Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

यहां है मंदोदरी का मायका, नहीं जलाया जाता दामाद रावण को

 Anurag Tiwari |  2016-10-11 06:38:04.0

रावण ravan, mandsaur, मंदसौर, Dusshehra, दहशरा, मंदोदरी,

तहलका न्यूज ब्यूरो

मंदसौर. पूरे देश भर में बुराई पर अच्छाई के प्रतीक के रूप में रावण का पुतला दहन होता है. इसी के दशहरा पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. लेकिन मध्य प्रदेश में कई जगहें ऐसी भी हैं जहां रावण को पूजनीय माना जाता है और उसके पुतले का दहन नहीं होता. इन जगहों पर रावण की पूजा के लिए बकायदा मंदिरों का निर्माण भी हुआ है.

सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य मध्य प्रदेश के मंदसौर में दशहरा के दिन रावण के पुतले को जलाते नहीं हैं बल्कि उसे दामाद की तरह पूरे सत्कार के साथ पूजते हैं. कहा जाता है कि मंदसौर रावण की धर्मपत्नी मंदोदरी का मायका है. पहले इसका नाम दशपुर था, लेकिन बाद में इसे मंदोदरी के नाम पर मंदसौर कहा जाने लगा.


मंदोदरी का मायका होने के चलते मंदसौर रावण का ससुराल है और इसिलए यहां दामाद रावण के सम्मान की परंपरा है. इसी परंपरा के कारण यहां रावण के पुतले का दहन करने की बजाय उसे पूजा जाता हैं. मंदसौर जिले के रूंडी इलाके में में रावण की मूर्ति बनी हुई है, जिसकी पूजा की जाती हैं.

इसी तरह विदिशा से करीब 50 किमी दूर रावन गांव के रावण मंदिर में गांव वाले पूजा-अर्चना कर महाबली रावण से गांव की खुशहाली की दुआ मांगी जाती है. इस परंपरा को गांव वाले सदियों से मानते और निभाते चले आ रहे हैं. दशहरे के दिन यहां पर भी विशेष पूजा की जाती है . यहां सभी दशानन को रावण नहीं बल्कि सम्मान के साथ रावण बाबा बुलाते हैं.

रावण मंदिर के पुजारी नरेश तिवारी बताते हैं कि रावण बाबा की प्रतिमा सदियों से गांव के पास हैं. वहीं उज्जैन जिले के चिखली गांव में भी रावण दहन की नहीं किया जाता है बल्कि यहां भी रावण की पूजा होती है. किंवदंती है कि अगर रावण की पूजा नहीं की गई तो गांव जलकर राख हो जाएगा.इसी डर से यहां के रहने वाले रावण का दहन नहीं करते और गांव की सुरक्षा के लिए मूर्ति की पूजा करते हैं.

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top