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कैबिनेट ने किये यह ख़ास फैसले

 Sabahat Vijeta |  2016-08-08 18:31:24.0

Akhilesh_cabinet


लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में आज यहां एनेक्सी सचिवालय में सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले किये गए:-


डॉ. राम मनोहर लोहिया विशिष्ट हस्तशिल्प प्रादेशिक पुरस्कार


योजना की धनराशि बढ़ाने का प्रस्ताव मंजूर


मंत्रिपरिषद ने डॉ. राम मनोहर लोहिया विशिष्ट हस्तशिल्प प्रादेशिक पुरस्कार योजना की संशोधित गाईड लाइन्स जारी करने तथा पुरस्कार की धनराशि बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। इस योजना के अन्तर्गत राज्य हस्तशिल्प पुरस्कार के तहत चयनित हस्तशिल्पियों को 35 हजार रुपए प्रति हस्तशिल्पी तथा दक्षता हस्तशिल्प पुरस्कार के अन्तर्गत चयनित हस्तशिल्पियों को 20 हजार रुपए प्रति हस्तशिल्पी पुरस्कार स्वरूप चेक अथवा ड्राफ्ट के माध्यम से प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा, चयनित हस्तशिल्पियों को ताम्रपत्र, अंगवस्त्रम् एवं प्रमाण-पत्र भी दिया जाएगा।


पुरस्कार के लिए निर्धारित की गई पात्रता के तहत हस्तशिल्पियों की न्यूनतम आयु 25 वर्ष या इससे अधिक होनी चाहिए तथा हस्तशिल्प क्षेत्र में न्यूनतम 5 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। हस्तशिल्पी विकास आयुक्त (हस्तशिल्प), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्गत हस्तशिल्प प्रमाण-पत्र धारक हो। पुरस्कार हेतु प्रेषित कलाकृति हस्तशिल्पी द्वारा स्वयं बनाई गई हो। हस्तशिल्पियों को राज्य पुरस्कार एक ही बार दिया जाएगा। यह योजना प्रदेश के समस्त जिलों में लागू होगी। चयनित हस्तशिल्पियों को पुरस्कार वितरण की व्यवस्था समारोह आयोजित कर की जाएगी।


ज्ञातव्य है कि हस्तशिल्प को बढ़ावा देने तथा हस्तशिल्पियों को प्रोत्साहित करने के लिए वर्तमान में संचालित डॉ. राम मनोहर लोहिया विशिष्ट हस्तशिल्प प्रादेशिक पुरस्कार योजना के अन्तर्गत 20 राज्य पुरस्कार एवं 20 दक्षता पुरस्कार की व्यवस्था है। अभी तक राज्य पुरस्कार की राशि 25 हजार रुपए प्रति हस्तशिल्पी तथा दक्षता पुरस्कार की धनराशि 15 हजार रुपए प्रति हस्तशिल्पी निर्धारित थी।


‘उ.प्र. लघु एवं मध्यम उद्योग ब्याज उपादान योजना-2016’ को लागू किये जाने को मंजूरी


मंत्रिपरिषद ने ‘उत्तर प्रदेश लघु एवं मध्यम उद्योग ब्याज उपादान योजना-2016’ को लागू किये जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। प्रदेश के त्वरित आर्थिक विकास में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रदेश की तीव्र आर्थिक प्रगति सुनिश्चित करने हेतु सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र का समग्र एवं संतुलित विकास सुनिश्चित किया जाना अत्यन्त आवश्यक है।


प्रदेश के पूर्वांचल व बुन्देलखण्ड क्षेत्र औद्योगिक रूप से अति पिछड़े क्षेत्र हैं तथा प्रदेश के इस क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने व इन पिछड़े क्षेत्रों में अधिकाधिक लघु व मध्यम औद्योगिक इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नीति-2016 के क्रम में प्रदेश के पूर्वांचल, बुन्देलखण्ड व मध्यांचल क्षेत्र के जनपदों में लघु एवं मध्यम उद्योग ब्याज उपादान योजना लागू किये जाने का निर्णय लिया गया है।


योजना के तहत इन क्षेत्रों के जनपदों में स्थापित होने वाली नई लघु व मध्यम औद्योगिक इकाइयों हेतु प्लाण्ट एवं मशीनरी मद में बैंक से लिये गये ऋण पर पूर्वांचल व बुन्देलखण्ड क्षेत्र में 7 प्रतिशत की दर से अधिकतम 3 लाख रुपये प्रति इकाई प्रतिवर्ष की दर से 5 वर्षों तक तथा मध्यांचल क्षेत्र में 5 प्रतिशत की दर से अधिकतम 3 लाख रुपये प्रति इकाई प्रतिवर्ष की दर से 5 वर्षों तक ब्याज उपादान उपलब्ध कराया जाना प्रस्तावित है।


वर्तमान में प्रचलित महिला उद्यमी प्रोत्साहन योजना को नीति के अनुसार प्रस्तावित ब्याज उपादान योजना में सम्मिलित करते हुए महिलाओं हेतु 20 प्रतिशत आरक्षण का प्राविधान किया गया है। इसके दृष्टिगत महिला उद्यमी योजना को समाप्त करने का फैसला भी लिया गया है।


सरकारी विभागों और संस्थाओं में गांधी आश्रम के वस्त्रों को अनिवार्य तौर पर खरीदे जाने के प्रस्ताव को मंजूरी


मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास में लघु एवं कुटीर इकाइयों के महत्व तथा हथकरघा उद्योग से जुड़े बुनकरों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण से लघु, कुटीर एवं हथकरघा इकाइयों द्वारा उत्पादित 11 प्रकार के वस्त्रों का क्रय सरकारी विभागों एवं शासकीय नियंत्रणाधीन उपक्रमों/ निगमों/ प्राधिकरणों/ परिषदों एवं स्वायत्तशासी संस्थाओं द्वारा अनिवार्य रूप से किये जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।


इन वस्त्रों का क्रय उ.प्र. राज्य हथकरघा निगम लिमिटेड, यूपिका, उ.प्र. खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से उनके द्वारा वित्त पोषित एवं प्रमाणित संस्थाएं एवं श्री गांधी आश्रम तथा उ.प्र. हस्तशिल्प विकास एवं विपणन निगम के माध्यम से किया जाएगा।


इस सम्बन्ध में शासनादेश दिनांक 17 अगस्त, 2015 की अवधि को पूर्व वर्षों की भांति दिनांक 31 मार्च, 2016 तक विस्तारित किया गया था। हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग तथा खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के प्रस्ताव पर उच्चस्तरीय विचार-विमर्श के बाद क्रय अनिवार्यता विषयक शासनादेश की अवधि को 3 वर्षों अर्थात दिनांक 31 मार्च, 2019 तक विस्तारित करने का फैसला लिया गया है।


उ.प्र. इंस्टीट्यूट आफ डिजाइन की स्थापना के लिए निःशुल्क भूमि उपलब्ध कराने का फैसला


मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट आफ डिजाइन की स्थापना हेतु निःशुल्क भूमि उपलब्ध कराये जाने का फैसला लिया है। इसके तहत लखनऊ के परगना बिजनौर, तहसील सरोजनी नगर स्थित खाता संख्या 632 की 1.62 हेक्टेयर ऊसर भूमि, जिसकी कीमत 10 करोड़ 36 लाख 80 हजार रुपए है, को निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।


ज्ञातव्य है कि उ.प्र. इंस्टीट्यूट आफ डिजाइन (यूपीआईडी) की स्थापना दिनांक 12 मार्च, 2004 को लखनऊ में एक स्वायत्तशासी संस्थान के रूप में की गयी। इस संस्थान का मुख्य उद्देश्य हस्तशिल्प एवं हैण्डलूम क्षेत्र के कारीगरों को डिजाइन क्षेत्र में सर्टिफिकेट एवं डिप्लोमा कोर्सेज का संचालन कर उनका समग्र विकास किया जाना है।


वर्तमान में संस्थान को क्रियाशील किये जाने हेतु प्राथमिकता पर कार्यवाही की जा रही है। संस्थान में पूर्णकालिक अध्यक्ष की नियुक्ति भी की जा चुकी है। उ.प्र. इंस्टीट्यूट आफ डिजाइन को 5 वर्षों की अवधि में चरणबद्ध रूप से एक क्राफ्ट शैक्षणिक संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा।


संस्थान में छोटी अवधि के सर्टिफिकेट कोर्सेज के साथ-साथ 3 वर्ष का क्राफ्ट डिजाइन का डिप्लोमा कोर्स व 2 वर्ष का क्राफ्ट इण्टरप्रीन्योरशिप का डिप्लोमा कोर्स भी चलाया जाएगा। उ.प्र. इंस्टीट्यूट आफ डिजाइन की स्थापना हेतु वित्तीय वर्ष 2016-17 में वृहद निर्माण मद में 1500 लाख रुपये तथा सहायता अनुदान समन्वय गैर (वेतन) मद में 200 लाख रुपये के बजट की व्यवस्था की गयी है।


‘उ.प्र. निर्यात अवस्थापना विकास योजना’ का प्रस्ताव मंजूर

मंत्रिपरिषद ने ‘उत्तर प्रदेश निर्यात अवस्थापना विकास योजना’ के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। यह योजना प्रदेश में निर्यात संवर्धन के प्राथमिक उद्देश्य के साथ-साथ उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के प्रतिस्पर्धी सामथ्र्य के विकास एवं उच्च तकनीक को अपनाने तथा निर्यात परक उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों, कारीगरों एवं हस्तशिल्पियों के कौशन उन्नयन से राज्य के आर्थिक विकास एवं रोजगार सृजन का कार्य करेगी।

इस योजना के तहत प्रदेश में निर्यात परक कामन फैसीलिटी सेण्टर जैसी परियोजनाओं के विकास हेतु वित्त पोषण किया जाएगा। इसके तहत एसएलईपीसी द्वारा पूर्व से बास्केट में अनुमोदित 15 परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा। इनकी कुल अनुमानित परियोजना लागत लगभग 183 करोड़ रुपए है।


योजना के अन्तर्गत कुल परियोजना लागत का 70 प्रतिशत वित्त पोषण राज्य सरकार द्वारा तथा 30 प्रतिशत की धनराशि का विनियोजन एसपीवी द्वारा किया जाएगा। इसके अलावा, उपयुक्त एवं भार रहित भूमि उपलब्ध कराने का दायित्व एसपीवी का होगा। परियोजना के तहत स्वीकृत धनराशि अवमुक्त करने के पूर्व क्रियान्वयन इकाई (एसपीवी) व प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि के रूप में सम्बन्धित उपायुक्त उद्योग, जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र के मध्य निर्धारित प्रारूप पर एक एमओयू समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया जाएगा। परियोजना की क्रियान्वयन इकाई अशासकीय संस्था होने की दशा में शासन द्वारा सम्बन्धित जनपद के उपायुक्त उद्योग को परियोजना का नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा। परियोजना की स्थापना का कार्य परियोजना की डीपीआर में निर्धारित समयावधि के अन्तर्गत पूर्ण किया जाएगा, जिसकी अधिकतम अवधि वित्तीय स्वीकृति से दो वर्ष होगी।


उत्तर प्रदेश निर्यात अवस्थापना विकास योजना का क्रियान्वयन सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग द्वारा किया जाएगा तथा इस निमित्त निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो, उत्तर प्रदेश नोडल एजेन्सी होगी। इस योजना के अन्तर्गत परियोजनाओं/क्रियान्वयन इकाइयों के चयन हेतु सामान्यतयः वही प्राविधान अंगीकृत किए गए हैं, जो कि प्रदेश में एसाइड परियोजनाओं हेतु लागू थे।


ज्ञातव्य है कि वित्तीय वर्ष 2015-16 में वाणिज्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा एसाइड योजना डी-लिंक कर दी गयी है। तत्क्रम में पूर्व से निर्माणाधीन परियोजनाओं हेतु एसाइड योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2016-17 में राज्य सरकार द्वारा 80 करोड़ रुपए का बजट का प्राविधान किया गया है, परन्तु राज्य स्तरीय निर्यात प्रोत्साहन समिति (एसएलईपीसी) द्वारा अनुमोदित बास्केट की अवशेष परियोजनाओं के क्रियान्वयन हेतु बजट नहीं प्राप्त हो पा रहा है।

भारत सरकार की डी-लिंक योजनाओं के सम्बन्ध में यह निर्णय लिया गया कि डी-लिंक योजनाएं तथा अन्य योजनाएं, जिनमें केन्द्र सरकार द्वारा बजट व्यवस्था नहीं की गई है, योजना को राज्य सेक्टर में नयी योजना तथा नये नाम से सक्षम स्तर का अनुमोदन प्राप्त कर अनुपूरक बजट के माध्यम से प्राविधान कराया जाए।
एसाइड योजनान्तर्गत पूर्व से अनुमोदित बास्केट की अवशेष 15 परियोजनाओं को पूर्ण कराने हेतु ‘उत्तर प्रदेश निर्यात अवस्थापना विकास योजना’ नाम से नई योजना प्रारम्भ की जा रही है।


अम्बेडकरनगर की नगर पंचायत अशरफपुर किछौछा की सीमा का विस्तार का प्रस्ताव मंजूर


मंत्रिपरिषद ने जनपद अम्बेडकरनगर की नगर पंचायत अशरफपुर किछौछा की सीमा का विस्तार किए जाने के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया है। प्रस्तावित विस्तार का उद्देश्य शहरी अवस्थापना सुविधाएं प्रदान किया जाना है। नगर पंचायत अशरफपुर किछौछा सीमा विस्तार के मानक को पूर्ण करती है, इसलिए इसके विस्तार का निर्णय लिया गया है।


ज्ञातव्य है कि नगर पंचायत अशरफपुर किछौछा में हजरत मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी की दरगाह स्थित है। इस विश्व प्रसिद्ध दरगाह में वर्ष भर काफी अधिक संख्या में जायरीनों/श्रद्धालुओं का आवागमन रहता है।


गोण्डा के परसपुर बाजार को नगर पंचायत परसपुर बनाने का निर्णय


मंत्रिपरिषद ने जनपद गोण्डा के परसपुर बाजार को नगर पंचायत परसपुर बनाए जाने का निर्णय लिया है। प्रस्तावित नगर पंचायत शासनादेश के अनुसार मानकों का पूर्ण करती है। परसपुर बाजार के अधिकांश भाग में शहरी गुण विद्यमान हैं। इस बाजार से होकर राजमार्ग गुजरता है। परसपुर बाजार के नगर पंचायत बन जाने से जन सुविधाएं उपलब्ध होंगी।


नगर निगम लखनऊ द्वारा पीपीपी माडल के आधार पर आधुनिक पशुवधशाला के निर्माण सम्बन्धी प्रस्ताव मंजूर


मंत्रिपरिषद ने नगर निगम लखनऊ द्वारा पीपीपी माडल के आधार पर आधुनिक पशुवधशाला के निर्माण किए जाने हेतु परियोजना से सम्बन्धित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। आधुनिक पशुवधशाला की स्थापना का उद्देश्य यह है कि पशुवधशाला से जनित अपशिष्टों का वैज्ञानिक रूप से निस्तारण किया जाए, ताकि इससे पर्यावरण के प्रदूषण की स्थिति उत्पन्न न हो सके। नगर निगम लखनऊ के पास इसके लिए भूमि उपलब्ध है तथा परियोजना की कुल लागत 6330.73 लाख रुपए है। मंत्रिपरिषद ने इस सम्बन्ध में आरएफक्यू कम आरएफपी डाक्यूमेण्ट तथा कन्सेशन एग्रीमेण्ट एवं निविदा दाता के चयन के लिए निर्धारित अर्हता को मंजूरी प्रदान कर दी है।


दादरी एवं औरैया गैस आधारित विद्युत गृहों से सस्ती विद्युत प्राप्त करने हेतु वैट, एडीशनल वैट तथा इन्ट्री टैक्स माफ करने का निर्णय


मंत्रिपरिषद ने ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार की स्कीम के अनुसार दादरी एवं औरैया गैस आधारित विद्युत गृहों की क्षमता का इस्तेमाल करते हुए सस्ती विद्युत प्राप्त करने हेतु राज्य सरकार द्वारा वैट, एडीशनल वैट तथा इन्ट्री टैक्स माफ करने का निर्णय लिया है।


घाटमपुर तापीय परियोजना के ट्रान्समिशन सिस्टम के निर्माण सम्बन्धी प्रस्ताव मंजूर


मंत्रिपरिषद ने प्रदेश में स्थापित होने वाले घाटमपुर तापीय परियोजना से ऊर्जा निकासी के लिए आवश्यक पारेषण तंत्र के निर्माण कराए जाने सम्बन्धी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
मेसर्स नेयवेली उत्तर प्रदेश पावी लिमिटेड (उ.प्र. राज्य विद्युत उत्पादन निगम लि0 एवं मैसर्स निवेली लिग्नाइट लिमिटेड चेन्नई का संयुक्त उपक्रम) द्वारा घाटमपुर, जनपद कानपुर देहात में 3ग660 मेगावाट क्षमता की तापीय परियोजना (घाटमपुर तापीय परियोजना) की स्थापना का कार्य सम्पादित करवाया जा रहा है। यह परियोजना भारत सरकार द्वारा इस दिशा में प्रतिपादित नीति के अन्तर्गत ‘वृहद् तापीय परियोजना’ के रूप में, समझौता ज्ञापन माध्यम से स्थापित की जा रही है।


मेसर्स नेयवेली उत्तर प्रदेश पावी लिमिटेड द्वारा घाटमपुर तापीय परियोजना से ऊर्जा निकासी हेतु टैरिफ बेस्ड काम्पटीटिव बिडिंग के आधार पर निर्माण कराया जाएगा।


राज्यपाल सचिवालय के वाहन चालकों को भी सीयूजी मोबाइल सिम की सुविधा देने का फैसला


मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश सचिवालय के वाहन चालकों की भांति राज्यपाल सचिवालय के वाहन चालकों को भी सीयूजी प्लान के अन्तर्गत मोबाइल सिम की सुविधा दिये जाने का निर्णय लिया है। राज्यपाल सचिवालय के वाहन चालकों को सीयूजी प्लान के अन्तर्गत ग्रुप के अन्तर्गत बात करने के लिए निःशुल्क असीमित काल तथा ग्रुप के बाहर बात करने के लिए 50 रुपये मात्र प्रतिमाह की धनराशि वित्तीय सीमा के अन्तर्गत टाक-वैल्यू प्रदान की जाएगी।

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