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#NationWantsRamMandir: निर्माण के लिए आईं थी शिलाएं, बन गया अस्थायी राम मंदिर

 Anurag Tiwari |  2016-07-03 07:49:45.0

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अनुराग तिवारी

लखनऊ. सोशल मीडिया पर अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा गरमाया हुआ है और और ट्विटर पर तो #NationWantsRamMandir हैशटैग ट्रेंड कर रहा है। अयोध्या में राम मंदिर के लिए विश्व हिन्दू परिषद ने अयोध्या के कारसेवक पुरम स्तिथ रामजन्म मंदिर कार्यशाला में रखीं शिलाएं भी माँगाकर रख ली हैं। ये बात दीगर है कि ये शिलाएं यहाँ पड़ी धुल खा रही है और धन की कमी के कारण ये शिलाएं खुले में रखीं मंडित निर्माण का इन्तजार कर रही हैं।

अशोक सिंघल के कहने पर आईं थी राम शिलाएं

यहाँ रखी राम शिलाएं विहिप के नेता अशोक सिंघल के जीवन और राम जन्मभूमि आन्दोलन की कहानी कहती हैं। राम मंदिर बनाने का संकल्प लिए सिंघल भले ही दुनिया से चले गए हों, लेकिन यहाँ रखीं शिलाएं इस बात की गवाह हैं, राम मंदिर निर्माण का आन्दोलन किन चरणों और मुश्किलों से गुजरा है हाल ही में अयोध्या पहुंचे अशोक सिंघल ने कहा था कि जल्दी ही राम मंदिर के निर्माण के काम में तेजी आएगी। अयोध्या में विश्व भर से एकत्र हुई शिलाओं से एक अस्थायी मन्दिर बना दिया गया था।


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दुबारा शुरू होना था शिलादान कार्यक्रम

बीते साल 2015 में जून में अयोध्या पहुंचे अशोक सिंघल ने राम मंदिर के लिए पत्थरों की कमी का जिक्र करते हुए एक बार फिर देश भर में 1989 में कराए गए शिला पूजन और शिलादान कार्यक्रम चलाए जाने की आवश्यकता बतायी थी। उन्होंने मणिराम छवनी में हुई एक बैठक में कहा था कि राम मंदिर बनवाने के लिए 2.25 लाख घन फुट शिला की जरूरत है और लगभग 1.25 लाख घन फुट शिला अयोध्या में कार्यशाला में तैयार है। बाकी एक लाख घन फुट शिला देशभर के हिन्दू श्रद्धालुओं से एकत्र की जानी है। सिंघल के मुताबिक़ देशभर में शिलादान का आयोजन कर एक साल के अंदर 1.25 लाख घन फुट शिलाएं एकत्र कर अयोध्या लाई जानी थीं। उन्होंने इस बैठक के बाद कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर के लिए पत्थरों पर नक्काशी के काम में तेजी लाई जाएगी ताकि एक वर्ष के अंदर निर्माण के लिए सभी पत्थर तैयार हो जाएं।

रामशिलाओं को सहेजने के लिए दे दिया मंदिर का रूप

कभी आरएसएस के प्रचारक रहे हजारीलाल अयोध्या के कारसेवकपुरम में रखे मंदिर के मॉडल की देखरेख करते हैं। वे बताते हैं कि अशोक सिंघल की प्रेरणा से जो रामशिला पूजन का कार्यक्रम हुआ, उसके चलते देश भर से रामभक्तों ने शिलाएं भेजीं। जनवरी 1989 में कुम्भ मेला के दौरान राम मंदिर निर्माण के लिए विहिप ने धर्म संसद का आयोजन किया। इसमें देवरहा बाबा की उपस्थिति मेंयह फैसला हुआ कि देशभर के सभी मंदिरों में मंदिर निर्माण के लिए रामशिला का पूजन होगा। इसी सिलसिले में बद्रीनाथ धाम में पहली रामशिला का पूजन हुआ। इसके बाद पूरे देश में लगभग 6 करोड़ लोगों ने रामशिला पूजन किया और 2,75,000 राम शिलाएं एकत्र की गईं। यह सभी शिलाएं अक्टूबर 1989 के अंत में सुरक्षित अयोध्या पहुंचा दी गयीं।  खुले में पड़े रहने के कारण ईंटे काली पड़ने लगीं। इस पर यह निर्णय लिया गया कि इन्हें सहेजा जाए। इसके लिए कार्यशाला के एक छोर पर टिनशेड लगाकर, ईंटों को मंदिर की आकृति में व्यवस्थित कर दिया गया। इस ढांचे के ऊपर बाकयदा वे गुम्बद भी रखे गए, जो वास्तविक मंदिर के गर्भगृह पर रखे जाने थे।

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 धन की कमी के चलते बंद हुआ था काम

जून 2015 में ही सिंघल ने हिंदू महासभा एक पत्र लिखकर बताया था कि सारा धन पांच साल पहले खत्म हो गया और तभी से पत्थरों को तराशने का काम बंद है। उन्होंने पत्र में लिखा था कि साल 1989 में दान के जरिए वीएचपी को सिर्फ सवा आठ करोड़ रुपए ही मिले थे और इस धन से एक लाख घनफुट पत्थरों से प्रस्तावित मंदिर के खंभे बनवा लिए गए थे। सिंघल ने हिंदू महासभा को लिखे खत में बताया है कि सारा धन पांच साल पहले खत्म हो गया और तभी से पत्थरों को तराशने का काम बंद है। बता दें कि हाल ही में राम जन्मभूमि न्यास ने और सवा लाख घनफुट पत्थर तराशने के लिए जनता से दान लेने का प्रस्ताव पास किया है।

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 राम जन्मभूमि मंदिर का यह है डायमेंशन

विहिप नेता अशोक सिंघल की अगुवाई में तैयार हुए रामजन्मभूमि मॉडल के अनुसार राम जन्मभूमि की लम्बाई 268 फीट पांच इंच, चौड़ाई 140 फीट। ऊंचाई 128 इंच रहेगा। मंदिर में कुल 212 खम्बे बनेंगे। इसमें से 16 फीट ऊँचाई के के 106 खम्बे पहली मंजिल पर और इतने ही खम्बे 14 फीट 6 इंच ऊँचाई के दूसरी मंजिल पर लगेंगे। इन सभी खम्बों में 16 मूर्तियाँ होंगीं। पहला चबूतरा 8 फीट ऊंचा और 10 फीट  चौड़ा होगा। दूसरा चबूतरा 4 फीट 9 इंच का होगा, जिसके ऊपर खम्बे लगेंगे। पहली मंजिल 18 फीट और दूसरी मंजिल 15 फीट 9 इंच का होगा, इसके ऊपर 16 फीट 3 इंच की पेटी होगी, जिसके ऊपर 65 फीट तीन इंच ऊंचा शिकार बनेगा। मंदिर के अगले भाग में सिंहद्वार, नृत्यमंडप, रंग मंडप और गर्भगृह बनेगा। इसी गर्भगृह में भगवान राम की मूर्ति लगाई जाएगी।

 

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