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आजकल हिन्दी पढ़ना- लिखना गंवारों का कार्य माना जाता है : महन्त देव्या गिरि

 Girish Tiwari |  2016-09-27 13:10:18.0



महन्त देव्या गिरि

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. मनकामेश्वर मंदिर की महन्त देव्या गिरि ने कहा कि समाज में अंग्रेजी पढ़े लिखे होने के बावजूद राष्ट्र धर्म की भारी कमी है, संवेदनशीलता का निरन्तर अभाव होता जा रहा है। राष्ट्रधर्म के प्रसार के लिए वे गोमती नगर स्थित राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान में आयोजित ‘‘समाज-संस्कार और भाषा संगोष्ठी कार्यक्रम में  बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं।

उनहोंने ने कहा साधु सन्यासी और शिक्षक को मिलकर काम करना चाहिए। बिना राष्ट्र धर्म के राष्ट्रभाषा सुरक्षित नहीं रह सकेगी। सिनेमा ने हिन्दी के प्रचार प्रसार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं।


महन्त ने बताया कि मेरी माता पढ़ी लिखी नहीं थी किन्तु उनकी बेटी आज सन्यासी है तो कैसे मानलें कि वे अनपढ़ थीं। जो संस्कार डालती है वह माँ हैं, पहली सीख वही देती है। आजकल हिन्दी पढ़ना लिखना गंवारों का कार्य माना जा रहा है और अब बच्चे तीन साल में ही बड़े माने जाने लगे हैं।

हालात यह है कि कोई घर आता है तो पहले आने का कारण पूछा जाता है  यह संस्कार का क्षय है, संवेदनहीनता की स्थिति है। इससे बाहर निकलना होगा। हिन्दी इस दिशा में काफी कुछ कर सकती है। भाषा से ही संस्कार बनते हैं।

विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद डॉ0 सदाबिहारी साहू, ग्रामीण उद्योग बैंक के प्रबन्धक ने अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा वाग्देवी के माल्यार्पण, डॉ0 नीरज तिवारी के वैदिक मंगलाचरण, श्री जगन्नाथ झा के लौकिक मंगलाचरण व  शैलेश तिवारी द्वारा प्रस्तुत सरस्वती मंगलाचरण के साथ हुआ। आयोजकों ने स्वागत गान छात्रों राजेश, भास्कर, अंकित, अमृता व भव्या ने प्रस्तुत किये।

कार्यक्रम के संयोजक प्रो0 शिशिर कुमार पाण्डेय ने अतिथियों का अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह के द्वारा स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ0 कविता विसारिया ने धन्यवाद ज्ञापन विनय कुमार द्विवेदी ने किया।

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