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प्रभु ने लिया 'यू टर्न', लातूर को भेजा 4 करोड़ का बिल वापस लिया

 Tahlka News |  2016-05-13 13:38:25.0

suresh-prabhuतहलका न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली. महाराष्ट्र के लातूर में जल संकट के कारण भेजी जा रही पानी की ट्रेन का चार करोड़ रुपए का बिल भेजे जाने के कारण चौतरफा आलोचना के बाद रेलवे ने शुक्रवार को यू टर्न ले लेते हुए बिल वापस ले लिया और कहा कि जब तक जरूरत होगी तब तक लातूर में पानी की आपूर्ति जारी रहेगी। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने मध्य रेलवे के प्रशासन को निर्देश दिये हैं कि लातूर के लोगों को पानी मुहैया कराने में धन आड़े नहीं आयेगा और जब तक जरूरत हो तब तक पानी की ट्रेन चलायी जाए।


रेल मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी किए अपने आधिकारिक बयान में सफाई दी कि हाल ही में लातूर जिला प्रशासन ने मध्य रेल प्रशासन से पानी के परिवहन की लागत बताने का अनुरोध किया था। उसके जवाब में मध्य रेलवे ने जल परिवहन की लागत सूचित की थी। बयान में कहा गया कि लागत की वसूली से कहीं अधिक महत्वपूर्ण संकट की घड़ी में जरूरतमंद लोगों को पानी पहुंचाना है।


बिल को वापस लिया
बयान में कहा गया कि पानी की ट्रेन के परिवहन की निगरानी कर रहे प्रभु ने निर्देश दिये हैं कि लातूर जिला प्रशासन के अनुरोध पर उसे भेजे गये बिल को तुरंत वापस ले लिया जाए। पानी की ट्रेन के परिवहन की लागत वसूली का मामला रेल मंत्रालय अलग से देखेगा। रेल मंत्रालय ने कहा कि रेलवे अपने सामाजिक दायित्वों के निर्वहन के लिये वचनबद्ध है और जरूरत के वक्त देश के लोगों की मदद के लिये हमेशा अग्रणी रहेगी।


अब तक 6 करोड़ लीटर पानी पहुंचाया
महाराष्ट्र में अब तक के सबसे भीषण अकाल को देखते हुए सुरेश प्रभु ने रेलवे के माध्यम से पानी के परिवहन का इंतजाम किया। रेलवे बोर्ड ने तुरंत ही कोटा से 100 टैंकरों को जुटाकर मुंबई भेज दिया। मध्य रेलवे ने इन्हें शोलापुर और पुणे मंडलों में भेज कर जल परिवहन का इंतजाम किया। पहले 10 दिनों में लातूर एवं मिराज जिला प्रशासन पाइप लाइन बिछाने में लगा रहा। पुणे मंडल ने दस टैंकरों से पानी का परिवहन शुरू कर दिया। बाद में पाइपलाइन एवं जरूरी सुविधायें तैयार होने के बाद 50 टैंकरों से जलापूर्ति शुरू कर दी। अब तक छह करोड़ लीटर से अधिक पानी पहुंचाया जा चुका है।


4 करोड़ रुपए था बिल
उल्लेखनीय है कि कल मीडिया में ऐसी रिपोर्टें आयीं थी कि रेलवे ने महाराष्ट्र सरकार को पानी की आपूर्ति के एवज में परिवहन लागत के मद में चार करोड़ रुपये का बिल दिया है। रेलवे के इस कदम की चौतरफा निंदा की गयी।

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