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एक दूसरे की संजीवनी हैं सपा और भाजपा : नसीमुद्दीन

 Sabahat Vijeta |  2016-10-14 12:20:06.0

nasimuddin
तहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी ने आज अपने आवास पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में समाजवादी पार्टी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने इलज़ाम लगाया कि समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी आपस में मिले हुए हैं. दोनों एक दूसरे के अस्तित्व को बचाने में मदद करते हैं.नसीमुद्दीन ने कहा कि बसपा ने भाजपा के सहयोग से सरकार भी बनाई लेकिन भाजपा के एजेंडे को कभी हावी नहीं होने दिया.


नसीमुद्दीन ने समाजवादी पार्टी को राय दी कि जिनके घर शीशे के होते हैं वह दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकते हैं. उन्होंने कहा कि हम पर भाजपा से मिले होने का इलज़ाम लगाया जा रहा है लेकिन सभी जानते हैं कि 67, 77 और 89 में मुलायम सिंह को चुनाव जिताने में संघ और भाजपा ने मदद की है. मुलायम ने भी इसके बदले में भाजपा को लोकसभा में 2 से बढ़ाकर 88 सीट करने में मदद की.


नसीमुद्दीन ने कहा कि यूपी में हमारी सरकार थी तब भाजपा के 9 सदस्य लोकसभा पहुंचे थे जबकी 2012 में यूपी की सपा सरकार की मदद से लोकसभा में 73 सांसद जीते. उन्होंने कहा कि 2003 में जब मायावती ने अम्बेडकर मैदान में लाखों लोगों की मौजूदगी में सरकार त्याग दी थी तब मुलायम सिंह यादव ने भाजपा के साथ मिलकर बहुमत न होते हुए भी सरकार बनाई थी और केशरी नाथ त्रिपाठी को विधानसभा अध्यक्ष बना रहने दिया था.


उन्होंने कहा कि मुलायम के परिवार के मांगलिक कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री से लेकर दूसरे बड़े नेता शामिल होते रहे हैं. नसीमुद्दीन ने कहा कि भाजपा से अपने निकट संबंधों की वजह से ही मुलायम ने बिहार के महागठबंधन से नाता तोड़ लिया.


नसीमुद्दीन ने कहा कि मायावती ने भाजपा से मिलकर सरकार बनाई लेकिन भाजपा के एजेंडे को सरकार पर हावी नहीं होने दिया. मायावती सरकार में काशी, मथुरा और अयोध्या में किसी नए कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी गई.


नसीमुद्दीन ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी लाशों के ढेर पर राजनीति करती है. अखिलेश सरकार में भाजपा के सहयोग से 400 दंगे हुए. समाजवादी पार्टी ने मुसलमानों को हमेशा धोखा दिया. चुनाव घोषणापत्र में मुसलमानों को आरक्षण की बात कही. जेल में बंद बेगुनाह मुसलमानों को रिहा करने की भी बात कही लेकिन सरकार बनाने के बाद कुछ नहीं किया. रिज़र्वेशन तो खैर वह दे ही नहीं सकते क्योंकि इसके लिए संविधान में संशोधन करना पड़ेगा जो संसद करती है. लेकिन सपा सरकार ने बेगुनाह मुसलमानों को रिहा करने का वादा भी पूरा नहीं किया. खालिद मुजाहिद को तो मरवा ही दिया.


नसीमुद्दीन ने कहा कि मायावती ने 99 मदरसों को अनुदान दिया. उर्दू, अरबी, फारसी यूनीवर्सिटी खोली. अल्पसंख्यक कल्याण विभाग बनाया. उन्होंने कहा कि बसपा का घोषणा पत्र नहीं होता. वह कहने में नहीं करने में भरोसा करने वाली पार्टी है.

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