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मुसलमानों की ज़बान से निकलेगी संघ की भाषा, लखनऊ में रोज़ा अफ्तार करेंगे संजय जोशी

 Sabahat Vijeta |  2016-06-06 16:06:31.0

musilm-manchतहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. मुसलमानों की लगाम भी अपने हाथों में रखने के मकसद से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा गठित मुस्लिम राष्ट्रीय मंच पिछले कुछ सालों से रमज़ान में अफ्तार की सियासत में भी उतर गया है. मंच ने कल लखनऊ में पहली रमज़ान को जो इफ्तार पार्टी रखी है उसमें संघ की तरफ से संजय जोशी शिरकत करेंगे.


मुस्लिम राष्ट्रीय मंच को जिस सुनियोजित ढंग से संचालित किया जाता है उसमें देखने से यह महसूस होता है जैसे गतिविधियाँ मुसलमानों की हों लेकिन हकीकत में वह गतिविधियाँ संघ के इशारे में संचालित गतिविधियाँ होती हैं. पश्चिमी यूपी के मुस्लिम बहुल इलाकों में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने इस तरह के कई कार्यक्रम संचालित किये. मुरादाबाद, बरेली, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ और आगरा में यह संगठन अलग-अलग जगहों पर उलेमा और प्रभावशाली मुसलमानों के सम्पर्क में रहता है.


वर्ष 2002 में संघ प्रमुख के.एस.सुदर्शन की मदद से स्थापित मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुख्य रूप से मुस्लिम युवाओं को अपने साथ जोड़ने का काम कर रहा है. ताकि देश से जुड़े राष्ट्रवादी मुद्दों पर सशक्त नज़र रखी जा सके. मंच के संयोजक मोहम्मद अफजल मुस्लिम समुदाय में संघ को लेकर जो पूर्वाग्रह हैं, उन्हें खत्म करने की कोशिश में लगे हैं.


sanjay-joshiमुस्लिम राष्ट्रीय मंच का असल मकसद मुसलमानों को दूसरे राजनीतिक दलों से संघ और भाजपा की तरफ ले जाना है. हाल ही में लखनऊ के रवीन्द्रालय में इस संगठन ने एक कार्यक्रम आयोजित किया था जिसमें संघ के नेता इन्द्रेश टोपी पहने हुए नज़र आये थे. यह संगठन मुसलमानों को यह भरोसा दिलाना चाहता है कि मुसलमानों की भलाई संघ और भाजपा के साथ चलने में है. कांग्रेस ने खासकर उसे लम्बे समय तक धोखा दिया है.


संघ मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल अपने एजेंडे को लागू करवाने में कर रहा है. इन दिनों मंच के कार्यकर्त्ता देश के दस लाख मुसलमानों से गौ हत्या के विरोध में हस्ताक्षर करवाने में लगे हैं. इसके अलावा तीन तलाक़ मामले में भी यह जनमत तैयार करने की कोशिश में है. शिक्षण संस्थाओं में तिरंगा फहराए जाने की बात जब सामने आई तो मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने कहा कि वह तो पांच साल से यह कहता आ रहा है कि मदरसों में 26 जनवरी और 15 अगस्त को झंडा फहराया जाना चाहिए.


मंच की इस टिप्पणी पर देवबंद ने सवाल उठाया था कि क्या संघ मुख्यालय में तिरंगा फहराया जाता है. देवबंद ने कहा कि जो खुद भगवा फहराता है वह हमारी देशभक्ति परखने की कोशिश कर रहा है. देवबंद ने कहा कि देश की आज़ादी में मदरसों का बड़ा योगदान है जबकि संघ का कोई योगदान नहीं है.


देवबंद जैसी मुस्लिम संस्थाओं को जवाब देने के लिए संघ ने यह मंच तैयार किया है. मंच संघ का वह हथियार है जो मुसलमानों की ज़बान से संघ की भाषा बुलवाने का काम करता है. तिरंगा फहराने का मामला हो, वन्देमातरम बोलने का मामला हो, सूर्य नमस्कार का मामला हो या फिर योग का. मुस्लिम राष्ट्रीय मंच लगातार संघ के एजेंडे पर काम करने में लगा है.


मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने इस साल रमजान में देश के हर सूबे में रोज़ा अफ्तार पार्टी आयोजित करने का फैसला किया है. हर प्रदेश में संघ का कोई न कोई बड़ा नेता मौजूद रहेगा. संघ का यह नेता मुसलमानों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करेगा कि मुसलमानों का हित संघ और भाजपा में है. इनके अलावा सभी राजनीतिक दल उनका इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि भाजपा उनके हित का इमानदारी से ध्यान रखेगी. कल लखनऊ में संजय जोशी इस अभियान की शुरुआत करेंगे.

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