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पंचायती राज विभाग से रिश्ता नहीं टूटने देगा ग्राम्य विकास विभाग

 Sabahat Vijeta |  2016-06-08 13:55:58.0

pratibhaतहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. उत्तर प्रदेश ग्राम्य विकास महापरिषद ने पंचायती राज विभाग के उस फैसले का पुरजोर विरोध करने का फैसला किया है जिसमें वह ग्राम्य विकास विभाग से मुक्त होकर स्वतंत्र रूप से काम करना चाहता है. महापरिषद की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने इस फैसले को ग्राम्य विकास की परिकल्पना के विपरीत बताया है.


प्रतिभा सिंह ने आज महापरिषद के अन्य पदाधिकारियों के साथ संवाददाताओं से बताया कि 10 जून को हर जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन करेगा और 17 जून को अपने फैसले को लागू कराने के लिए सरकार पर दबाव बनाने के लिए लखनऊ में प्रदर्शन करेगा. महापरिषद ने तय किया है कि 10 और 17 जून को ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारी और कर्मचारी दो घंटा अतिरिक्त काम करके उस नुकसान की भरपाई करेंगे जो पंचायत राज विभाग के कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन की वजह से होगा.


उन्होंने बताया कि गाँव का विकास पंचायत और ग्राम्य विकास विभाग मिलकर करते हैं. दोनों के अलग अस्तित्व से विकास नहीं हो सकता. उन्होंने बताया कि भारत सरकार से पंचायतों को मिलने वाला धन ही वह असली वजह है जिसकी वजह से पंचायत विभाग ग्राम्य विकास विभाग से अलग होना चाहता है. उन्होंने कहा कि पंचायत विभाग अपने कार्यों में पारदर्शिता नहीं रखना चाहता. उसे लगता है कि ग्राम्य विकास विभाग के साथ रहने से हर काम को पारदर्शी तरीके से करना पड़ता है.


उन्होंने बताया कि पंचायत राज विभाग चाहता है कि ग्राम्य विकास विभाग को विकास खण्ड कार्यालय से अलग कर दिया जाए. उन्होंने कहा कि दोनों विभाग अलग होते हैं तो सिंगल विंडो सिस्टम खत्म हो जाएगा और काम की जगह स्वछंदता बढ़ेगी. महापरिषद के पदाधिकारियों ने बताया कि पंचायती राज विभाग अपने कार्यक्षेत्र से जिला मजिस्ट्रेट को पहले ही अलग करवा चुका है. एक शासनादेश के ज़रिये उसने पंचायत अधिकारियों की एसीआर लिखने से डीएम को रोक दिया है. अब अगर ग्राम्य विकास विभाग भी अलग हो गया तो ग्रामीण विकास पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा.


ग्राम विकास महापरिषद के महामंत्री प्रताप सिंह यादव ने बताया कि 73 वें संविधान संशोधन में सभी अधिकार पंचायतों को दिए गए हैं. पंचायत विभाग से ग्राम्य विकास विभाग अलग होता है तो यह संविधान की भावना के विपरीत होगा. उन्होंने कहा कि यह फैसला सरकार की भी उस मंशा के विपरीत होगा जिसमें सरकार गाँव का विकास करना चाहती है. उन्होंने कहा कि सरकार को इस दिशा में भी ध्यान देना होगा कि अब जिला पंचायतों में होने वाले फैसलों की जानकारी मुख्य विकास अधिकारी को नहीं दी जाती है. पंचायती राज विभाग अब अपने काम में बीडीओ और सीडीओ और डीएम की दखलंदाजी नहीं चाहता है.


महापरिषद पंचायतों से ग्राम्य विकास विभाग का रिश्ता जोड़े रखने की नीयत से हर संभव कोशिश करेगी. कल इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को ज्ञापन दिया जाएगा.

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