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कोचिंग के जरिये IAS में RSS बना रहा अपनी पहुँच

 Tahlka News |  2016-06-05 07:17:18.0

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उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों को जिस वक्त संघ के सर कार्यवाह कृष्ण गोपाल संबोधित कर रहे थे उस वक्त  कोचिंग संसथान के सफल अभ्यर्थियों के संघ से जुड़े होने पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए थे.

यह पहली बार हुआ है कि आईएएस की सेवा में गए लोगो को संघ के किसी शीर्ष नेता ने संबोधित किया है. दरअसल यह कार्यक्रम “संकल्प” नाम की एक कोचिंग संस्था ने से 'गुरु सम्मान समारोह-2016' के नाम से आयोजित किया था. यह संस्था सिविल सेवा सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग और व्यक्तित्व निर्माण का काम करती है.

संकल्प के संघ से जुडाव की तरफ कई बाते इशारा करती है. देश भर में संकल्प के 14 सेंटर हैं. पुस्तकों के भगवाकरण के आरोपों से घिरे दीनानाथ बत्रा इस कोचिंग सेंटर के एडवायजरी बोर्ड में हैं, और जगमोहन मेंटोर की लिस्ट में हैं. दीनानाथ बत्रा पाठ्यपुस्तकों के भगवाकरण की मुहीम के अग्रणी नेता हैं, जबकि जगमोहन और आरएसएस के रिश्ते जगजाहिर हैं.

संकल्प से जुड़े लोगो का दावा है कि इस बार की संघ लोक सेवा परीक्षा में जो 1,078 लोग चुने गए हैं, इनमें से करीब 60 फीसदी यानी 646 सफल प्रतियोगी छात्रों की सफलता को आरएसएस की कोचिंग संस्था 'संकल्प' की कोचिंग या फिर किसी न किसी तरह के जुडाव का नतीजा है.

इस दावे के साथ ही यह विवाद भी खड़ा होने लगा है कि एक ही कोचिंग संस्था से आखिर कैसे 60 प्रतिशत अभ्यर्थियों का चयन हो गया. इस बीच दिल्ली पुलिस के पूर्व कमिश्नर बीएस बस्सी के संघ लोक सेवा योग के सदस्य के रूप में नियुक्ति ने भी चर्चा को बढ़ावा दे दिया है कि क्या संघ अब लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में अपनी विचारधारा के लोगो को सफल बना कर पूरे देश के प्रशासन को नियंत्रित करने में लगा है? इससे यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या देश के ज्यादातर आईएएस संघ की विचारधारा प्रसारित करने के लिए तैयार किए जा रहा हैं?

इस कोचिंग की वेबसाइट पर स्पष्ट तरीके से दर्ज है कि यहां एक ख़ास विचारधारा के लोग तैयार किए जाते हैं. संकल्प की वेब साईट पर इसके प्रेसिडेंट के सन्देश में यह स्पष्ट रूप से परिलक्षित भी हो रहा है.

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पूर्व छात्र नेता और विख्यात समाजसेवी विश्वविजय सिंह कहते हैं .....देश के लाखों अभ्यर्थी इस परीक्षा में भाग लेते हैं.संकल्प संस्था सिविल सर्विस के इंटरव्यू के लोगों कैंडिडेट्स को तैयारी कराती है. इस बात का अंदेशा है कि संकल्प आरएसएस की विचारधारा के अनुसार तैयारी कराता है और चूंकि यूपीएससी में आरएसएस के समर्थक ही सदस्य बनकर आ रहे हैं, इसलिए ऐसे कैंडिडेट्स को तरजीह मिल रही है। हाल ही में, दिल्ली पुलिस के पूर्व कमिश्नर भीम सेन बस्सी यूपीएससी के सदस्य बनाए गए हैं. बस्सी जेएनयू में छात्रों के दमन के लिए बदनाम रहे हैं.

जानकारों का मानना है कि केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद आरएसएस का सीधा दखल सत्ता संस्थानों के साथ साथ प्रशासनिक और शैक्षणिक संस्थानों में बढ़ा है. विवेकानंद फाउनडेशन से जुड़े लोगो की शीर्ष पदों पर नियुक्तिया हो या संघ की राष्ट्रवादी विचारधारा वाले शिक्षको की केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपति के रूप में नियुक्तियाँ , यह सब संघ की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके जरिये संघ अपनी विचारधारा को व्यापकता देने के लिए ही है.
अब भारतीय प्रशासनिक सेवा संघ का नया लक्ष्य है और इसके नतीजे दिखने शुरू हो गए हैं.

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