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समाजवादी संग्राम में दो दिन चला ड्रामा, अब दिल्ली में बनेगी समझौते की रुपरेखा

 Tahlka News |  2016-09-14 07:56:00.0

समाजवादी संग्राम में रात भर चला ड्रामा, अब दिल्ली में बनेगी समझौते की रुपरेखा
उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. तीन दिन से चल रहे समाजवादी संग्राम की जमीन भले ही यूपी हो मगर इसके लिए अब दिल्ली में बड़ी पंचायत होगी. शिवपाल सिंह यादव चार्टर्ड प्लेन से सफाई से दिल्ली पहुँच रहे हैं , रामगोपाल वहां मौजूद हैं और अमर सिंह भी वही सक्रिय है. मगर इन सबके बीच मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लखनऊ के अपने सरकारी आवास 5 काली दास मार्ग पर अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं.

कयास लगाया जा रहा है कि अब जो समझौता हो सकता है उसमे अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष का पद फिर मिलेगा और शिवपाल को उनके बिभाग. मगर बाहरी हस्तक्षेप को रोकने का भी वादा अखिलेश जरूर लेंगे.

अखिलेश यादव ने जब बुधवार को अपनी चुप्पी तोड़ी तो कहा कि परिवार के भीतर सब नेता जी की बात मानते हैं, मैंने कई फैसले उनके कहने से लिये मगर कुछ निर्णय मैंने अपने खुद से लिए हैं. अखिलेश की बात से यह साफ़ मतलब निकालता है कि पार्टी और संगठन के फैसले तो मुलायम सिंह लेते हैं मगर ये ताजा फैसले खुद मुख्यमंत्री ने लिए हैं.

हलाकि अखिलेश यादव ने अमर सिंह पर तीखा तंज कर दिया और इशारो में इस पूरे मामले का ठीकरा भी अमर सिंह के सर पर फोड़ा. अखिलेश ने कहा- “नेता जी की बात कौन नहीं मानेगा मगर जब बाहरवाले परिवार के भीतर के फैसले लेने लगेंगे तो मुश्किल होती है”.

बुधवार की सुबह सैफई में जब शिवपाल यादव मीडिया से मुखातिब थे तब उन्होंने भी कहा था कि नेता जी के फैसले सबको मानने होते हैं , मगर इस बात में शिवपाल ने “सबको” शब्द पर बहुत जोर दिया था.

समाजवादी परिवार की रार इस कदर बढ़ चुकी है कि अखिलेश यादव अब अपने कदम पीछे हटाने को कतई तैयार नहीं है और इसके लिए वे कोई भी कीमत चुकाने को तैयार है. अखिलेश को जानने वाले इस बात को बखूबी जानते हैं कि अखिलेश अपने फैसलों को आसानी से नहीं बदलते और इसके विपरीत उनके पिता और समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह कभी भी अपने फैसलों से पलट जाते हैं . पिता और पुत्र के राजनैतिक शैली का यही फर्क मामले को और भी पेचीदा बना रहा है.

मंगलवार की सुबह मुख्य सचिव दीपक सिंघल को हटाने का मामला इतना बढ़ा कि अमर सिंह सीधे मुलायम शाम होते होते अखिलेश को सपा के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया तो उसके 2 घंटे बाद ही अखिलेश ने अपनी तलवार एक बार फिर चला दी. इस बार उसका निशाना सीधे शिवपाल यादव बने.

अखिलेश का यह वार इतना सीधा था उसने परिवार के सत्ता संतुलन के झीने परदे को काट दिया. इसके बाद मुलायम और शिवपाल बहुत असहज हो गए. मुलायम दिल्ली में ही मौजूद प्रो रामगोपाल से मिलने उनके घर चले गए और उनसे अखिलेश को समझाने को कहा. दूसरी कई अहम मंत्रालय से हटाए जाने से ख़फ़ा कैबनिट मंत्री शिवपाल सिंह यादव को मनाने के लिए उनके बेटे पीसीएफ चैयरमैन आदित्य यादव , शिवपाल सिंह की पत्नी सरला यादव को मुलायम सिंह ने रात में ही लखनऊ से सैफई के लिए रवाना कर दिया. इस बीच शिवपाल सिंह यादव अपने बहनोई और ब्लॉक प्रमुख डॉ अजंट सिंह यादव से सैफई के अपने आवास पर मंत्रणा कर रहे थे.

इस बीच अटकलों का बाजार गर्म हो गया. कहा जा रहा था कि शिवपाल मंत्रिपरिषद से इतीफा दे देंगे, अफवाहे इस कदर भी चली कि मुलायम सिंह यादव के खुद मुख्यमंत्री बनने की बात भी हवाओं में उड़ने लगी. बुधवार की सुबह शिवपाल जब अपने घर से निकले तब उन्होंने नेता जी के फैसले को मानने की बात कही . मगर इसके बाद यह भी कह्गा कि वे नेता जी से मिलने जायेंगे. थोड़ी देर बाद ही लखनऊ से एक चार्टर्ड प्लेन मंगाया गया और शिवपाल दिल्ली के लिए रवाना हो गए.

इसके बाद लखनऊ में सीएम ने अपने सारे कार्यक्रम निरस्त कर दिए और जनता दर्शन के समय भी पहले तो मीडिया को अन्दर आने की इजाजत नहीं दी गयी और फिर जब किसी तरह कुछ मीडिया कर्मी अन्दर प्रवेश पाने में कामयाब हुए तब अखिलेश ने इशारो इशारो में अमर सिंह को निशाने पर ले लिया गया. अखिलेश मुख्य सचिव पद पर दीपक सिंघल की वापसी के लिए अमर सिंह के दबाव को मानने के लिए तैयार नहीं थे.

इस बीच राजभवन भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाये हुए है और राज्यपाल ने पाने सभी कार्यक्रम रद कर दिए हैं.

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