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स्वामी प्रसाद मौर्य के सामने हैंं ये तीन विकल्प, आज दिखाएंगे ताकत

 Abhishek Tripathi |  2016-07-01 05:30:43.0

swami_prasad-mauryaतहलका न्यूज ब्यूरो
लखनऊ. बसपा से बगावत करके नयी सियासी डगर तलाश रहे स्वामी प्रसाद मौर्य आज अपनी ताकत का आकलन करेंगे। लखनऊ के सीएमएस स्कूल में सुबह 11 बजे हो रहे सम्मेलन की सफलता या विफलता से ही मौर्य की नई राजनीतिक पारी की दिशा तय होगी।


बसपा में शीर्ष पदों पर लंबे समय रहने वाले स्वामी प्रसाद के लिए भी यह पहला मौका होगा जब उनको जनता में व्यक्तिगत पकड़ का इम्तिहान देना होगा। खासतौर से मौर्य, कुशवाहा, शाक्य एवं सैनी समाज के बीच अपनी लोकप्रियता साबित करनी होगी ताकि बसपाइयों द्वारा उन पर लगाए जा रहे जनाधारहीन नेता होने के आरोप का जवाब दिया जा सके। सूत्रों का कहना है कि मौर्य ने पूरी ताकत शुक्रवार का सम्मेलन सफल बनाने में लगा रखी है। सम्मेलन में कोई बड़ा फैसला होने के बजाए जनजागरण अभियान चलाकर रमाबाई मैदान में बड़ी रैली करने पर सहमति बन सकती है।


मौर्य के सामने तीन विकल्प
बसपा से बगावत करने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी को गुंडों की पार्टी कहकर समाजवादी परिवार में शामिल होने की राह बंद कर ली है। ऐसे में मौर्य के सामने जो तीन विकल्प बचते हैं उसमें सबसे अधिक संभावना भाजपा का दामन थाम लेने की जतायी जा रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के नरम रवैये से मौर्य की केसरिया बिग्रेड में शामिल होने की अटकलों को बल मिला, हालांकि देवी-देवताओं को लेकर उनकी अभद्र टिप्पणियों से काफी उत्तेजना भी फैली, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ भी मौर्य हमेशा मुखर रहे हैं। ऐसे में आरएसएस भी उनकी एंट्री पर प्रश्न खड़ा कर सकता है।


अलग दल बनाना आसान पर चलाना मुश्किल
मौजूदा हालात में अलग पार्टी बनाना भले ही आसान हो परन्तु चलाना काफी मुश्किल है। छोटी पार्टियों को वजूद बचाने के लिए बड़े दलों का दामन थामने को मजबूर होना पड़ रहा है। मौर्य ने नया दल बनाया तो उन्हें जनता दल यूनाइटेड जैसे दल के साथ मोर्चा बनाना होगा। पीस पार्टी, कौमी एकता दल व महान दल जैसी पार्टियों को जोड़ फ्रंट बनाने की संभावना से भी समर्थक इनकार नहीं कर रहे।


कांग्रेस का साथ भी संभव
मौर्य को जोडऩे के लिए कांग्रेस के एक बड़े नेता लगातार सम्पर्क में हैं। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस के चुनाव प्रबंधन विशेषज्ञ प्रशांत किशोर भी पिछड़ा वर्ग के वोटों में सेंध के लिए किसी गैरयादव नेता को प्रमोट करने की पैरोकारी कर रहे हैं।

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