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पहियों पर दौड़ते इस अस्पताल में प्लास्टिक सर्जरी भी होती है और कैंसर से जंग भी

 Sabahat Vijeta |  2016-12-18 17:24:14.0

train-hospitalतहलका न्यूज़ ब्यूरो


नई दिल्ली. कम लोग जानते हैं कि हिन्दुस्तान में एक ऐसी भी ट्रेन चलती है जिसमें चलता-फिरता अस्पताल भी है. जीवन रेखा एक्सप्रेस नाम से 1991 में यह ट्रेन शुरू की गई थी. वर्तमान रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने इसमें दो नये कोच जोड़े हैं. इस ट्रेन को वाई-फाई से लैस किया है.


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वक़्त के साथ इस ट्रेन ने भी तरक्की की है. जब यह शुरू हुई थी तब इसमें लकड़ी के तीन डिब्बे थे लेकिन अब इसमें इस्पात के सात डिब्बे हैं. रेल मंत्री सुरेश प्रभु और केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने इसका उदघाटन किया तो पता चला कि इस चलते फिरते अस्पताल में कैंसर जैसे जानलेवा मर्ज़ का भी इलाज किया जायेगा.


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अपनी 25 साल की यात्रा में यह चलता फिरता अस्पताल देश के ग्रामीण क्षेत्रों में करीब दस लाख गरीबों का मुफ्त इलाज कर चूका है. सुनकर ताज्जुब हो सकता है कि पहियों पर दौड़ते इस अस्पताल में दुनिया के करीब दो लाख डाक्टरों ने अपनी सेवाएं दी हैं.


इपैक्ट इंडिया की कोशिशों से चलने वाली इस ट्रेन में प्रशिक्षित डाक्टर भी हैं और शानदार आपरेशन थियेटर भी. इस ट्रेन में पैथोलोजी लैब, गायनोकोलोजी एक्जामिनेशन रूम, मेमोग्राफी इकाई (एक्सरे से स्तनकैंसर की पहचान), दंत चिकित्सा यूनिट फार्मेसी और एक्स-रे आदि की सुविधाएं हैं. जब यह ट्रेन शुरू हुई थी तब इसमें मोतियाबिंद और पोलियो के इलाज की सुविधा ही थी लेकिन अब तो इसमें प्लास्टिक सर्जरी और मिर्गी का इलाज तक संभव है.

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