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स्वाती सिंह की लोकप्रियता ने बढ़ाई योगी समर्थको की चिंता

 Tahlka News |  2016-07-23 10:31:10.0

स्वाती सिंह की लोकप्रियता ने बढ़ाई योगी समर्थको की चिंता
तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. सियासत में गाली युद्ध की नायिका बन कर उभरी भाजपा  नेता दया शंकर  सिंह की पत्नी स्वाती सिंह को यूपी में मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने की मांग भाजपा के भीतर से ही उठने लगी है. स्वाती सिंह की इस लोकप्रियता ने भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ के उन समर्थको के माथे पर बल ला दिया है जो योगी को सीएम का चेहरा बनाने के लिए पूरे जोर शोर से लगे हैं.

जिस दमखम से स्वाती सिंह ने मायावती के खिलाफ मोर्चा खोला है उससे पार्टी समर्थको का एक बड़ा वर्ग प्रभावित हुआ है और उसे लग रहा है कि स्वाती में नेतृत्व की क्षमता और जुझारूपन है.

दयाशंकर सिंह के बयांन से बैकफूट पर आई भाजपा को संजीवनी दिलाने वाली स्वाती सिंह को पार्टी में शामिल कर टिकट देने की मांग तो जोर पकड़ ही रही थी मगर अब भाजपा के शिक्षक प्रकोष्ठ के नेता और पदाधिकारी रहे अरविन्द त्रिपाठी ने सोशल मीडिया के जरिये स्वाती को सीएम पद के लिए प्रत्याशी घोषित करने की मांग कर दी है. भाजपा समर्थको का एक बड़ा समूह भी सोशल मीडिया पर इस मांग को जोर शोर से उठा रहा है.


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स्वाती सिंह के इस सियासी उभार से योगी समर्थको की बेचैनी बढ़ गयी है. गोरखपुर में शुक्रवार को नरेन्द्र मोदी की रैली में योगी के बारे में किसी अनुकूल घोषणा की उम्मीद कर रहे योगी समर्थको को तब भी निराशा हुयी थी जब नरेन्द्र मोदी ने इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की. यहाँ तक कि मंच से मोदी ने एम्स का श्रेय भी स्पष्ट रूप से योगी को न देते हुए इसे जनता की जीत बता दिया.

योगी की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवारी को हवा देने के लिए समर्थक कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं मगर पार्टी ने किसी के नाम की अब तक घोषणा नहीं की है.

स्वाती सिंह के समर्थक यह तर्क भी दे रहे हैं कि स्वाती सिंह भी पूर्वांचल से है और उसी राजपूत जाति से आती हैं जिससे योगी आदित्यनाथ आते हैं. ऐसे में जातीय समीकरण को धक्का लगाने का भी कोई खतरा नहीं है. साथ ही स्वाती के प्रति उमड़ी सहानुभूति की वजह से महिलाओं का भी समर्थन मिलेगा.

हालाकि कुछ समय पहले स्वाती सिंह अपने पति की प्रताड़ना से तंग आ कर प्रदेश भाजपा कार्यालय पर अपनी बेटी सहित धरना भी दे चुकी है और उन्हें पार्टी से निकलने की मांग भी स्वाती ने की थी. इस नए घटना क्रम में भी स्वाती ने खुद को दयाशंकर से अलग रखा है और नारी सम्मान को मुद्दा बनाया है.

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