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RLV-TD लॉन्चिंग: इसरो ने रचा इतिहास

 Vikas Tiwari |  2016-05-23 03:03:41.0

space31तहलका न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली. भारत ने  सोमवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से पहली बार स्वदेशी, पुन: इस्तेमाल किए जा सकने वाला प्रक्षेपण यान (आरएलवी) प्रक्षेपित किया। स्वदेशी स्पेस शटल का सफल परीक्षण कर भारत ने अंतरिक्ष में एक और कामयाबी हासिल कर ली। इस स्पेस शटल को एक रॉकेट के जरिए आवाज़ से पांच गुना ज्यादा गति के साथ अंतरिक्ष में भेजा गया और स्पेस शटल वापस लौट कर बंगाल की खाड़ी में एक वर्चुअल रनवे पर समुद्र में लैंड करेगा। अभी तक अमेरिका ही ऐसी तकनीक का सफलतापूर्वक इस्तेमाल करता रहा है। अमेरिकी स्पेस शटल जैसा दिखने वाला ये शटल फिलहाल प्रयोग की स्थिति में है और अपने असली साइज से 6 गुना छोटा है|


लॉन्चिंग सुबह करीब 6:30 बजे हुई
इसरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'RLV-TD' के लॉन्चिंग सुबह करीब 6:30 बजे हुई| अमेरिकी स्पेस शटल की तरह दिखने वाले डबल डेल्टा पंखों वाले यान को एक स्केल मॉडल के रूप में प्रयोग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है|

खासियत
ये एक रियूजेबल लॉन्च व्हीकल है| ऐसा पहली बार हो रहा है, जब इसरो एक स्पेस क्राफ्ट लॉन्च कर रहा है, जिसमें डेल्टा विंग्स होंगे| लॉन्च के बाद ये स्पेस क्राफ्ट बंगाल की खाड़ी में वापस उतर आएगा|  इस स्पेस क्राफ्ट के बनने में 5 साल का समय लगा और 95 करोड़ रुपये का खर्च आया है|  ये फ्लाइट इस स्पेस क्राफ्ट की हायपर सोनिक एक्सपेरिमेंट स्पीड पर री-एंट्री को झेल पाने की क्षमता का आकलन करेगी|

स्पेस में लॉन्च करने में होने वाले खर्च को 10 गुना कम होगा
इसरो के साइंटिस्टों का मानना है कि वे इस स्पेस क्राफ्ट के लॉन्च और सफल होने के बाद सैटेलाइट्स आदि को स्पेस में लॉन्च करने में होने वाले खर्च को 10 गुना कम कर लिया जाएगा| इसके बाद प्रति किलोग्राम भार पर 2000 अमेरिकी डॉलर का खर्च होगा|

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