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आज मां महागौरी की पूजा करके भक्त होंगे निहाल, जानिए खास बातें

 Vikas Tiwari |  2016-10-09 03:06:30.0

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तहलका न्यूज़ डेस्क


लखनऊ: नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है। नवरात्रि के दौरान इस दिन का विशेष महत्व है। देवी महागौरी का अत्यंत गौर वर्ण हैं। इनके वस्त्र और आभूषण सफेद हैं। इनकी चार भुजाएं हैं। महागौरी का वाहन बैल है।


देवी के दाहिने ओर के ऊपर वाले हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले हाथ में त्रिशूल है। बाएं ओर के ऊपर वाले हाथ में डमरू और नीचे वाले हाथ में वर मुद्रा है। कहा जाता है कि भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए इन्होंने कठोर तपस्या की थी, जिससे इनका शरीर काला पड़ गया।


इनकी कठोर तपस्या से महादेव प्रसन्न हो गए और इनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली। इनके शरीर का रंग तपस्या से काला हो जाने के कारण महादेव ने इन्हें गंगाजल से धोया तो ये फिर से गौर रंग वाली हो गईं। इसी कारण इनका नाम गौरी पड़ गया।


इसी कारण कहा जाता है कि अष्टमी के दिन व्रत रखने से भक्तों को उनका मनचाहा जीवनसाथी मिलता है। महागौरी की एक अन्य कथा भी प्रचलित है। इसके अनुसार जब मां उमा जंगल में तपस्या कर रही थीं, तभी एक शेर वन में भूखा घूम रहा था।


खाने की तलाश में वहां पहुंचा जहां मां तपस्या में लीन थी। देवी को देखकर शेर की भूख बढ़ गई और शेर उनके तपस्या पूरी करने का इंतजार करने लगा। इस इंतजार में वह काफी कमजोर हो गया।


देवी जब तप से उठी तो शेर की दशा देखकर उन्हें उस पर बहुत दया आई। मां ने उसे अपनी सवारी ली और एक प्रकार से उसने भी मां के साथ तपस्या की थी। इसलिए देवी महागौरी का वाहन बैल और सिंह दोनों ही हैं।


माता से जुड़ी कथा:-


अपने को पार्वती रूप में भगवान शिव को पति-रूप में प्राप्त करने के लिए बड़ी कठिन तपस्या की थी। इनकी कठोर तपस्या के कारण इनका शरीर एकदम काला पड़ गया। इनकी तपस्या से प्रसन्न होकर जब भगवान शिव ने माता के शरीर को गंगाजी के पवित्र जल से धोया तब वह विद्युत प्रभा के समान अत्यंत कांतिमान-गौेर हो उठा। तभी से इनका नाम महागौरी पड़ा।


पूजा का महत्व:- 


माँ महागौरी का ध्यान, स्मरण, पूजन-अराधना भक्तों के लिए सर्वविध कल्याणकारी है। हमें सदैव इनका ध्यान करना चाहिए। इनके कृपा से अलौकिक सिद्घियों की प्राप्ति होती है। मन को अनन्य भाव से एकनिष्ठ कर मनुष्य को सदैव इनके ही पादारविन्दों का ध्यान करना चाहिए। महागौरी भक्तों का कष्ट अवश्य ही दूर करती है। इनके भक्ति से आर्तजनों के असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। अत: इनके चरणों की शरण पाने के लिए हमें प्रयत्न करना चाहिए।


उपासना:-


पुराणों में मा महागौरी की महिमा का प्रचुर व्याख्यान किया गया है। ये मनुष्य के वृतियों को सत्य की ओर प्रेरित करके असत्य का विनाश करती हैं। इनकी उपासना का श्लोक है-

या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

अर्थात हे मां सर्वत्र विराजमान और माँ गौरी के रूप में प्रसिद्घ अम्बे आपको मेरा बार बार प्रणाम है। मां मुझे सुख-समृद्घि प्रदान करो।

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