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राज्यपाल ने राजभवन से ही मोबाईल फोन द्वारा उपाधि प्राप्तकर्ताओं को दिया सम्बोधन 

 Sabahat Vijeta |  2016-12-26 16:51:58.0

gov-rajbhawan
लखनऊ. काशी आध्यात्मिक नगरी के साथ-साथ विद्या की भी नगरी है. यह पहला अवसर है कि दीक्षान्त समारोह में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की कुलपति, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति और स्वयं सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति एक मंच पर उपस्थित हैं, जो यह प्रमाणित करता है कि काशी विद्धानों की नगरी है. खराब मौसम के कारण उत्तर प्रदेश के राज्यपाल एवं कुलाधिपति राज्य विश्वविद्यालय राम नाईक आज बनारस न जाकर राजभवन से ही सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के दीक्षान्त समारोह को अपने मोबाईल फोन से सम्बोधित कर रहे थे.


राज्यपाल ने काशी के तीन महापुरूष भारत रत्न महामना पं. मदन मोहन मालवीय, स्व. शिव प्रसाद गुप्त तथा स्व. डाॅ. सम्पूर्णानन्द को अपनी आदरांजलि अर्पित की.


राज्यपाल ने दीक्षान्त समारोह में उपाधिप्राप्त छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुये कहा कि दीक्षान्त समारोह में उनके द्वारा ली गयी शपथ को अर्थपूर्ण प्रतिज्ञा के रूप में पूरी करें. देश को आगे बढ़ाने में ध्वजवाहक बने. युवाओं को सम्बोधित करते हुये उन्होंने कहा कि शिक्षा पूरी होने के बाद आप खुले आकाश में उड़ान भरने के लिये तैयार हो गये हैं. उन्होंने कहा कि कठोर परिश्रम, प्रमाणिकता और पारदर्शिता के साथ अपने जीवन का लक्ष्य चुने.


श्री नाईक ने चरैवेति! चरैवेति!! को अपने जीवन का सार बताते हुये कहा कि यह एक ऐसा श्लोक है जिसमें बताया गया है कि सोने वाले का भाग्य भी सो जाता है. जो रूक जाता है उसका भाग्य भी रूक जाता है, जो गतिमान रहता है उसका भाग्य भी आगे बढ़ता है. जैसे मधुमक्खी गतिमान रहते हुए मधु एकत्र कर लेती है, पक्षी लगातार चलायमान रहते हुए मधुर फलों का रसास्वादन करते हैं. जैसे भगवान भाष्कर अपनी निरन्तर गति से जगत को प्रकाशमान करने के कारण पूज्यनीय हैं, वैसे ही मनुष्य को निरन्तर चलते रहना चाहिये. उन्होंने कहा कि निरन्तर आगे बढ़ने में ही सफलता का मर्म निहित है.


राज्यपाल ने कहा कि सम्पूर्ण राष्ट्र में संस्कृति की शिक्षा के लिये सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय का विशेष महत्व है. भारत की पारम्परिक ज्ञान प्रणाली को संरक्षित करने और उसको समयानुकूल प्रासंगिक बनाये रखने में इस विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका है. उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना वास्तव में एक चुनौती है. कुलाधिपति के रूप में अपने अनुभव को साझा करते हुये उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयी शिक्षा को पटरी पर लाने में काफी सफलता मिली है. प्रवेश समय पर हो रहे हैं, परीक्षाये नकलविहीन हों, इस पर जोर दिया जा रहा है. परिणाम समय पर घोषित हो रहे हैं तथा दीक्षान्त समारोह भी समय पर आयोजित किये जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना और स्तरीय शोध बढ़ाने की आवश्यकता है.


श्री नाईक ने छात्र-छात्राओं को अपने गुरू द्वारा व्यक्तित्व विकास एवं सफलता प्राप्त करने के चार मंत्र बताते हुये कहा कि सदैव प्रसन्नचित रह कर मुस्कराते रहें, दूसरों के अच्छे गुणों की प्रशंसा करें और अच्छे गुणों को आत्मसात करने की कोशिश करें, दूसरों को छोटा न दिखाये तथा हर काम को और बेहतर ढंग से करने का प्रयास करें.


उल्लेखनीय है कि राज्यपाल इससे पूर्व खराब मौसम के कारण छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के दीक्षान्त समारोहों तथा प्रतापगढ़ में आयोजित जूनियर बार एसोसिएशन एवं अम्मा साहेब ट्रस्ट के कार्यक्रम को सम्बोधित कर आयोजकों का उत्साहवर्द्धन चुके हैं.

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