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इलेक्ट्रिसिटी बिल के विरोध में एकदिनी हड़ताल करेंगे इन्जीनियर

 Tahlka News |  2016-05-30 12:42:17.0

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. आल इंडिया पावर इन्जीनियर्स फेडरेशन की रविवार को बैंगलोर में हुई राष्ट्रीय महासभा की मीटिंग में यह निर्णय लिया गया कि यदि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट ) बिल वर्तमान स्वरुप में संसद में रखा गया तो देश के 80 हज़ार बिजली इन्जीनियर विरोध स्वरुप एक दिन की राष्ट्र व्यापी हड़ताल करेंगे । फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने आज यहाँ बताया कि बिजली आपूर्ति के निजीकरण के उद्देश्य से लाये जा रहे इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट ) बिल का पुरजोर विरोध किया जाएगा और बिजली कर्मचारियों एवं इन्जीनियरों की नेशनल कोआर्डिनेशन कमीटी के बैनर तले एक दिन की हड़ताल में बिजली कर्मचारी भी सम्मिल्लित होंगे |


shailendra-dubey-765x510उन्होंने बताया कि केन्द्रीय विद्युत् मंत्री पीयूष गोयल बिजली इन्जीनियरों से वार्ता के दौरान स्पष्ट आश्वासन दे चुके हैं कि बिजली इन्जीनियरों के सुझाओं के अनुरूप बिल में संशोधन किये जायेंगे किन्तु अभी तक बिल में कोई संशोधन नहीं किया गया है ऐसी स्थिति में यदि बिल संसद में रखा गया तो राष्ट्र व्यापी आन्दोलन के अलावा और कोई रास्ता नहीं है|

उन्होंने बताया कि केन्द्रीय विद्युत् मन्त्री ने मुख्यतया चार बिन्दुओं पर बिल को संशोधित करने का  आश्वासन दिया था |

  • इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट ) बिल राज्यों पर बाध्यकारी नहीं होगा , इस बिल के प्राविधानों को जो राज्य लागू करना चाहें करें और जो न करना चाहें न करें |

  • विद्युत् आपूर्ति के लाइसेन्स देने में राज्यों को अधिकार होगा कि वे केवल सरकारी क्षेत्र की कम्पनियों को ही लाइसेन्स दें , निजी कम्पनियों को लाइसेन्स देने की कोई बाध्यता नहीं होगी |

  • सभी उपभोक्ताओं को विद्युत् आपूर्ति करना सभी आपूर्ति कम्पनियों के लिए अनिवार्य होगा , अभी बिल में यह प्राविधान है कि निजी क्षेत्र की कम्पनियां मुनाफे के हिसाब से उपभोक्ताओं को बिजली देने के लिए स्वतन्त्र होंगी जबकि अकेले सरकारी कंपनी की जिम्मेदारी होगी कि वह सभी उपभोक्ताओं को बिजली दे चाहे घाटा ही हो रहा हो |

  • राज्य बिजली वितरण और आपूर्ति अलग अलग करने हेतु अपना रोड मैप पाँच साल में देंगे और इस रोड मैप के आधार पर बिजली वितरण और आपूर्ति अलग अलग करने की कोई समय सीमा नहीं होगी , अभी बिल में यह प्राविधान है कि नयी व्यवस्था एक साल में लागू करनी होगी | फेडरेशन की मांग है कि रोड मैप देने के लिए कम से कम दस साल का समय दिया जाए |


उन्होंने बताया कि विद्युत मन्त्री ने यह भी कहा था कि बिल के अन्य बिन्दुओं पर फेडरेशन से विस्तृत वार्ता की जायेगी तथा जल्दबाजी में बिल संसद में नहीं रखा जाएगा | आश्वासन के छः माह बाद भी इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट ) बिल में कोई परिवर्तन न किये जाने से बिजली इन्जीनियरों को आशंका है कि केन्द्र सरकार वर्तमान स्वरुप में ही बिल को पारित कराने की कोशिश कर सकती है |

फेडरेशन ने बिल को जन विरोधी करार देते हुए राष्ट्र व्यापी हड़ताल सहित व्यापक आन्दोलन चलाने का निर्णय लिया है |

आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने निजी घरानों पर अति निर्भरता की ऊर्जा नीति में परिवर्तन करने , तिल्लैय्या और कृष्णापटनम में निजी क्षेत्र की  बिजली घर लगाने में विफलता के बाद अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट की नीति में बदलाव और सस्ती और सुनिश्चित बिजली मुहैय्या कराने हेतु सार्वजनिक क्षेत्र को मज़बूत करने की मांग भी की है |

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