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और भाजपा की सवर्ण राजनीति का चेहरा बन गयी स्वाती सिंह

 Tahlka News |  2016-10-07 14:35:11.0

स्वाति सिंह



उत्कर्ष सिन्हा  

लखनऊ. सियासत में कब एक इत्तेफाक आपको गुमनामी ने निकाल कर एक बड़े फलक  पर पंहुचा दे इसका कोई ठिकाना नहीं. ताजा उदाहरण है स्वाती सिंह. महज कुछ महीने पहले अपने पति से अलग रह कर मुश्किल हालातो में जिंदगी जी रही स्वाती सिंह आज उसी पति के एक बयांन  से उपजे सियासी बवंडर के कारण सूबे की सियासत में एक अहम् किरदार बन गयी हैं.

बसपा सुप्रीमो मायावती पर अभद्र टिप्पणी से चर्चा में आये दयाशंकर सिंह की पत्नी स्वाती सिंह को भारतीय जनता पार्टी ने अपने यूपी महिला इकाई का अध्यक्ष घोषित कर दिया है. दयाशंकर सिंह की टिप्पणी  से उठे तूफ़ान के बाद जब बसपा नेताओं ने दयाशंकर के परिवार की महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी की तब स्वाती सिंह ने मायावती सहित बसपा नेताओं के खिलाफ जबरदस्त मोर्चा खोल दिया था.


चौतरफा आलोचना के दवाब में भाजपा ने दयाशंकर सिंह को तो पद से हटा दिया था मगर उसे इस बात का बखूबी अंदाजा लग गया था कि इस काण्ड के जरिये सवर्णों , खासकर राजपूत वोटो को एकजुट किया जा सकता है. इसके बाद से भाजपा ने स्वाती सिंह के बयानों को हवा देनी शुरू कर दी थी. खुद पार्टी की तरफ से तो कुछ नहीं कहा गया मगर अलग अलग संगठनो के जरिये स्वाती के समर्थन का सिलसिला जरुर शुरू करवा दिया गया था.

इस प्रकरण के बाद भले ही दयाशंकर सिंह की राजनीती कुछ समय के लिए हाशिये पर चली गयी मगर भाजपा को स्वाती के रूप में एक नया लड़ाकू तेवर मिल गया. स्वाती ने बसपा नेताओं को चुनौती देते हुए पूछा था कि वे बताये कि “मैं अपनी बेटी को ले कर कहाँ आ जाऊं?” स्वाती के इस तेवर ने उनके प्रति सहानुभूति की एक बड़ी लहर खड़ी कर दी थी.

इसके बाद स्वाती की तबियत बिगड़ गयी और सहानुभूति की लहर और तेज हो गयी. अस्पताल में उनसे मिलने कई नेता पहुंचे और फिर स्वाती ने मायावती को सीधी चुनौती देते हुए उनके खिलाफ चुनाव लड़ने का बयान भी दे दिया. तब ही इस बात के संकेत मिलने लगे थे कि दयाशंकर की जगह स्वाती सिंह को पार्टी चुनाव में उतार सकती है.

गुरुवार को जब भाजपा ने अपने मोर्चे की अध्यक्षों की घोषणा की तब स्वाती को महिला मोर्चे का अध्यक्ष घोषित कर दिया. हांलाकि स्वाति कभी भी सक्रिय राजनीती में नहीं रही हैं और वे अपने पार्टी दयाशंकर सिंह की ज्यादतियों के खिलाफ भाजपा के प्रदेश मुख्यालय पर धरना भी दे चुकी हैं मगर सियासी इत्तेफाक ने उन्हें सीधे उस जगह पंहुचा दिया है जहाँ पहुँचाने के लिए तमान महिला नेता सालो तक अपनी एडियाँ चटकाती रहती हैं.

स्वाती को इस पद पर ला कर भाजपा ने बड़ा कार्ड खेला है. स्वाती के जरिये वह दलित बनाम सवर्ण के मुद्दे की याद दिलाती रहेगी और राजपूत वोटरों के साथ साथ महिलाओं की सहानुभूति के लिए स्वाती का बखूबी इस्तेमाल भी करेगी.

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