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कांधला का सच: डर में जी रहे हिंदू ? बचे हैं सिर्फ 9 हजार

 Abhishek Tripathi |  2016-06-15 02:48:00.0

Kairanaअभिषेक त्रिपाठी
लखनऊ. ये क्या हो गया मेरे शहर को...अब तो ऐसा लगता है छिपने की कोई जगह यहां बची नहीं। शायद जन्म और कर्मभूमि को अलविदा कहने का समय आ गया है। कुछ ऐसा ही दर्द है कैराना के साथ कांधला के हिुंदुओं का भी। आरोप है कि एक वर्ग विशेष की बढ़ती आबादी और अपराध के सामने झुक चुके प्रशासन पर से लोगों को भरोसा पूरी तरह से उठ चुका है। खुलेआम रंगदारी मांगना और न देने पर घर की इज्जत से खिलवाड़ करना यहां के लिए आम बात हो चुकी है। इसी वजह से कांधला के लोग कहते हैं कि अब तो यहां पैरामिलेट्री फोर्स का एक बेस कैंप होना चाहिए। हालात को वही काबू कर पाएंगे, पुलिस कुछ नहीं कर पाएगी। बता दें कि कैराना में कथित रुप से बढ़ते अपराध के चलते 346 हिंदू परिवारों ने गांव से पलायन कर दिया है। अब इसी राह पर कांधला भी है।


कांधला भी अब कैराना की डगर पर है
आकंडे देखे तो पता लगता है कि यहां आबादी के अनुपात में हिंदुओं की संख्या तेजी से घट रही है। सूत्रों के अनुसार, वर्ष 1995 में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या जहां 16426 और हिंदुओं की 13726 थी, वह 2012 के स्थानीय निकाय चुनाव में पूरी तरह बदल गयी। मुस्लिम वोटर 22627 हो गए और हिंदू मतदाता 10126 तक आ गये। दो साल में यह असंतुलन और ज्यादा गंभीर हो गया। अब मुस्लिम वोटर 25 हजार से अधिक हैं, जबकि हिंदू मात्र नौ हजार के आसपास ही रह गए हैं।


रंगदारी दो, नहीं तो शहर छोड़ो
कैराना से महज 12 किलोमीटर दूर बसे कांधला में कैराना की ही तरह असुरक्षा सबसे बड़ी समस्या है जो दिनों दिन बड़ा आकार लेती जा रही है। मेन बाजार में बीज विक्रेता तरुण सैनी यहां व्याप्त आतंक का शिकार हो चुके हैं। वर्ग विशेष की बढ़ती दबंगई के आगे पुलिस-प्रशासन के नतमस्तक होने का आरोप लगाते हुए तरुण के भाई आदेश का कहना है कि करीब दो साल पहले उनकी दुकान पर आए आधा दर्जन हथियारबंद बदमाशों ने उनसे पांच लाख रुपये रंगदारी मांगी और शहर छोड़कर चले जाने की धमकी दी। पुलिस को सीसीटीवी कैमरे की फुटेज उपलब्ध करा दी गयी परंतु कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। तब से हम सैनी समाज की सुरक्षा की चिंता में जी रहे हैं। प्रशासन से पिस्टल का लाइसेंस मांगा परंतु फाइल अटकी है, कोई सुनवाई नहीं होती।


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आतंक का गढ़ बना संभल: दिल्ली पुलिस
पश्चिमी यूपी का संभल जिला आतंकवाद निरोधी एजेंसियों के राडार पर आ गया है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा का मदद पहुंचाने वाले कई आरोपियों का ताल्‍लुक संभल से है। यह जानकारी दिल्‍ली पुलिस की स्‍पेशल सेल ने एक अदालत सामने दाखिल चार्जशीट में दी। यह चार्जशीट भारत में अल कायदा के 17 संदिग्‍ध सदस्‍यों के खिलाफ दाखिल की गई थी, इनमें से 12 फरार हैं। इन पर भारत में अल-कायदा का Al Qaeda for Indian Suncontinent (AQIS) के बैनर तले आधार बनाने का आरोप है।


पुलिस को है इन खूंखार आतंकियों की तलाश


पुलिस ने दावा किया है कि संभल का रहने वाला मौलाना असीम उमर, जो कि फिलहाल पाकिस्‍तान में है, AQIS कर मुखिया है। चार्जशीट के 17 संदिग्‍धों में से 6 संभल जिले के रहने वाले हैं। यहां के निवासी मोहम्‍मद आसिफ और जफ़र मसूद को तो अरेस्‍ट कर लिया गया है, मगर मौलाना असीम उमर, सैयद अख्‍तर, मो. शरजील अख्‍तर और उस्‍माल अभी तक पुलिस की पकड़ से दूर हैं।


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हिंदू बेच रहे घर, कह रहे अलविदा
सरावज्ञान, कानूनगोयान, शेखजादगान व शांतिनगर जैसे मुहल्लों से हिंदुओं का अपनी संपत्ति बेचने का सिलसिला जारी है। सुभाष जैन, राजू कंसल, दीपक चौहान, तरस चंद जैन, विकास सैनी, राजबीर मलिक और योगेंद्र सेठी जैसे लोग अपनी जन्म और कर्म भूमि को अलविदा कह चुके हैं। सतेंद्र जैन, रविंद्र कुमार और विजेंद्र मलिक जैसे अनेक लोग महफूज ठिकानों की तलाश में है। घरों व दुकानों पर लटकी बिकाऊ है जैसी सूचनाएं प्रशासन को मुंह चिढ़ा रही हैं। असंतुलित होती आबादी के आंकड़े भी पलायन की टीस उजागर करते हैं।


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उजड़ी मंडियां, सूने बाजार
कभी देश भर को गुड़ की जरूरतें पूरा करने वाली मंडी में आज सन्नाटा है। कभी यहां गुड के लदान के लिए रेलवे ने विशेष ट्रैक तक की व्यवस्था की थी। व्यापारी विष्णु गोयल का कहना है कि अनाज मंडी भी उजड़ चुकी है। सब्जी मंडी को छोड़ दें तो बाकी बड़ा कारोबार अब ठप है। इस गन्ना बेल्ट की चार खांडसारी इकाइयां बंद हो चुकी हैं। अब तो हालात उलट हैं, आतंक और रंगदारी की वजह से यहां कोई कारोबार नहीं करना चाहता। पांच साल में सराफा कारोबार साठ प्रतिशत कम होने का दावा करते हुए सराफा एसोसिएशन के महामंत्री सतवीर वर्मा का कहना है कि हालात ऐसे ही बने रहें तो हम भी परिवार पालने के लिए मजबूरन कस्बा छोड़ जाएंगे।


शादी में भी मुश्किल
स्कूली बच्चों के लिए अच्छे स्कूलों का संकट भी कम नहीं है। करीब दो दर्जन बसें स्कूली बच्चों को लेकर सुरक्षाकर्मी के साथ 14 किलोमीटर दूर शामली आना-जाना करती हैं। लोगों का कहना है कि बच्चों को पढ़ाने की मजबूरी के चलते हम ये बड़ा जोखिम उठाने को मजबूर हैं। सैनी समाज के संयोजक नरेश सैनी का कहना है कि छेड़छाड़ की घटनाओं ने कई वर्षों में ऐसा माहौल बना दिया है कि बहन-बेटियों का देर शाम घरों से निकलना बंद है। दिव्यप्रकाश का कहना है कि कांधला के बिगड़े वातावरण से रोजगार के बचे-खुचे अवसर ही खत्म नहीं हो रहे वरन शादी में भी दिक्कतें आ रही हैं। कोई भी परिवार अपनी बेटी कांधला में ब्याहने के लिए आसानी से राजी नहीं होता।


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दहशत बढ़ाने में भू-माफिया
आतंक के चलते औने-पौने दाम में अपनी संपत्ति बेचने की मजबूरी जता रहे सुभाष बंसल का कहना है कि कभी कस्बे की शान रही रहतू मल की हवेली मात्र 15 लाख रुपये में बिक गयी, जबकि उसकी कीमत लोग एक करोड़ रुपये आंकी गई थी। जाट कालोनी में मकान व दुकान तेजी से बिकने का दावा करते सतीश पंवार का कहना है कि भू-माफिया सक्रिय हो चुके हैं और आतंक फैलाने में उनका योगदान भी कम नहीं। पुलिस भी इनकी मदद में खड़ी दिखती है। पलायन करने वालों की सूची में अभी इजाफा होगा, क्योंकि बहुत से लोगों को अपनी संपत्ति बेचने के लिए सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं। एडवोकेट बीरसेन का कहना है कि कुछ व्यापारी अपना कारोबार समेटने से पहले उधार में गए धन को बटोरने में जुटे हैं। कई पीढ़ी से लोहे के व्यापारी 71 वर्षीय सतेंद्र जैन बुझे मन से कहते हैं कि अपने पौत्रों का एडमिशन इस बार देहरादून करा दिया है, उधारी सिमटते ही कांधला छोड़कर चले जाएंगे।

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