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जाने दो बीती बातों को जाने दो.. वत्सला पाण्डेय की कविताएँ

 Tahlka News |  2016-11-05 11:39:49.0

vatsala-3लखनऊ की युवा कवियत्री वत्सला पाण्डेय ने बहुत कम समय में साहित्य जगत में अपनी छाप छोड़ी है. पेशे से शिक्षिका वत्सला के गीत और कविताएँ इन दिनों सुर्खिया और सम्मान बटोर रहे हैं. साहित्य में उत्कृष्ट लेखन हेतु सृजन सम्मान ,यूपी प्रेस क्लब लखनऊ का प्रतिष्ठित गीत हेतु गीत गिलहरी सम्मान,तुलसी शोध संस्थान द्वारा रचनाधर्मिता के लिये सन्त तुलसी सम्मान, नसीम अख्तर सिद्दीकी अकादमी द्वारा काव्य पाठ हेतु सम्मान सहित हिंदी की विभिन्न कार्यशालाओ में प्रतिभाग एवम् सम्मान वत्सला के साहित्य सृजन को और भी पुष्ट करते हैं.

1
जाने दो बीती बातों को जाने दो

खुशियों के कुछ बीज,
रोंप दो मन की माटी में
नव अंकुर को फिर
घर आँगन में लहराने दो


जाने दो बीती बातों को जाने दो.....

बिखरे रिश्तों के तिनके
ढूढो पूरे मन से
उन तिनकों को जोड़ जोड़
फिर नीड बनाने दो

जाने दो बीती बातों को जाने दो

द्वेष जलन ईर्ष्या भावों को
चूर चूर कर डालो
उस चूरे को नेह नदी में
फिर बह जाने दो

जाने दो बीती बातों को जाने दो

जब फैले दुःख का अंधियारा
दूजों के जीवन में
तेज रौशनी हर्ष दीप की
हमें जलाने दो.....

जाने दो बीती बातों को जाने दो...

कुछ अमलताश कुछ
रजनीगन्धा भी
रंग बिरंगे फूलों से
अब धरा सजाने दो

जाने दो बीती बातों को जाने दो

2
आज शाम मैंने ये चाहा
शब्दों से इक गगन सजाऊँ

सुंदर-सुंदर, प्यारे-प्यारे
चुन लूँ मैं शब्दों के तारे
कागज़ रुपी इस नभ पर
फिर इनको टांकु एक-एक कर

शब्द-कोष हाथों में लेकर
शब्दों को उसमें से छाँटा
एक-एक कर उन शब्दों को
पन्ने में कृतिका से टांका

अब शब्दों से सजा है ये नभ
भरा हुआ है हर कोना अब
पर चन्दा मैं किसे बनाऊँ
सोच रहा है मेरा ये मन

यही सोचकर एक बार फिर
शब्द-कोष को उलटा-पलटा
पर मैंने कुछ भी न पाया
कोई शब्द न मुझको भाया

किन्तु अनायस एक शब्द पर
ज्यों ही मैंने ध्यान लगाया
प्रीत,प्रेम,अनुराग,नेह बस
यही अर्थ मेरे मन भाया

अहा शब्द है बेहद मोहक
मन को देता मीठी ठंडक
मेरे हृदय ने कहा यही फिर
यही शब्द है मेरा चन्दा

ये बिलकुल आशा का कजरा
जूड़े में बेले का गजरा
इसकी महक है बड़ी निराली
महके जिससे डाली-डाली

बड़ी आस से इस चन्दा को
मैंने नभ पर टांक दिया है
इसकी धवल चांदनी को झट
अँजुरी में फिर बाँध लिया है

इस चन्दा को अँजुरी में भर
हुआ प्रफुल्लित मेरा ये मन...

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