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मौत ने चुपके से जाने क्या कहा...

 shabahat |  2017-01-06 13:18:37.0


शबाहत हुसैन विजेता

लखनऊ. अभिनय और हकीकत में फर्क खत्म कर देने का फन रखने वाले ओमपुरी ने ज़िन्दगी को अलविदा भी इस अंदाज़ में कहा कि सुनने वालों को को सहसा यकीन ही नहीं हुआ. उन्होंने जिस तरह से अपने न रहने की खबर से अपने आम चाहने वालों को सकते में ला दिया ठीक वैसा ही सकता उन्होंने सुपर स्टार अमिताभ बच्चन को भी दिया. कल शाम ही सरकार-3 के सेट पर पहुंचकर अमिताभ बच्चन से मुलाक़ात करने वाले ओमपुरी आख़री बार ठहाके लगाने आये हैं यह बात न अमिताभ बच्चन ने सोची होगी और न ही सेट पर मौजूद बाकी लोगों ने. ओमपुरी की अचानक हुई मौत की खबर से ज़ेहन में अचानक यह शेर घुमड़ने लगा :- मौत ने चुपके से जाने क्या कहा, ज़िन्दगी खामोश होकर रह गई.




यह अलग बात है कि ओमपुरी की मौत ने हर किसी को चौंका दिया है लेकिन ओमपुरी खुद इस हकीकत को बहुत अच्छी तरह से जानते थे कि एक दिन अपनी मौत से वह लोगों को इस तरह से चौकायेंगे कि सुनने वालों को सहसा यकीन भी नहीं होगा. मार्च 2015 में बीबीसी से एक इंटरव्यू में ओमपुरी ने कहा था कि उन्हें मौत से डर नहीं लगता है. उन्होंने कहा था कि डर मौत का नहीं उस बीमारी से होता है जिससे लोग लाचार हो जाते हैं. बीमारी की वजह से दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं. बीमारी की लाचारी और दूसरों पर निर्भरता से डर लगता है. इस इंटरव्यू में ओमपुरी ने हँसते हुए कहा था कि मेरी मौत का तो आपको पता भी नहीं चलेगा. सोए-सोए अचानक चला जाऊँगा. आपको पता चलेगा कि ओमपुरी का कल सुबह 7 बजकर 22 मिनट पर निधन हो गया.

यह कहा जाता है कि ज़बान पर 24 घन्टे में एक बार सरस्वती आती हैं. ठीक उस समय ज़बान से जो निकलता है वह सच हो जाता है. ओमपुरी के साथ भी ठीक यही हुआ. आज सुबह 7 बजे ओमपुरी ने हमेशा के लिये आँखें बंद कर लीं. उन्हें हार्ट अटैक हुआ था. अस्पताल ले जाया गया लेकिन तब तक वह हमेशा के लिये खामोश हो चुके थे.

ओमपुरी जब एनएसडी में एडमिशन लेने गये थे तब किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि फिल्मों की रुपहली दुनिया में चाकलेटी चेहरों के बावजूद भी धक्के खाने वालों के लिये यह रफ-टफ चेहरे वाला ओमपुरी कभी एक्टिंग के टीचर के रूप में पहचाना जायेगा.

वह 66 साल के थे. 1950 में अम्बाला में पैदा हुए थे. पैदाइश की तारीख तो उनकी माँ को भी याद नहीं थी लेकिन बचपन में उन्हें बताया गया था कि दशहरे से दो दिन पहले पैदा हुए थे. 1976 में 20 अक्टूबर को दशहरा पड़ा तो ओमपुरी ने एलान किया कि 18 अक्टूबर को मेरी जन्मतिथि के रूप में जाना जाये. यह अजब इत्तफाक है कि अपनी पैदाइश की तारीख तय करने वाले ओमपुरी ने अपनी मौत का समय और तरीका भी तय कर दिया था. ओमपुरी ने बालीवुड से लेकर हालीवुड तक अपने अभिनय का लोहा मनवाया.

ओमपुरी ने दो शादियाँ कीं लेकिन अपने अंतिम समय वह बिलकुल अकेले थे. पहली शादी उन्होंने अन्नू कपूर की बहन से की थी लेकिन यह शादी सिर्फ 8 महीने ही चल पाई. उन्होंने दूसरी शादी महिला पत्रकार नन्दिता पुरी से 1993 में की. नन्दिता के साथ उनके अच्छे रिश्ते भी चले लेकिन नन्दिता थीं तो पत्रकार ही. उन्होंने ओमपुरी पर एक किताब लिख डाली और इस किताब में ओमपुरी की ज़िन्दगी की वह बातें भी आम कर दीं जो नहीं लिखनी चाहिये थीं. यहीं से दोनों के रिश्तों में खटास आयी और 2013 में यह शादी टूट भी गई. नन्दिता और ओमपुरी से एक बेटा है.

शादी दूसरी बार टूटने से ओमपुरी काफी अकेले हो गये थे. अकेलेपन में उन्होंने शराब से गहरी दोस्ती कर ली थी. हकीकत से बहुत करीब का अभिनय करने वाले ओमपुरी अपनी फिल्मों को जीते थे. यही वजह है कि जिस फिल्म को भी वह छू देते थे वह लोगों के दिलों में उतर जाती थी. उनके शानदार अभिनय के एवज़ में उन्हें पद्मश्री भी मिला.

अपनी ज़ोरदार आवाज़ की वजह से ओमपुरी ने अभिनय के जिस रास्ते को चुना था उसी पर टिककर रहना उन्हें गंवारा नहीं था इसीलिये उन्होंने हास्य की दुनिया में भी चहल क़दमी की और टेलिविज़न पर कक्का जी कहिन जैसा शानदार सीरीयल भी उन्होंने किया. ओमपुरी फ़िल्मी दुनिया के उन चंद कलाकारों में से थे जिन्होंने व्यवसायिक सिनेमा और समानान्तर सिनेमा (कला फिल्मों) दोनों जगह ही अपना सिक्का चलाया.

झगड़े हर परिवार में होते हैं लेकिन ओमपुरी इस बात से दुखी थे कि उन्होंने दो शादियाँ कीं और दोनों ही उम्र भर नहीं चल पाईं. वह दुखी थे क्योंकि सड़क पर वह मेले में थे लेकिन घर में अकेले थे. शायद यही अकेलापन था जो 2015 में उनसे यह भविष्यवाणी करवा गया था कि किसी दिन आपको पता चलेगा कि कल सुबह 7 बजकर 22 मिनट पर ओमपुरी का निधन हो गया.

सरकार-3 में ओमपुरी का कोई रोल नहीं था लेकिन चलते-चलते वह सदी के महानायक से विदा लेने गये थे. इस अलविदाई महफ़िल में ओमपुरी और अमिताभ बच्चन ने साथ-साथ ठहाके लगाये थे. इन ठहाकों की गूँज अभी थमी भी न थी कि अमिताभ तक यह खबर पहुँची. अमिताभ ने कहा, यकीन नहीं हो रहा है. अभी कल ही की तो बात है जब वह सरकार-3 के सेट पर मुझसे मिलने आये थे. आत्मा की शान्ति के लिये मेरी प्रार्थना. शोक भरी घड़ियाँ हैं मेरे लिये.

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