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कठिन वक्त में राज बब्बर को मिली कांग्रेस की कमान

 Tahlka News |  2016-07-12 14:16:34.0

कठिन वक्त में राज बब्बर को मिली कांग्रेस की कमान

उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. सूबे की राजनीती में संजीवनी तलाश रही कांग्रेस ने आखिर लम्बी कयासबाजी को विराम देते हुए राज्यसभा सांसद और सिने जगत के जाने माने अभिनेता राज बब्बर को अपना नया प्रदेश अध्यक्ष घोषित कर दिया.

यूपी की सियासत में कांग्रेस के इस कठिन दौर में राज बब्बर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के भीतर जोश भरने और कांग्रेस को मुकाबले में एक गंभीर खिलाडी बनाने की जिम्मेदारी मिली है. इस बार राज बब्बर को पेशेवर प्रबंधक और रणनीतिकार प्रशांत किशोर का साथ मिलेगा. पूर्व अध्यक्ष निर्मल खत्री स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष होगे, साथ ही सहारनपुर के फायर ब्रांड नेता इमरान मसूद के साथ राजाराम पाल, राजेश मिश्रा, भगवती प्रसाद चौधरी को पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया है.


यूपी से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करने वाले राज बब्बर को वर्तमान में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का करीबी माना जाता है. राज बब्बर के सहारे कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने खत्म होते जनाधार को वापस लेने के लिए भी लड़ती नजर आएगी.  राज बब्बर के आने से  एक बात के तो साफ़ संकेत हैं कि समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस के चुनावी तालमेल की किसी प्रकार की सम्भावनाये भी नहीं बचेंगी.

थियेटर से फिल्मो तक पहुच कर अपना मुकाम बनाने वाले राज बब्बर की छवि एक जुझारू नेता की रही है. अस्सी के दशक में वीपी सिंह के साथ अपने राजनैतिक पारी की शुरुआत करने वाले राज बब्बर ने एक जोशीले युवा की छवि बनायीं. उन दिनों वे वीपी सिंह के हर मंच पर नजर आते थे और राजीव गाँधी और बोफोर्स के मुद्दे पर बहुत मुखर रहे थे. बाद में राज बब्बर मुलायम सिंह के साथ समाजवादी पार्टी में आ गए.

संसद में राज बब्बर का प्रवेश भी समाजवादी पार्टी के जरिये ही हुआ था. 1994 में मुलायम सिंह यादव ने उन्हें राज्यसभा भेजा था. इसके बाद वे सन 2004 में लोकसभा का चुनाव भी समाजवादी पार्टी के टिकट पर लडे और जीत हासिल की.

इसके बाद ही अमर सिंह से उनका टकराव शुरू हुआ. अमर सिंह की वजह से समाजवादी पार्टी से अलग होने वाले राज बब्बर पहले बड़े नेता हुए. सपा ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने पर उनको 2006 में पार्टी से निष्कासित कर दिया और फिर राजबब्बर ने 2008 में कांग्रेस का दामन थामा. इसके बाद राज बब्बर खुल कर समाजवादी पार्टी और अमर सिंह के खिलाफ  बोलने लगे .

इसके बाद 2009 में राज बब्बर कांग्रेस  टिकट पर  फिरोजाबाद से मुलायम सिंह की बहु डिंपल यादव के खिलाफ मैदान में उतर गए और मुलायम सिंह और अखिलेश यादव की तमाम मेहनत के बाद डिम्पल यादव  को हराकर वे दूसरी बार लोकसभा पहुंचे. 2014 चुनाव के मोदी लहर में गाजियाबाद से भाजपा प्रत्याशी जनरल वीके surendra rajputसिंह से रिकॉर्ड वोटों से राज बब्बर को हार का मुंह देखना पड़ा. फिर पार्टी ने उन्हें उत्तराखंड से राज्य सभा में भेज दिया.
“राज बब्बर के नेतृत्व से कांग्रेस को निश्चित ही एक नयी उर्जा मिलेगी. उनकी छवि जनता के साथ खड़े होने वाले एक जुझारू नेता की है. युवाओं में उनका एक क्रेज है और वे खुद छात्र राजनीती ने तप कर निकले हुए नेता है. हमें पूरा विश्वास है कि उनके नेतृत्व में हम उत्तर प्रदेश की राजनीती को जाति और धर्म के कुचक्र से निकलने में सफल होंगे ...- सुरेन्द्र राजपूत (कांग्रेस नेता और प्रवक्ता)      

चर्चाओं को ख़त्म करते हुए अब सूबे में कांग्रेस अपने आप को धीरे धीरे सक्रिय कर रही है. प्रशांत किशोर की रणनीति पर चलते हुए यूपी में कांग्रेस ने बीते तीन महीनो में संगठन में सक्रिय लोगो की पहचान की और फिर विधान सभावार कार्यकर्ताओं का चुनाव कर लिया है. अब आने वाले अगस्त महीने में लखनऊ में एक बड़ा कार्यक्रम कर कांग्रेस अपने चुनावी अभियान की शुरुआत करेगी. राहुल गाँधी के नेतृत्व में होने वाले इस सम्मलेन में प्रियंका के शामिल होने की भी संभावना है. पार्टी यूपी में लगभग 150 छोटी रैलियों के जरिये माहौल बनाने की कोशिश करेगी.

इस बीच बिहार के सीएम नितीश कुमार भी यूपी में छोटे दलों को एक गठबंधन के अन्दर लाने की कोशिश में जुटे हुए हैं. पीस पार्टी और अपना दल उनके साथ आने को राजी है और बहुत संभावना है कि कांग्रेस इस गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आये.

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