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मोदी की नीति और नियत दोनों में खोट है : मायावती

  |  2015-10-31 13:35:02.0

a1तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
लखनऊ, 31 अक्‍टूबर. अखिलेश सरकार के नए मंत्रिमंडल विस्‍तार के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने माल एवेन्‍यू स्थित पार्टी कार्यालय में संवाददाताओं से कहा कि दलितों, आदिवासियों और अति पिछड़ों के आरक्षण के मुद्दे पर केन्द्र सरकार साज़िश रच रही है. उन्होंने कहा कि केन्द्र और उत्तर प्रदेश में ज्यादातर कांग्रेस की सरकारें रही हैं लेकिन आरक्षण का कोटा कभी भी पूरा नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी न होने की वजह से आरक्षण की व्यवस्था निष्प्रभावी हो गई. मायावती ने केन्द्र पर आरोप लगाया कि उन्हें आरक्षण का मुद्दा उठाने की वजह से एन.आर.एच.एम. मामले में सीबीआई में फंसा सकती है.


मायावती ने कहा बसपा ने संसद के भीतर और बाहर आरक्षण को लेकर कड़ा संघर्ष किया. राज्यसभा में इस मुद्दे पर कामयाबी भी हासिल की लेकिन लोकसभा में कांग्रेस और बीजेपी की साज़िश की वजह से हम कामयाब नहीं हो पाए. उन्होंने कहा कि जब केन्द्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी थी तब भी आरक्षण को ख़त्म करने की साज़िश रची गई थी. लेकिन अन्य पार्टियों ने वोटों के लालच में अपना मुंह खोला तो अटल सरकार ने अपना फैसला बदल लिया.


मायावती ने आरोप लगाया कि संकीर्ण मानसिकता के लोग संविधान की इच्छा के विरुद्ध भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहते हैं. इसी संकीर्ण मानसिकता से दुखी होकर बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने भी हिन्दू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया था.उन्होंने कहा कि शंकराचार्य अगर समय रहते हिन्दू धर्म को ठीक कर लें तो दूसरे धर्मों में गए लोग वापस हिन्दू धर्म में अ सकते हैं.


मायावती ने कहा कि बिहार चुनाव में दलित वोटों के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि आरक्षण को बचाने के लिए अपनी जान की बाज़ी लगा देंगे. हमें उनसे बस यही कहना है कि उन्हें जान की बाज़ी लगाने की ज़रुरत नहीं है. बेहतर होगा कि वह आर.एस.एस. प्रमुख भागवत की आरक्षण ख़त्म करने संबंधी मांग का स्पष्ट रूप से खंडन कर दें. उन्होंने कहा कि अपनी दलित विरोधी मानसिकता के कारण ही केन्द्र सरकार सभी मत्वपूर्ण काम प्राइवेट सेक्टर के हवाले कर रही है.




मायावती ने कहा कि नरेन्द्र मोदी गुजरात के सम्पन्न तेली परिवार से हैं लेकिन अपनी बिरादरी को लाभ पहुंचाने के लिए अपनी जाती को ओबीसी में दर्ज करवा दिया है. उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में दलितों का लगातार शोषण किया जा रहा है. दलित वर्ग के सरकारी कर्मचारियों को प्रमोशन में मिलने वाली आरक्षण की सुविधा को खत्म किया जा रहा है. मायावती ने कहा कि मोदी की नीति और नियत दोनों में खोट है.



मायावती ने कहा कि भाजपा ने डॉ. अम्बेबेडकर के निर्वाण (6 दिसंबर) को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ढहाने के लिए चुना. एक तरफ पिछड़े और दलितों से प्रेम का नाटक और दूसरी तरफ इस तरह की साज़िश.  मायावती ने कहा कि जनरल वी.के. सिंह ने जिस तरह का बयान दिया था उसके बाद उन्हें न सिर्फ बर्खास्त किया जाना चाहिए था बल्कि जेल में भी डाल देना चाहिए था. उन्होंने कहा कि केन्द्र की गलत नीतियों के कारण किसानों और नौजवानों की हालत खराब है. पड़ोसी देशों से अच्छे सम्बन्ध नहीं हैं.


मायावती ने तमाम मुद्दों पर उत्तर प्रदेश सरकार को भी आड़े हाथों लिया. उन्होंने शपथ ग्रहण समारोह में राजभवन में राष्ट्रगान रोके जाने के मुद्दे को भी उठाया. दादरी और मुज़फ्फरनगर का नाम लेकर उन्होंने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि यूपी में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है. मूर्ती विसर्जन के दौरान यूपी में जो हालात बिगड़े उन्हें यह सरकार काबू में नहीं कर पाई.


यूपी सरकार में आज हुए फेरबदल पर मायावती ने कहा कि अखिलेश कितनी भी ड्रामेबाजी कर लें लेकिन जनता सब जानती है. उन्होंने कहा कि ऐसे समय में मंत्रियों को बर्खास्त किया गया है कि अब उसका लाभ नहीं मिल सकता. उन्होंने कहा कि चुनाव करीब आ रहे हैं तो सरकार को दलित और मुसलमान नज़र आने लगे हैं. उन्होंने कहा कि यूपी में बसपा की सरकार बनी तो सर्वजन हिताय की नीति चलेगी.


मायावती ने कहा कि केन्द्र सरकार की सच्चाई बताने और आरक्षण का मुद्दा उठाने के कारण सरकार उन्हें एन.आर.एच.एम. घोटाले में सीबीआई में फंसा सकती है.


मायावती के बयान पर बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा कि हताश-निराश बसपा प्रमुख अनर्गल बयानबाजी कर रही हैं. पार्टी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि मायावती की प्रेसवार्ता दरअसल स्मारक, पार्कों पर जनता की गाढ़ी कमाई का दुरूपयोग किये जाने का माफीनामा है.

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