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शिवपाल और मुलायम को रामवृक्ष मानता था दुश्मन न.1, किया था मुक़दमा

 Tahlka News |  2016-06-19 10:59:30.0

shivpal ram vriksh

उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. मथुरा के जवाहर बाग़ में अपना साम्राज्य चला रहे रामवृक्ष यादव द्वारा अदालत में दिए एक प्रार्थना पत्र के सामने आने से भाजपा के शीर्ष नेताओं की किरकिरी हो सकती है. जिस रामवृक्ष को समर्थन देने का इल्जाम भाजपा नेताओं ने समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और सपा सरकार के कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव पर लगाया था, उसी रामवृक्ष ने शिवपाल और मुलायम के खिलाफ मुक़दमा दर्ज करने को ले कर न्यायालय तक का दरवाजा खटखटाया था.

मथुरा की घटना के बाद भाजपा के राष्ट्रीय और प्रदेश अध्यक्षो ने मथुरा की घटना के लिए भी शिवपाल यादव को जिम्मेदार बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी.
तहलका न्यूज़ को मिले एक अदालती दस्तावेज ने भाजपा नेताओं के बयान पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है. भाजपा नेताओं द्वारा रामवृक्ष यादव के मददगार कहे जा रहे शिवपाल यादव को तो दर असल रामवृक्ष अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता था. इसी वजह से उसने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के पूरे परिवार के खिलाफ मुक़दमा दर्ज करने के लिए सीजीएम् कोर्ट में आवेदन भी किया था.


26 मार्च 2014 को मथुरा के सीजेएम कोर्ट में रामवृक्ष ने एक आवेदन दिया था जिसमे उसने मुलायम सिंह यादव, शिवपाल यादव और अखिलेश यादव सहित कुल 6 व्यक्तियों को प्रतिवादी बनाया था. इनमे वर्तमान में जय गुरुदेव के अनुयाईयों  के दोनों धडो के प्रमुख उमाशंकर तिवारी और पंकज यादव भी शामिल हैं.
ramvriksh shivpalइस आवेदन में रामवृक्ष ने इन सभी पर आरोप लगाया था कि 2012 में जय गुरुदेव के बीमार पड़ने के समय इन लोगों ने उन्हें मेदंता अस्पताल में भर्ती कराया था और बाद में प्रचारित किया था कि जय गुरुदेव की मौत दिल का दौरा पड़ने से हो गयी.

रामवृक्ष ने यह भी आरोप लगाया था कि जय गुरुदेव के 10 हजार करोड़ के साम्राज्य को हड़पने के लिए इन लोगो ने ऐसा किया. न्यायालय में दिए गए अपने प्रतिवेदन में रामवृक्ष ने इन सभी लोगों पर मुक़दमा दर्ज करने के लिए गुहार की थी.

अपने प्रतिवेदन में रामवृक्ष ने किखा था कि जय गुरुदेव की मृत्यु नहीं हुयी थी बल्कि उन्हें गायब कर दिया गया था और उनसे मिलती जुलती शक्ल वाले दूसरे व्यक्ति का दाह संस्कार कर दिया गया था.

रामवृक्ष का कहना था कि जय गुरुदेव की मृत्यु नहीं हुयी है बल्कि उन्हें बंधक बना लिया गया है.

भाजपा नेताओं के हमले के बाद शिवपाल सिंह यादव ने भाजपा को सीधी चुनौती देते हुए कहा था कि वे अपने निराधार बयान वापस ले. अब इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद शिवपाल सिंह यादव का पक्ष और भी मजबूत हो गया है.

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