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उत्तराखंड संकट: राष्ट्रपति शासन हटाने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

 Tahlka News |  2016-04-22 11:26:10.0

a1तहलका न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली, 22 अप्रैल. उत्तराखंड में प्रेसिडेंट रूल हटाने के हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। 27 अप्रैल को मामले की अगली सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लग गया है। बता दें कि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को मोदी सरकार को झटका देते हुए राज्य में करीब एक महीने से जारी प्रेसिडेंट रूल को खत्म कर दिया था।


एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अर्जेंट मेंशनिंग के लिए मामला रखा। दोपहर 3.30 बजे के बाद सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली बेंच इस केस की सुनवाई कर रही है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उत्तराखंड हाईकार्ट का फैसला जस्टिस के लिहाज से ठीक नहीं है और उसके ऑर्डर को खारिज कर दिया जाना चाहिए। केंद्र ने कहा- हाईकोर्ट के आदेश पर रोक नहीं लगाई तो पिटीशनर के साथ नाइंसाफी होगी। उत्तराखंड हाईकोर्ट के ऑर्डर पर चीफ जस्टिस के साइन नहीं है। लिहाजा, इस पर रोक लगाई जाए। उत्तराखंड सरकार की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि राज्यपाल ने राष्ट्रपति से क्या सिफारिश की थी?


हाईकोर्ट ने कांग्रेस लीडर हरीश रावत से विधानसभा में 29 अप्रैल को बहुमत साबित करने को कहा है। वहीं, फिर सीएम बनते ही रावत ने कैबिनेट की मीटिंग की। 11 फैसले भी लिए। इससे पहले, उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के. एम. जोसेफ की डिवीजन बेंच ने राज्य में आर्टिकल-356 लागने के फैसले पर केंद्र को फटकार लगाई थी। बेंच ने कहा था कि प्रेसिडेंट रूल लगाना सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दी गई व्यवस्था के खिलाफ है। नौ विधायकों को डिस्क्वॉलिफाई करने के स्पीकर के फैसले को बरकरार रखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि उन्हें दल बदलने के 'संवैधानिक पाप' की कीमत चुकानी होगी। कांग्रेस के 9 बागी विधायकों की मेंबरशिप रद्द होने के बाद असेंबली में 62 विधायक हैं। बहुमत के लिए 32 विधायकों की जरूरत होगी।

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