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गीता प्रेस: निकाले गए 17 कर्मचारियों ने किया आत्मदाह का प्रयास

 Anurag Tiwari |  2016-06-27 09:06:55.0

गीता प्रेस, गोरखपुर, विवाद तहलका न्यूज़ ब्यूरो

गोरखपुर.  एक साल पहले शुरू हुए गीता प्रेस मैनेजमेंट और कर्मचारियों के विवाद ने एक बार फिर सिर उठा लिया है। सोमवार को निकाले गए 17 कॉन्ट्रैक्च्युअल कर्मचारियों ने अचानक गीता प्रेस के गेट पर पहुचकर आत्मदाह का प्रयास किया। इससे पहले कि कोई अनहोनी होती, मौके पर मौजूद पुलिस ने सभी कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया।

क्यों पैदा हुआ विवाद

पिछले साल गीता प्रेस में वेतन वृद्धि को लेकर मैनेजमेंट और कर्मचारियों में विवाद शुरू हुआ था। गीता प्रेस में कुल 525 कर्मचारी काम करते थे, जिनमें 200 परमानेंट हैं जबकि 325 कॉन्ट्रैक्चुअल थे।  इन कर्मचारियों के मैनेजमेंट इन सभी कर्मचारियों को पिछली जुलाई से इन्क्रीमेंट देने वाला था। इसके लिए मैनेजमेंट तीन स्लैब तैयार किये थे, अनस्किल्ड, सेमी-स्किल्ड और स्किल्ड। इन कर्मचारियों में अनस्किल्ड को 600 रुपए , सेमी-स्किल्ड को 750 रुपए और  स्किल्ड 900 रुपए  का इन्क्रीमेंट दिया जाना था।  कर्मचारी इसके लिए तैयार भी था लेकिन मैनेजमेंट ने इन्क्रीमेंट के साथ यह भी शर्त रख दी कि पिछले सभी विवाद खत्म माने जाएंगे और साथ ही अगले पांच सालों तक कर्मचारी कोई नई मांग नहीं रखेंगे। इसको लेकर कर्मचारी भड़क गए और उन्होंने हड़ताल कर दी। इसके बाद बीते साल 7 अगस्त को मैनेजमेंट की तरफ से असिस्टेंट मैनेजर मेघ सिंह चौहान प्रिंटिंग प्रेस पर कर्मचारियों को समझाने पहुंचे, लेकिन कर्मचारियों ने उन्हें धक्के देकर गेट से बाहर कर दिया।


गीता प्रेस, गोरखपुर, विवाद

 मेघ सिंह की शिकायत पर निकाले गए 17 कर्मचारी

मेघ सिंह को धक्के देकर बाहर निकाले जाने के बाद उन्होंने गीता प्रेस के ट्रस्ट बोर्ड से इस बात की शिकायत की। ट्रस्ट बोर्ड ने कर्मचारियों की इस हरकत को अनुशासनहीनता मानते हुए 12 परमानेंट और पांच कॉन्ट्रैक्चुअल कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। हालांकि नए डेवलपमेंट में ट्रस्ट ने अब 12 परमानेंट कर्मचारियों को नौकरी पर वापस लेने का फैसला लिया है, लेकिन कर्मचारी सभी 17 कर्मचारियों को नौकरी पर वापस लेने की मांग करते रहे।

झूठा आरोप लगाकर किया निलंबित!

निलंबित किए गए कर्मचारियों में वीरेंद्र कुमार, राज किशोर यादव, मुनिवर मिश्रा, रमन कुमार श्रीवास्तव, रविंद्र सिंह, राम सिंहासन यादव, वीरेंद्र यादव, चंद्र प्रकाश मणि, जितेंद्र यादव, अनिल श्रीवास्तव, जगदीश मिश्रा और मुकेश कुमार शामिल हैं। इन्होंने बताया कि उन लोगों ने गीता प्रेस में प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों के वेतन को लेकर चोरी की शिकायत सीएम अखिलेश यादव से की थी। इसके बाद वहां से जांच का आदेश दिया गया। जैसे ही प्रबंधन को इस बारे में पता चला तो उन्होंने झूठा आरोप लगाकर उन्हें निलंबित कर दिया।

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होती है करोड़ों रुपए की हेराफेरी

निलंबित कर्मचारी रमन श्रीवास्तव ने बताया कि यूपी सरकार ने कर्मचारियों के वेतन के मामले में तीन कैटेगरी डिसाइड करते हुए 31 जनवरी 1992, फरवरी 2006 और 2014 में मिनिमम वेज लागू करने का निर्देश दिया गया। गीता प्रेस ने इस निर्देश का पालन नहीं किया। इतना ही नहीं, वे पहले निर्देश के क्रम में हाईकोर्ट चले गए। बाद में हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के ही हित को देखते हुए फैसला सुनाया। कर्मचारियों का आरोप है कि प्रबंधन द्वारा हर साल कर्मचारियों के वेतन में करोड़ों की हेराफेरी की जाती है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें सैलरी के रूप में कागज में 13 हजार से ऊपर दिखाया जाता है। इसी अमाउंट पर उनसे साइन भी कराया जाता है, लेकिन उन्हें सिर्फ 3000-4000 रुपए ही दिए जाते हैं। कर्मचारियों को नियमित किए जाने के नाम पर उनकी सैलरी से कई सालों से कटौती की गई, लेकिन ये धनराशि उन्हें नहीं मिली।

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