलपमेंट भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्राथमिकता में शामिल है। इस मार्ग पर फुटपाथ, ओवरब्रिज भी बनाने की योजना है।

बनारस-आजमगढ़ रोड
बनारस शहर को आजमगढ़ से जोड़ने वाले एनएच-23 को चौड़ा किया जाएगा।

वाराणसी -सुल्तानपुर 4 लेन हाईवे
- वाराणसी और सुल्तानपुर के बीच एनएच-56 के 146 किलोमीटर हिस्से को फोर लेन बनाया जाएगा।
- इस हाईवे के को बनाने में लगभग 1200 करोड़ रुपये के खर्च आएगा।

वाराणसी -गोरखपुर रोड
- वाराणसी को गोरखपुर से जोड़ने वाले एनएच-29 के करीब 200 किलोमीटर हिस्से को चौड़ा किया जा रहा है।
- इसके लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी।
- इस प्रोजेक्ट पर लगभग 1600 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

वाराणसी -टांडा रोड
बनारस और टांडा के बीच एनएच-233 के 177 किलोमीटर के हिस्से को चौड़ा किया जाना है। इस प्रोजेक्ट को भी फाइनेंस मिनिस्ट्री ने अपनी मंजूरी दे दी है।

वाराणसी -औरंगाबाद 6 लेन हाईवे
- वाराणसी को बिहार के औरंगाबाद से जोड़ने वाले एचएच-2 को 6 लेन बनाने का प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल चुकी है ।
- यूपी और बिहार के बीच सड़क संपर्क सुधारने वाले इस प्रोजेक्ट पर लगभग 2848 करोड़ रुपये का खर्च आएगा


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