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पार्टी , कुनबा और सरकार : अमर सिंह की छाया ने बिगाडी समाजवादी सियासत की शतरंज

 Vikas Tiwari |  2016-09-13 17:15:24.0

समाजवादी पार्टीउत्कर्ष सिन्हा
लखनऊ. समाजवादी पार्टी के बीच शुरू हुआ घमासान अब खुल कर सामने आ गया है. मंगलवार की सुबह मुख्य सचिव के पद से दीपक सिंघल को हटाये जाने के बाद जो छुपा प्रहार अखिलेश यादव ने शिवपाल सिंह यादव पर किया था , रात होते होते शिवपाल से सारे महत्वपूर्ण विभाग छीन कर सीधे हमले में बदल दिया.
सोमवार को गायत्री प्रसाद प्रजापति और राजकिशोर सिंह को मंत्रिमंडल से हटा कर मुख्यमंत्री ने जो लडाई छेड़ी थी 48 घंटे बीतते बीतते समाजवादी पार्टी की अंदरूनी राजनीति में तूफ़ान खड़ा कर दिया.
अखिलेश यादव ने जब अपना सफाई अभियान शुरू किया तो उसमें कई सन्देश छिपे थे. अखिलेश के पहले शिकार बने गायत्री प्रजापति को मुलायम का वरदहस्त था, इसके बाद दीपक सिंघल को हटा कर अखिलेश ने शिवपाल और अमर सिंह को झटका दे दिया. इसके फ़ौरन बाद सियासत के जादूगर कहे जाने वाले अमर सिंह मुलायम सिंह के घर पहुंचे और एक लम्बी मंत्रणा के बाद मुलायम सिंह ने अखिलेश यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा कर शिवपाल को नया प्रभार दे दिया.

इसके 2 घंटे बताते बीतते ही अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए शिवपाल यादव को कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री पद से हटा दिया . इसके बाद शिवपाल के मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा देने के अलावा कोई और सम्मानजनक रास्ता नहीं बचता.
पार्टी और कुनबे में ऐसे मतभेद पहले भी होते रहे हैं मगर इस बार कलह उस मोड़ पर आ गया है जहाँ से पीछे हटाने के लिए कोई तैयार नहीं है. सियासत के जादूगर अमर सिंह की समाजवादी पार्टी में एक लम्बे जद्दोजहद के बाद हो तो गयी थी मगर उनके मनचाहे कामो को होने की वह स्थिति नहीं बन रही थी जो वह चाहते थे. अमर सिंह की बेचैनी इतनी बढ़ी थी की वे अपनी नाराजगी नहीं छुपा पार रहे थे और सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने और राज्यसभा से इस्तीफ़ा देने की बात तक कह दी थी .
अमर सिंह और शिवपाल यादव की नजदीकियां छुपी हुयी बात नहीं. अमर सिंह की वापसी में भी शिवपाल की बड़ी भूमिका थी . दीपक सिंघल जैसे अफसर भी दोनों की पसंद थे , लेकिन अपनी छवि को ले कर सतर्क अखिलेश ने अमर सिंह को एक हद से ज्यादा प्रभावी नहीं होने दिया.
अमर सिंह की विशेषता ही अपनो में मतभेद खड़ा करने की रही है. अमिताभ बच्चन से ले कर अम्बानी परिवार तक इसका उदहारण है. अमर सिंह ने अपना बर्चस्व बढ़ने के लिए से ले कर परदे के पीछे शिवपाल के असंतोष को हवा देने में जुटे रहे और इसका नतीजा जब आया तो कुनबे से ले कर पार्टी और सरकार खतरे में आ गयी.

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