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6 महीने की गर्भवती रेप पीड़ित महिला को सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात की दी इजाजत

 Abhishek Tripathi |  2016-07-25 09:44:09.0

supreme_courtतहलका न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली. 24 हफ्ते की गर्भवती रेप पीड़ित महिला को सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात की इजाजत दे दी है। अदालत ने यह फैसला मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट आने के बाद दिया। रिपोर्ट में बताया गया है कि गर्भ में बच्चे की हालत ठीक नहीं है। ज्ञात हो कि पीड़िता ने गर्भपात के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर इजाजत मांगी थी। बता दें कि मेडिकल टेर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट (1971) के तहत 20 हफ्ते से ज्यादा समय की गर्भवती महिला का गर्भपात नहीं हो सकता।


शीर्ष अदालत में दायर याचिका में मुंबई की रेप पीड़िता ने इस अधिनियम को अंसवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर गर्भपात कराने की इजाज़त मांगी थी। पीड़िता ने दाखिल किए गए याचिका में कहा कि वो बेहद ही गरीब परिवार से है। उसके मंगेतर ने शादी का झांसा देकर उसके साथ लागातार बलात्कार किया और उसे धोखा देकर दूसरी लड़की से शादी कर ली। इसके बाद पीड़िता ने मंगेतर के खिलाफ बलात्कार का केस दर्ज किया है। महिला को जब पता चला कि वो गर्भवती है तो उसने मेडिकल टेस्ट कराया जिससे पता चला कि अगर वो गर्भपात नहीं कराती है तो उसकी जान जा सकती है।


जांच के बाद गत महीने के 2 जून को डॉक्टरों ने पीड़िता का गर्भपात करने से मना कर दिया था क्योंकि उसे गर्भधारण किए 20 हफ्ते से ज़्यादा का वक्त हो चुका था। पीड़िता ने दाखिल याचिका में कहा है कि 1971 में जब कानून बना था तो उस समय 20 हफ्ते का नियम सही था लेकिन अब समय बदल गया है। अब 26 हफ्ते बाद भी गर्भपात हो सकता है। याचिका में पीड़िता ने ये भी कहा कि इस कानून से उसका व्यक्तिगत जीवन और निजता प्रभावित हो रही है।

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