Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

OMG! पुराने नोटों से सड़कों के गड्ढे भरेगी सरकार

 Abhishek Tripathi |  2016-11-18 07:00:42.0

currency_notesतहलका न्यूज डेस्क
नई दिल्ली. रुपया शब्द का प्रयोग सबसे पहले शेर शाह सूरी ने भारत में अपने शासन (1540-1545) के दौरान किया था। भारत में नोटों को छापने का काम भारतीय रिजर्व बैंक और सिक्कों को ढालने का काम भारत सरकार करती है। भारत में सबसे पहले वाटर मार्क वाला नोट 1861 में छपा था। वर्तमान में भारत समेत 8 देशों की मुद्राओं को रुपया कहा जाता है। आइए अब हम आपको बताते हैं कि आपने जो 500 और 1000 का नोट बैंक को दिया है, उसके साथ क्या होने वाला है। इन नोटों के साथ सरकार क्या करेगी...


जब कोई नोट पुराना हो जाता है या दोबारा चलन में आने के योग्य नहीं रहता है तो उसे व्यावसायिक बैंकों के जरिए जमा कर लिया जाता है और दोबारा बाजार में नहीं भेजा जाता है। अब तक कि प्रथा यह थी कि उन पुराने नोटों को जला दिया जाता था, लेकिन अब आरबीआई ने पर्यावरण की रक्षा के लिए जलाने के स्थान पर 9 करोड़ रुपए की एक मशीन आयात की यह मशीन पुराने नोटों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट देती है। इसके बाद इन टुकड़ों को गलाकर ईंट के आकर में बनाया जाता है। ये ईंटें कई कामों में प्रयोग की जाती हैं। खासतौर पर इन र्इंटों का प्रयोग सड़कों के गड्ढे भरने में किया जाता है।


भारत में हर साल 5 मिलियन नोट चलन से बाहर हो जाते हैं जिनका कुल वजन 4500 टन के बराबर होता है। यह बात चिंताजनक है कि जितनी मात्रा में भारत को नोट छापने के लिए स्याही और कागज की जरुरत पड़ती है उतना उत्पादन यहाँ नही हो पाता है और सरकार को विदेशों से इन दोनों चीजों का आयात करना पड़ता है। इसी के विकल्प के रूप में सरकार ने 2010 से देश के कुछ हिस्सों में प्रयोग के तौर पर प्लास्टिक के 10 रुपये के नोटों का चलन शुरू किया है।


नोट तैयार करते वक्त ही उनकी सही बने रहने की अवधि तय की जाती है। यह अवधि समाप्त होने पर या लगातार प्रचलन के चलते नोटों में खराबी आने पर रिजर्व बैंक इन्हें वापस ले लेता है। बैंक नोट व सिक्के सर्कुलेशन से वापस आने के बाद इश्यू ऑफिसों में जमा कर दिए जाते हैं।

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top