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यूपी की अराजकता के लिए सपा सरकार ज़िम्मेदार : मायावती 

 Sabahat Vijeta |  2016-09-08 15:36:42.0

mayawati
लखनऊ. बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने प्रदेश में यहाँ हर तरफ व हर स्तर पर व्याप्त ’अराजकता व जंगलराज’ के लिये राज्य की सपा सरकार को मुख्य रूप से दोषी करार देते हुये कहा कि नसीहत देना आसान है और उससे भी आसान है पुलिस व सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों को डाँटना व फटकारना, परन्तु ऐसा करने से पहले सपा सरकार के मुखिया को कम-से-कम अब आमचुनाव से पहले अपने गिरेबान में ईमानदारी से झाँकना चाहिये और अपने पार्टी में बड़े पैमाने पर भरे पड़े आपराधिक, आसमाजिक व भ्रष्ट आदि तत्वों को पार्टी से निकाल-बाहर करके उन्हें उनकी सही जगह जेलों की सला़ख़ों के पीछे भेजना चाहिये।


उन्होंने कहा कि यूपी में हर तरफ व्याप्त दबंगई, गुण्डई, अवैध वसूली, अराजकता व जंगलराज एवं भ्रष्टाचार के लिये कोई और नहीं बल्कि यहाँ की सत्ताधारी पार्टी व उसकी सपा सरकार पूरी तरह से जि़म्मेदार है और प्रदेश के मुख्यमंत्री इसके लिये पूरी तरह से कसूरवार व जनता के प्रति उत्तरदायी है तथा इस बारे में पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को डांटने-फटकारने का उन्हें कोई नैतिक अधिकार नहीं रह गया है।


ऐसा करने से पहले प्रदेश सरकार व प्रदेश सपा के मुखिया को अपनी पार्टी को जनता को त्राहि-त्राही करने वाली बुराईयों से पाक-साफ करना पड़ेगा, जो उनके बस की बात नहीं लगती है। यही कारण है कि कानून-व्यवस्था की समीक्षा के नाम पर समय-समय पर बुलायी जाने वाली पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक में मुख्यमंत्री का सम्बोधन अख़बारो की सुर्खियों के तौर पर तो छपवा लिया जाता है, परन्तु उससे प्रदेश की आम जनता का थोड़ा भी भला व उनको थोड़ी भी राहत नहीं मिल पाती है और फिर सारा मामला वहीं ढाक के तीन पात जैसा ही बना कर रह जाता है।


दूसरी ओर बी.एस.पी. प्रमुख मायावती ने गुजरात के गिर सोमनाथ जि़ले के ऊना में दलित युवकों के साथ हुये बर्बर काण्ड के सम्बन्ध में दोषी ’गोरक्षको’ को संरक्षण व प्रोत्साहन देने वाले पुलिसकर्मियों को घटना के कई महीने बाद अब ड्यूटी में ’’लापरवाही’’ बरतने के आरोप में गिरफ्तार मात्र करने के लिये वहाँ की भाजपा सरकार की तीव्र आलोचना करते हुये कहा कि इस प्रकार की दर्दनाक घटना के सम्बन्ध के रक्षक से भक्षक बनने वाले दोषी पुलिस वालों को सख़्त क़ानूनी सज़ा देते हुये उन्हें नौकरी से बर्खास्त करने की कार्रवाई की जानी चाहिये। ऐसे बर्बर मामलों में न्याय की माँग यही कहती है कि दोषी पुलिस वालों की केवल गिरफ्तारी काफी नहीं है बल्कि उन्हें नौकरी से भी बर्खास्त किया जाना चाहिये।


मायावती ने कहा कि वास्तविकता तो यह है कि ग़लत व अमानवीय जातिवादी व्यवहार के साथ-साथ दलितों के उत्पीड़न व शोषण एवं अन्य प्रकार की जुल्म-ज्यादती के मामले में कांग्रेस, भाजपा व सपा आदि विरोधी पार्टियों की सरकारों का रवैया हमेशा ही न्याय व क़ानून पर आधारित नहीं होकर एक जैसा ही जातिवादी व दिखावटी एवं कागजी ही होता है। यही कारण है कि दलितों के प्रति सख़्त क़ानून होने के बावजूद उस पर सही ढंग से अमल कभी नहीं होता है और फिर रोहित वेमुला व ऊना जैसी दर्दनाक घटनायें लगातार घटती रहती हैं।


इस सम्बन्ध में दलित स्कालर रोहित वेमुला की आत्महत्या का मामला हो या फिर ऊना का बर्बर दलित काण्ड आदि इन सभी मामलों में राज्य की सरकारों का रवैया क़ानूनी तौर से सही व सख़्त नहीं होकर, दोषियों को हर सम्भव बचाने का ही रहा है और यही कारण है कि पीडि़त लोगों को आज तक न्याय नहीं मिल पाया है। इन सभी दुःखद मामलों में सरकारी स्तर पर केवल खानपूर्ति करने का ही काम अब तक किया गया है, जिस कारण मुख्य दोषी लोग बेख़ौफ होकर आज भी घूम रहे हैं, यह अति निन्दनीय है।

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