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रेमंड की शुरुआत ‘लुक गुड, डू गुड’

 Sabahat Vijeta |  2016-08-10 17:37:39.0

remand


लखनऊ. सूटिंग फैब्रिक्स के अग्रणी निर्माता रेमंड ने एक अनूठी पहल शुरू की है. स्वयंसेवी संस्था गूंज के सहयोग से शुरू की गई इस शुरुआत में कम्पनी ने यह व्यवस्था की है कि कोई भी ग्राहक अपना इस्तेमाल किया हुआ ट्राउज़र लेकर रेमंड के किसी भी शोरूम में आएगा और अपने नये ट्राउजर का कपड़ा खरीदकर पुराना ट्राउज़र शोरूम में दे देगा. उस पुराने ट्राउज़र के बदले में कम्पनी उस ग्राहक से नये ट्राउज़र की सिलाई का पैसा नहीं लेगी. वह इस्तेमाल किया गया ट्राउज़र किसी ऐसे व्यक्ति के पास पहुँच जायेगा जो खुद ट्राउज़र नहीं खरीद सकता है. कम्पनी ने इस योजना को  ‘लुक गुड, डू गुड’ नाम दिया है.


रेमंड के प्रेसिडेंट सुधांशु पोखरियाल ने आज इस योजना को लांच करते हुए बताया कि 6 अगस्त से शुरू होने वाली यह योजना 28 अगस्त तक चलेगी. उन्होंने बताया कि रेमंड ने यह योजना इसलिए शुरू की कि इससे अपना इस्तेमाल किया गया ट्राउज़र देने वाले को यह अहसास रहेगा कि उसका ट्राउज़र कोई गरीब आदमी इस्तेमाल कर रहा है और कम्पनी को यह अहसास रहेगा कि उसने अपने ग्राहक को मुफ्त सिलाई की सुविधा देकर मुफ्त में ट्राउज़र नहीं लिया है. इस तरह से ग्राहक भी कम्पनी के करीब आयेंगे.


इस लॉन्च पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सुधांशु पोखरियाल ने कहा कि, ‘‘रेमंड एक मशहूर ब्रांड है, जिसने पिछले 9 दशकों से अपने उपभोक्ताओं का विश्वास और सम्मान हासिल कर रखा है. लुक गुड, डू गुड की इस पहल के जरिए हम समाज में योगदान देने के प्रयास के तहत अपने ग्राहकों के साथ साझीदारी करना चाहते हैं. रेमंड किसी भी ब्रांड के किसी भी प्रकार के फुल लेंथ के एडल्ट ट्राउजर को स्वीकर करेगा, जो पहनने लायक स्थिति में होंगे. उपभोक्ताओं को सिले हुए ट्राउजर्स के एक ब्रांड न्यू जोड़े के चयन हेतु फैब्रिक्स के 1000 से अधिक विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे.


इस पहल पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अंशु गुप्ता, संस्थापक - गूंज ने कहा कि, ‘‘गूंज के लिए गरिमा का विशेष महत्व है. पिछले कुछ वर्षों में हम सहायतार्थ सब्जेक्ट-ऑब्जेक्ट को परिवर्तित करने में सक्षम हुए हैं और हमने पुरानी सामग्रियों को एक शक्तिशाली मुद्रा अथवा रिवार्ड में तब्दील कर दिया है. हमारी राष्ट्रव्यापी पहल ‘क्लोथ फॉर वर्क’ के अंतर्गत लोगों ने अपने स्वयं के गांवों के लिए सामुदायिक पहलों को शुरु किया है, इसके लिए उन्होंने कुओं की खुदाई, सड़क का निर्माण करने के बाद सामग्रियों को पूरी गरिमा के साथ स्वीकार किया है.


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