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उज्जैन सिंहस्थ कुंभ: दूसरा शाही स्नान शुरू, 13 अखाड़ों ने एक साथ लगाई डुबकी

 Tahlka News |  2016-05-09 06:15:53.0

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तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
उज्जैन. मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में चल रहे सिंहस्थ कुंभ का आज दूसरा शाही स्नान है। दूसरे शाही स्नान की शुरुआत जूना अखाड़ा के साधु-संतों द्वारा दत्त अखाड़ा घाट पर डुबकी लगाने से हुई। आज अक्षय तृतीया भी है, जिसकी वजह से इस शाही स्नान में 50 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है। 13 अखाड़ों के साधु-संत सुबह 4 बजे से ही क्षिप्रा नदी में डुबकी लगा रहे हैं।


सिंहस्थ के दूसरे शाही स्नान पर हर तरफ श्रद्घालुओं का जनसैलाब उमड़ा हुआ है। परंपरा के मुताबिक, सबसे पहले अखाड़े स्नान करते हैं और उसके बाद ही आमजन को स्नान की अनुमति मिलती है। उसी के तहत विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधि स्नान कर रहे हैं।


दूसरे शाही स्नान पर सोमवार सुबह से ही अखाड़ा क्षेत्रों से निकली साधु-संतों की टोलियां से उज्जैन की हर सड़क पर धर्म और संस्कृति के रंग बिखर गए हैं। हाथ में भाला, पताकाएं लिए चल रहे साधु-संतों की टोलियों द्वारा 'जय महाकाल' और 'हर हर क्षिप्रा' के जय घोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया है। रामघाट और दत्त अखाड़ा घाट पर दोपहर एक बजे तक अखाड़ों का स्नान चलेगा और उसके बाद ही आम लोग स्नान कर सकेंगे।


उज्जैन के प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि पहले शाही स्नान और अब दूसरे शाही स्नान में भी सभी 13 अखाड़े स्नान कर रहे हैं। कम ही ऐसे मौके आए हैं, जब सभी 13 अखाड़ों ने स्नान किया हो। दूसरे शाही स्नान में सिंह ने रिकार्ड श्रद्घालुओं के पहुंचने का दावा किया है।

सिंहस्थ का दूसरा शाही स्नान अक्षय तृतीया के दिन होने के कारण बड़ी संख्या में आमजन यहां पहुंचकर क्षिप्रा नदी में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करना चाहते हैं। यही कारण है कि देश के विभिन्न स्थानों से हजारों श्रद्घालु रविवार रात से ही उज्जैन पहुंचने लगे।


ज्ञात हो कि सिंहस्थ कुंभ की शुरुआत 22 अप्रैल को पहले शाही स्नान से हुई। इस शाही स्नान में हुई कुछ अव्यवस्थाओं के कारण साधु-संतों ने सख्त नाराजगी जताई थी। उसके बाद प्रशासन ने व्यवस्थाओं में सुधार का वादा किया था। उस वादे के मुताबिक ही व्यवस्थाओं मे सुधार किया गया है। अखाड़ा परिषद के नरेंद्र गिरी ने भी कहा है कि पिछले शाही स्नान की तुलना में इस बार की व्यवस्थाएं बेहतर हैं। साधु-संतों को किसी तरह की असुविधा नहीं हो रही है।


क्या है सिंहस्थ?
चार कुंभ मेलों में से एक सिंहस्थ
क्षिप्रा नदी में डुबकी लगाने की परंपरा
समुद्र मंथन से निकला कुंभ क्षिप्रा में गिरा
सूर्य मेष राशि में और बृहस्पति सिंह राशि में
12 साल में बनता है ये योग
हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक में कुंभ

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