Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

राज्यसभा चुनाव ने कांग्रेस नेताओं को एकजुट किया

 Girish Tiwari |  2016-06-10 10:21:06.0

Rajya-Sabha-Election-2014
संदीप पौराणिक
भोपाल, 10 जून. मध्य प्रदेश में कांग्रेस क्षत्रप खेमों में बंटे रहे हैं और सभी की अपनी-अपनी डफली और अपने-अपने राग रहे हैं। लेकिन राज्य की सत्ता से बेदखल होने के बाद संभवत: यह पहला मौका है, जब राज्यसभा के लिए पार्टी उम्मीदवार विवेक तन्खा को जीताने के लिए सभी एकजुट नजर आ रहे हैं।


मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चार उम्मीदवार मैदान में हैं। इसलिए 11 जून को मतदान होने जा रहा है। चार उम्मीदवारों में दो भाजपा के -अनिल माधव दवे और एम. जे. अकबर- और एक उम्मीदवार कांग्रेस के विवेक तन्खा हैं। निर्दलीय उम्मीदवार विनोद गोटिया को भाजपा का समर्थन हासिल है। निर्दलीय उम्मीदवार के मैदान में होने से ही मतदान की स्थिति बनी है।


निर्दलीय उम्मीदवार के मैदान में आने से कांग्रेस उम्मीदवार विवेक तन्खा की जीत पर संकट मंडराने लगा था, जो अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कांग्रेस के पास 57 विधायक हैं, जो जीत के लिए आवश्यक संख्या से एक कम है। बसपा ने कांग्रेस का समर्थन किया है, जिससे तन्खा की जीत की राह आसान हो गई है। बसपा के चार विधायक हैं। लेकिन बसपा में टूट की आशंका अब भी बनी हुई है।


कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और कमलनाथ भाजपा पर बसपा विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगा चुके हैं, क्योंकि भाजपा नेता बसपा और कांग्रेस के विधायकों के संपर्क में हैं।


राज्य कांग्रेस दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और सुरेश पचौरी के खेमों में बंटी हुई हैं, जिनके समर्थक पार्टी से अधिक अपने-अपने आकाओं के प्रति ज्यादा निष्ठावान हैं।


वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा का मानना है कि "कांग्रेस के तमाम क्षत्रप सिर्फ इसलिए एकजुट हुए हैं, क्योंकि राज्यसभा उम्मीदवार विवेक तन्खा से सभी के मधुर संबंध हैं, मगर यह मान लेना कि वे एकजुट हैं, ऐसा नहीं है। क्षत्रपों के बीच लड़ाई आज की नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही है।"


गत एक सप्ताह से कांग्रेस के सभी बड़े नेता दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, सुरेश पचौरी, कांतिलाल भूरिया, प्रदेश प्रभारी मोहन प्रकाश भोपाल में डेरा डाले हुए हैं। कमलनाथ तो लगभग एक दशक बाद पहली बार लगातार तीन दिनों तक भेापाल में रुके हैं। बैठकों का दौर जारी है। विधायकों को एकजुट रखने की कोशिशें हो रही हैं।


राज्य से राज्यसभा के तीन सदस्यों के निर्वाचन के गणित पर गौर करें तो पता चलता है कि एक उम्मीदवार की जीत के लिए 58 विधायकों का समर्थन आवश्यक है। राज्य विधानसभा में कुल 230 विधायक हैं, जिनमें एक विधायक की मौत के बाद अब भाजपा के 165 विधायक (विधानसभा अध्यक्ष सहित) बच गए हैं। लेकिन 164 ही वोट कर सकेंगे, क्योंकि उसके एक विधायक को सर्वोच्च न्यायालय ने मतदान में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी है।


वोटों के गणित के हिसाब से भाजपा के दो उम्मीदवारों -अनिल माधव दवे व एम. जे. अकबर- की जीत तय है और तीसरी सीट जीतने के लिए उसे 10 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। हालांकि दो निर्दलीय विधायकों का समर्थन उसे मिला है, लेकिन तब भी उसे आठ विधायक और चाहिए।


कांग्रेस के पास 57 विधायक हैं और उसे एक वोट की जरूरत है। बसपा के चार विधायकों का समर्थन कांग्रेस उम्मीदवार तन्खा को मिला है, जिससे उनकी जीत की उम्मीद की जा सकती है।

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top