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मुलायम के लिए बेटे अखिलेश से ज्यादा खास हैं भाई शिवपाल, ये हैं अहम कारण

 Abhishek Tripathi |  2016-09-16 06:10:53.0

shivpal_yadavतहलका न्यूज ब्यूरो
लखनऊ. यह पहला मौका नहीं है जब समाजवादी पार्टी (सपा) सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने अपने भाई शिवपाल यादव का खुलेआम पक्ष लिया हो। इससे पहले इस साल 15 अगस्त के मौके पर पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मुलायम सिंह यादव ने अपने बेटे और यूपी के सीएम अखिलेश यादव की उपस्थिति में कहा था कि यदि शिवपाल पार्टी का साथ छोड़ देते हैं तो सपा बिखर जाएगी। वहीं, नवंबर 2013 में लोकसभा चुनावों से कुछ महीने पहले मुलायम ने शिवपाल को रामगोपाल यादव पर तरजीह देते हुए चुनावों के लिए पार्टी की कमान उनके हाथ में ही सौंपी थी।


पार्टी की मंगलवार को हुई बैठक में सीएम अखिलेश यादव से सपा के उत्तर प्रदेश इकाई के प्रमुख का पद वापस ले लिया गया और यह फैसला किसी और का नहीं बल्कि पार्टी सुप्रीमो और उनके पिता मुलायम सिंह यादव का ही था। जवाब में सीएम अखिलेश यादव ने अपने चाचा और पार्टी के कद्दावर नेता शिवपाल सिंह यादव से सभी मंत्रालयों का प्रभार वापस ले लिया। इस मामले में पार्टी के पुराने नेताओं का कहना है कि कुछ भी हो जाए लेकिन, सपा को यदि 2017 में होने वाला विधानसभा चुनाव जीतना है तो मुलायम के पास शिवपाल का बचाव करने और उन पर निर्भर रहने के आलावा और कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है।


आखिर शिवपाल यादव सपा और मुलायम के लिए इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं? आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह…


एक बड़ी जमात शिवपाल को ही नेता मानती है


भले ही अखिलेश यादव पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री पद का चेहरा हैं, पार्टी में अमर सिंह की वापसी हो गई है और आजम खान जैसे बड़े नेता मौजूद हैं लेकिन, पार्टी कार्यकर्ताओं की बड़ी जमात मुलायम सिंह यादव के बाद शिवपाल को ही अपना नेता मानती है। पार्टी से जुड़े कुछ लोग बताते हैं कि शिवपाल यादव कार्यकर्ताओं के साथ हमेशा संपर्क में रहते हैं, राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्तर पार्टी के लिए काम करते हैं, कार्यकर्ताओं के बीच पार्टी के किसी दूसरे बड़े नेता की इतनी पकड़ नहीं है जितनी शिवपाल की है, ये कुछ ऐसी बाते हैं जो शिवपाल को औरों से अलग खड़ा करती हैं और मुलायम के लिए उनको महत्वपूर्ण बनाती हैं।


पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच है गहरी पैठ
इस संबंध में समाजवादी पार्टी के एक नेता का कहना है, ‘अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अखिलेश यादव ही पार्टी के पोस्टर बॅाय होंगे। आगामी 3 अक्टूबर से वह एक बार फिर पार्टी के लिए समर्थन जुटाने के मकसद से ‘विकास से विजय की ओर’ यात्रा करने वाले हैं। उन्होंने ट्विटर पर इसकी घोषणा भी कर दी है। यदि समाजवादी पार्टी चुनाव जीतने सफल रहती है तो वही एक बार फिर मुख्यमंत्री भी होंगे। लेकिन, मुलायम सिंह यादव यह बात अच्छे तरीके से जानते हैं कि चुनाव जीतने के लिए एक मजबूत संगठन और निष्ठावान संगठनकर्ता की जरूरत होती है। संगठन के काम के लिए शिवपाल यादव पार्टी के सबसे उपयुक्त चेहरे हैं। उन्होंने नेताजी के साथ दशकों तक पार्टी संगठन में काम किया है और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी बहुत ही गहरी पैठ है।


संकट मोचन की भूमिका निभाते हैं शिवपाल
इटावा के जसवंतनगर विधानसभा सीट से चौथी बार चुनाव जीतने वाले शिवपाल यादव की पार्टी में अन्य पक्षों से बातचीत करने और किसी भी तरह के विवाद में संकट मोचन की भूमिका निभाने वाले नेता की छवि है। विधानसभा चुनावा के मद्देनजर कौमी एकता दल के साथ हुए हालिया समझौते में शिवपाल ही पार्टी की तरफ से पहल करने वाले नेता थे। समाजवदी पार्टी में अमर सिंह की वापसी में भी शिवपाल ही मुख्य भूमिका में रहे। पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता बेनी प्रसाद वर्मा को पार्टी में फिर से वापस लाने का श्रेय शिवपाल को ही जाता है।


कुछ ऐसा है मुलायम-शिवपाल प्रेम
हाल फिलहाल समाजवादी पार्टी में चाचा भतीजे के बीच चल रहे घमासान से कार्यकर्ताओं में निराशा है और वे इस विवाद के जल्द से जल्द शांत होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। शिवपाल और अखिलेश को नेता जी का दोनों हाथ बताते हुए एक पार्टी नेता का कहना है, ‘मुलायम चाहते हैं कि अखिलेश आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपनी बेदाग छवि के साथ प्रचार पर अपना ध्यान केंद्रीत करें और पार्टी और संगठन की जिम्मेदारी शिवपाल पर छोड़ दें। शिवपाल संगठन के काम से भली भांति परिचित हैं और पार्टी के लिए समर्थन जुटाने में अखिलेश से ज्यादा महत्वपूर्ण भी हैं।’ शायद यही वजह है कि मुलायम किसी भी कीमत पर शिवपाल के साथ खड़े रहना चाहते हैं और इसके लिए यदि अखिलेश की इच्छा के विरुद्ध भी जाना पड़े तो उसके लिए भी तैयार हैं।

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