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जिसके खौफ ने ख़राब किया माहौल, ये है “कैराना” का कातिल

 Tahlka News |  2016-06-19 07:14:39.0

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उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. “कैराना” का नाम आते ही तमाम सियासी पार्टियों के चेहरे पर चमक आ जा रही है. सियासत की मंडी में कैराना एक नया ब्रांड बन गया है. भाजपा संसद हुकुम सिंह ने कैराना से हिन्दुओं के पलायन की सूची जारी कर इस कसबे को दुनिया भर में मशहूर कर दिया. गूगल पर सर्च बॉक्स में कैराना शब्द लिखते ही 14 लाख लिंक सामने आ रहे हैं.

शुरुआती विवाद के बाद साम्प्रदायिकता के मुद्दे पर घिरी भाजपा बैकफूट पर भले ही दिखाई दे रही हो और भले ही हुकुम सिंह ने खुद इसे कानून व्यवस्था का मामला कहना शुरू कर दिया हो मगर भाजप और उसके साथी संगठन अब भी इसमें सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की सम्भावनाये तलाशने में पीछे नहीं हट रहे हैं.

लेकिन कैराना का असली मुलजिम कौन है ? कौन है वो शक्श जिसके खौफ ने कैराना को इस कदर चर्चा में ला दिया है? कैराना से पलायन में सिर्फ हिन्दू परिवार ही शामिल नहीं हैं बल्कि सैकड़ो मुसलमानों ने भी इस सख्स के डर से अपना घर छोड़ दिया है.

पश्चिमी यूपी के मेरठ से ले कर मुजफ्फरनगर तक का इलाका हत्याओं और अपराधो का गढ़ बना हुआ है. अगर आपने “ओंकारा” फिल्म देखी हो तो इस इलाके के आपराधिक परिदृश्य से आप बखूबी वाकिफ हो सकते हैं.

दर्जनों छोटे बड़े अपराधी गिरोहों की स्थली यह इलाका बन चुका है. और इसी इलाके में एक नाम है “मुकीम काला”. मुकीम ही वह शख्स है जिसके गिरोह ने इलाके में इस कदर तबाही मचाई है कि उसका खौफ किसी भी दुर्दांत सिनेमाई ”खलनायक” सरीखा हो गया है.

फिलहाल पश्चिनी यूपी का यह अपराधी सरगना अपने वर्चस्व वाले इलाके से 600 किलोमीटर दूर पूर्वी यूपी के महाराजगंज की जिला जेल में बंद है, मगर इसका खौफ और इसके गुर्गो का नेटवर्क अभी भी कैराना और मुजफ्फरनगर के इलाके में लोगो के सर चढ़ कर बोल रहा है.

मुकीम के खिलाफ 3 दर्जन से ज्यादा मुकदमे दर्ज है. इसमें 4 पुलिस वालों की हत्या का मुक़दमा भी शामिल है. उसके नेटवर्क की ताकत उसके वे शार्प शूटर्स हैं जो मामूली बात पर किसी की हत्या करने में नहीं चूकते.एक वक्त में पुलिस ने मुकीम काला के गैंग में 29 शार्प शूटर्स होने का अंदाजा लगाया था.

शामली जिले के जहांनपुरा का रहने वाला मुकीम 19 अक्टूबर 2015 को जब पुलिस के हत्थे चढ़ा तब उसके सर पर 2 लाख का इनाम था. AK 47 से लैस उसके गिरोह में बहुतायत में थी. तीन जिलों की पुलिस के साथ साथ यूपी एसटीएफ भी उसकी तलाश में लग गयी थी.

मुकीम जरायम की दुनिया में 6 साल पहले आया था जब उसने हरियाणा में पेट्रोल पम्प पर डकैती डाली थी. इसके बाद सहारनपुर में एक सिपाही की हत्या कर उसने कारबाईन लूट ली. फिर तनिष्क शो रूम में उसने बड़ी लूट की. लेकिन बीते दो सालों में उसका आतंक हर बाशिंदे पर तारी हो गया और मुकीम इस इलाके का सबसे बड़ा गुंडा बन गया.

पश्चिमी यूपी के एक और माफिया अनिल दुजाना से मुकीम के नजदीकी रिश्ते रहे. दुजाना ने ही मुकीम को AK47 राईफलें बेचीं थी. पकडे जाने के वक्त मुकीम ने 7 हत्याओं की सुपारी ले रखी थी. इस काम के लिए उसने अपने शार्प शूटर अमित त्यागी को लगा रखा था. बाद में अमित पुलिस के हत्थे चढ़ गया.
पश्चिमी यूपी के सबसे बड़े गैंगस्टर मुकीम काला के संबंध बाहुबली शहाबुद्दीन से लेकर मुन्ना बजरंगी तक है. मुकीम का कनेक्शन नोएडा के विजय पंडित हत्याकांड में गवाहों को मारने से भी है.

दो साल पहले मुकीम ने दो सगे भाई शिव कुमार और राजेन्द्र की हत्या कर सनसनी फैला दी थी.इसके बाद तो हत्याओं का सिलसिला चल निकला. रंगदारी और डरा धमका कर घर और जमीन बेचने को मजबूर करना मुकीम का मुख्य धंधा बन गया.

जेल से मुकीम व्यापारियों को फोन करता है और उसके गुर्गे या तो आ कर पैसा ले जाते हैं या फिर हत्या कर देते हैं.

मुकीम काला जब गिरफ्तार हुआ तो पुलिस वालो ने उसे थाने में बहुत पीटा था और इनकाउन्टर की बात की थी इसके बाद ही मुकीम ने जेल जाना बेहतर समझा और अब वह महाराजगंज की जेल से अपना साम्राज्य चला रहा है.

इलाके के लोग भी इसे सांप्रदायिक चश्मे से इसलिए नहीं देखते क्योंकि सरगना भले ही मुसलमान है मगर उसके गैंग में हिन्दू बदमाशो की भी संख्या बड़ी है. ये वही लोग हैं जो जेल में बंद मुकीम का कारोबार इलाके में रह कर चलाते हैं.

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