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जानिए क्‍या है MFN, पीएम मोदी ने बुलाई समीक्षा बैठक

 Girish Tiwari |  2016-09-29 04:43:45.0


पाक को एक और झटका देने की तैयारी में मोदी सरकार, MFN के मुद्दे पर बुलाई बैठक


तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
नई दिल्ली: उरी में हुए आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ अपने कड़े रुख को बरकरार रखते हुए भारत गुरुवार को पाकिस्तान को दिया गया 'सबसे ज़्यादा तरजीह वाला मुल्क' (मोस्ट फेवर्ड नेशन) का दर्जा वापस लेने पर विचार करेगा। माना जा रहा है कि भारत, पाकिस्तान को कूटनीतिक मोर्चे पर एक और झटका दे सकता है। बता दें कि भारत ने 1996 में पाकिस्तान को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा दिया था।


पीएम नरेंद्र मोदी ने इसकी समीक्षा के लिए आज एक बैठक बुलाई है। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोवाल के अलावा विदेश मंत्रालय और कंपनी मामलों के मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।


बताते चले कि उरी हमले के बाद से ही देश में लगातार पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग हो रही है। सरकार ने सिंधु समझौते को तो नहीं तोड़ा, लेकिन वह उसे दिया गया मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस छीन सकती है। इस फैसले से पाकिस्तान की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर बुरा असर पड़ेगा।


जानिए क्या है एमएफएन
एमएफएन का मतलब है मोस्ट फेवर्ड नेशन, यानी सर्वाधिक तरजीही देश। विश्‍व व्‍यापार संगठन और इंटरनेशनल ट्रेड नियमों के आधार पर व्यापार में सर्वाधिक तरजीह वाला देश (एमएफएन) का दर्जा दिया जाता है। एमएफएन का दर्जा मिल जाने पर दर्जाप्राप्त देश को इस बात का आश्वासन रहता है कि उसे कारोबार में नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। डब्ल्यूटीओ बनने के साल भर बाद भारत ने पाकिस्तान को 1996 में एमएफएन का दर्जा दिया था लेकिन पाकिस्तान की ओर से भारत को ऐसा कोई दर्जा नहीं दिया गया था।


क्या लाभ हैं एमएफएन का दर्जा प्राप्त करने का 
एमएफएन का दर्जा कारोबार में दिया जाता है। इसके तहत आयात-निर्यात में आपस में विशेष छूट मिलती है। यह दर्जाप्राप्त देश कारोबार सबसे कम आयात शुल्क पर होता है। डब्ल्यूटीओ के सदस्य देश खुले व्यापार और बाज़ार से बंधे हैं मगर एमएफएन के क़ायदों के तहत देशों को विशेष छूट दी जाती है।

सीमेंट, चीनी, ऑर्गेनिक केमिकल, रुई, सब्जियों और कुछ चुनिंद फलों के अलावा मिनरल ऑयल, ड्राई फ्रूट्स, स्टील जैसी कमोडिटीज़ और वस्तुओं का कारोबार दोनों देशों के बीच होता है। भारत और पाकिस्तान के बीच 2012 के आंकड़े के मुताबिक़ करीब 2.60 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है।

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