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यूपी चुनाव: CONGRESS का घोषणा पत्र, किसानों की कर्ज माफी से मंगलसूत्र तक का वादा

 Abhishek Tripathi |  2016-05-24 12:38:35.0

sonia-rahulतहलका न्यूज ब्यूरो
लखनऊ. अगले साल यूपी चुनाव में कांग्रेस की डूबती नैया को पार लगाने के लिए पीके (प्रशांत किशोर) दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। यूपी चुनाव कांग्रेस के साथ-साथ पीके के लिए भी साख बन चुका है। ऐसे में कांग्रेस अभी से घोषणा पत्र की तैयारी में जुट गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ सूत्रों की मानें तो, यूपी चुनाव में कांग्रेस का मुख्य मुद्दा किसान, गरीबी और बेरोजगारी हो सकता है। इसी क्रम में कांग्रेस युवाओं को बेरोजगारी भत्ता और महिलाओं को मंगलसूत्र बांटने का फैसला पार्टी के घोषणा पत्र में शामिल कर सकती है।


सूत्रों की मानें तो, 'जिस तरह यूपीए सरकार ने सोनिया गांधी की किसान हितैषी दृष्टि के तहत पूरे देश में किसानों का कर्ज माफ किया था, उसी तरह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के घोषणा पत्र में किसानों की कर्ज माफी अहम घोषणा होगी।' सूबे में 1989 में सत्ता से विदाई के बाद से कांग्रेस लगातार पिछड़ती जा रही है। 2009 के लोकसभा चुनाव में जरूर पार्टी को 21 सीटें मिल गई थीं और उसकी प्रमुख वजह भी मनरेगा और किसानों की कर्ज माफी जैसे फैसले रहे थे।


घोषणा पत्र में हो सकती हैं ये योजनाएं
दक्षिण के राज्यों में उपहार बांटने की शैली को उत्तर भारत में अपनाते हुए कांग्रेस युवाओं के लिए बेरोजगारी भत्ता और महिलाओं को मंगलसूत्र बांटने की बातें भी अपने घोषणापत्र में रख सकती है। खत्री ने बताया कि इन तीनों विषयों को पार्टी के घोषणापत्र में प्रमुख स्थान मिल सकता है, हालांकि इस पर अंतिम फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ही करेगा।


किसानों की कर्ज माफी का भी मुद्दा
सूबे को लेकर इस बार कांग्रेस की रणनीति पहले से आक्रामक है। दो साल से पड़ रहे सूखे के कारण गांवों से सबसे ज्यादा मांग किसानों का कर्ज माफ करने की ही उठ रही है। कांग्रेस की रणनीति है कि सिर्फ विकास और सामाजिक एकता के नारे के बजाय लोगों को सीधा फायदा पहुंचाने वाली बातें ज्यादा समझ आती हैं।


ऐसे ही वादों से जीती हैं जयललिता
तमिलनाडु में 32 साल बाद लगातार दूसरी बार सरकार बनाने वाली जयललिता की रणनीति भी कुछ इसी तरह की रही है। इसके अलावा उनकी जीत में महिलाओं का बड़ा योगदान रहा है। मुफ्त मंगलसूत्र जैसी घोषणाएं सीधे गृहणियों को आकर्षित कर सकती हैं। पार्टी का आंकलन है कि नरेंद्र मोदी सरकार की छवि पहले ही किसान विरोधी बन चुकी है और इस बजट में किसानों का नाम तो लिया गया है, लेकिन असल में उन्हें मिला कुछ नहीं है।


प्रशांत किशोर की रणनीति भी अहम
वैसे भी प्रशांत किशोर की रणनीति इस बार कांग्रेस को 100 सीटें जिताने की है। यह आंकड़ा बहुत हवाई नहीं है, क्योंकि 2009 के लोकसभा चुनाव में पार्टी करीब इतनी ही विधानसभाओं पर कामयाबी पा चुकी है। हालांकि, लोकसभा और विधानसभा चुनावों के समीकरण बहुत अलग होते हैं।

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