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राज्यपाल ने मदरसा विधेयक राष्ट्रपति को भेजा

 Sabahat Vijeta |  2016-09-19 14:25:48.0

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने उत्तर प्रदेश मदरसा (अध्यापकों एवं कर्मचारियों का वेतन भुगतान) विधेयक, 2016 को राष्ट्रपति को संदर्भित कर दिया है।


राज्यपाल ने कहा है कि विधेयक के प्रावधान केन्द्रीय कानून दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 के खिलाफ है। संसद द्वारा बनाये गये दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 नामक केन्द्रीय अधिनियम में पुलिस को संज्ञेय अपराध में मजिस्ट्रेट से वारण्ट/पूर्व अनुमति लिये बिना सम्बन्धित व्यक्ति को गिरफ्तार करने की शक्ति दी गयी है। इसके साथ ही संविधान द्वारा उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय को सरकार अथवा किसी भी विधिक संस्था के निर्णयों और आदेशों की न्यायिक समीक्षा का अधिकार दिया गया है, परन्तु उत्तर प्रदेश मदरसा (अध्यापकों एवं कर्मचारियों का वेतन भुगतान) विधेयक, 2016 उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के न्यायिक समीक्षा के अधिकार को समाप्त करता है। विधेयक में उक्त आशय के प्रावधान संविधान की भावना के अनुरूप नहीं हैं।


श्री नाईक ने कहा कि ऐसी स्थिति में संविधान के अनुच्छेद 254(2) के अनुसार उत्तर प्रदेश मदरसा (अध्यापकों एवं कर्मचारियों का वेतन भुगतान) विधेयक, 2016 को मेरे द्वारा अनुमति नहीं दी जा सकती है अपितु उसे राष्ट्रपति के विचार हेतु आरक्षित किया जा सकता है। इसलिये मेरे द्वारा विधेयक को राष्ट्रपति द्वारा विचार किये जाने के लिए राष्ट्रपति को सन्दर्भित कर दिया गया है।


उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश मदरसा (अध्यापकों एवं कर्मचारियों का वेतन भुगतान) विधेयक, 2016 में प्रावधान किया गया है कि अधिकारियों द्वारा यदि मदरसा टीचर्स को समय पर वेतन का भुगतान नहीं कर दिया जाता है तो इसे संज्ञेय अपराध माना जायेगा, परन्तु मजिस्ट्रेट से वारण्ट/पूर्व अनुमति लिये बिना जिम्मेदार अधिकारी की गिरफ्तारी नहीं की जायेगी। विधेयक का यह प्रावधान केन्द्रीय कानून अर्थात दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 के खिलाफ है। संविधान द्वारा उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय को सरकार, अथवा किसी भी विधिक संस्था के निर्णय और आदेशों की न्यायिक समीक्षा का अधिकारी दिया गया है, परन्तु उक्त विधेयक उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय की न्यायिक समीक्षा के अधिकार को समाप्त करता है। अतः विधेयक के उक्त प्रावधान संविधान के अनुरूप नहीं है।

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