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CM अखिलेश के नए शिकार बने दीपक सिंघल, नौकरशाही में सन्नाटा

 Tahlka News |  2016-09-13 07:57:13.0

CM अखिलेश के नए शिकार बने दीपक सिंघल, नौकरशाही में सन्नाटा

उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. महज 65 दिन तक यूपी के मुख्यसचिव के पद पर रहने के बाद चर्चित IAS अधिकारी दीपक सिंघल को मुख्य मंत्री ने हटा दिया. उनकी जगह राहुल भटनागर को नया मुख्य सचिव बनाया गया है.

सोमवार को शुरू हुआ एक्शन  अखिलेश मंगलवार को भी जारी रहा. सोमवार को अखिलेश ने अपने मंत्रिमंडल के दो कद्दावर मंत्रियों  को बाहर  का रास्ता दिखाया था तो मंगलवार को सूबे की नौकरशाही की सबसे बड़ी कुर्सी भी उनके कोप का शिकार हुयी.

दीपक सिंघल को जब बीते 6 जुलाई को मुख्य सचिव पद पर तैनाती मिली थी तब भी यह माना जा रहा था कि वे मुख्यमंत्री की पसंद नहीं है. दीपक सिंघल समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता शिवपाल सिंह यादव के करीबी थे और उन्हें अमर सिंह का भी नजदीकी माना जाता था. आलोक रंजन के रिटायर होने के बाद प्रवीर कुमार मुख्य सचिव पद के सबसे बड़े दावेदार थे, ईमानदार और कर्मठ अधिकारी माने जाने वाले प्रवीर कुमार पर दीपक सिंघल के सियासी तालुकात भारी पड़े और प्रवीर कुमार को पीछे करते हुए दीपक सिंघल इस कुर्सी पर बैठने में कामयाब हो गए.


हलाकि मुख्यमंत्री दीपक सिंघल के नाम पर तब भी राजी नहीं थे और इसीलिए आलोक रंजन के रिटायर होने के दिन ही वे जब छह दिनों के लिए विदेश निकल गए तब सूबे की सबसे प्रमुख कुर्सी खाली ही रही और प्रवीर कुमार बतौर कार्यवाहक काम करते रहे.

मगर अंत में दीपक सिंघल कामयाब हुए और बतौर मुख्यसचिव उनकी ताजपोशी हुयी. अलोक रंजन को मुख्यमंत्री ने अपना सलाहकार बना लिया. मगर दीपक सिंघल और आलोक रंजन में कभी नहीं बनी. दीपक सिंघल के रवैये ने अलोक रंजन को कई बार सार्वजनिक बैठकों में भी असहज कर दिया. इसके अलावा दीपक सिंघल कई बार बैठकों में राजनीतिज्ञों की तरह बोलते भी नजर आये. उनकी कार्यशैली और राजनितिक संबंधो की वजह से अप्रत्यक्ष रूप से मुख्यमंत्री कई बार दबाव महसूस करने लगे थे.

दीपक सिंघल की छवि भी साफ़ सुथरी नहीं थी. मुख्यमंत्री को इस बात का अंदेशा भी कही न कही जरूर था कि इस वजह से उनकी “मिस्टर क्लीन” वाली छवि देर सवेर प्रभावित होगी.

इसीलिए जब अपनी छवि बचने की कवायद में मुख्यमंत्री ने सफाई अभियान की शुरुआत की तब दीपक सिंघल उसकी चपेट में आ ही गए. पहले गायत्री प्रजापति और राजकिशोर सिंह और अब दीपक सिंघल की रुखसती के बाद अखिलेश यादव ने इस बात के सीधे और साफ़ संकेत दे दिए हैं कि वे अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में सारे फैसले खुद ही लेंगे और किसी भी दबाव को बर्दाश्त करने के वे कतई मूड में नहीं दिखाई दे रहे हैं.

अखिलेश अपने फैसले खुद ले रहे हैं इसका सबूत कल मुलायम सिंह के उस बयांन से भी साफ़ पता चलता है जब उन्होंने कहा कि मंत्रियों को हटाने में अखिलेश ने उनसे कोई सलाह नहीं ली और खुद उन्हें मीडिया के माध्यम से ही इस बात का पता चला.

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