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यूपी चुनाव: 'करारी हार' की मार झेल रहे अजित सिंह का नया समीकरण

 Abhishek Tripathi |  2016-10-04 06:45:36.0

ajit_singhतहलका न्यूज ब्यूरो
बागपत. आम चुनाव 2014 में मोदी लहर में करारी शिकस्त खा चुके राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के अध्यक्ष अजित सिंह संजीवनी तलाश रहे हैं। इसके लिए अजित सिंह शक्ति प्रदर्शन करेंगे। अपने ही गढ़ बड़ौत में विरोधियों को अपनी ताकत का एहसास कराना अजित को अच्छा तो नहीं लग रहा होगा, लेकिन भविष्य की सियासत के लिए ऐसा करना अब उकनी मजबूरी है। मंगलवार को बिहार के सीएम नीतीश कुमार जदयू नेता शरद कुमार के साथ एक ही मंच पर अजित सिंह यूपी विधानसभा चुनाव के लिए एक नया समीकरण तैयार करेंगे।


2012 से अजित सिंह के शुरू हुए बुरे दिन
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में बड़ौत और बागपत सीट का हारना अजित सिंह के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुआ। यहीं से उनके बुरेू दिन भी शुरू हुए। इसके बाद वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर दंगा हुआ और पश्चिमी यूपी में रालेाद का मुस्लिम समीकरण पूरी तरह से टूट गया। ऐसे में अपनी डूबती साख को बचाने के लिए अजित सिंह ने आम चुनाव 2014 से ठीक पहले 'जाट आरक्षण' का मुद्दा उठाया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। वर्ष 2014 के आम चुनाव में अजित सिंह मोदी लहर में डूब गए। चुनावी नतीजे इतने खिलाफ थे कि अजित को अब यूपी चुनाव के लिए अपने ही गढ़ बड़ौत में संजीवनी तलाश रहे हैं।


कितना सफल होगा अकेले दम पर यूपी चुनाव लड़ना
यूपी विधानसभा चुनाव अब नजदीक है। सभी राजनीतिक पार्टियां तैयारी में जुट गई हैं। ऐसे में रालोद भी सियासी समीकरण तैयार करने में लगा है। हालांकि, अजित सिंह ने पहले ही घोषणा कर दी है कि रालोद अकेले अपने दम पर यूपी चुनाव लड़ेगा। वहीं, जदयू के शरद कुमार और नीतीश कुमार को एक ही मंच पर लाने से राजनीतिक गलियारे में कुछ और ही कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा है कि एक बड़े महागठबंधन या फिर सिर्फ गठबंधन की तैयारी चल रही है। अब देखना यह है कि वक्त के साथ सियासत कैसा रूप लेती है।

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