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यूपी चुनाव: जाति देखकर कराया जा रहा कांग्रेस नेताओं का परिचय, ये है PK फॉर्मूला

 Abhishek Tripathi |  2016-07-26 02:28:44.0

congressतहलका न्यूज ब्यूरो
लखनऊ. कांग्रेस हमेशा से कहती आई है कि यूपी में जातिगत आधारित राजनीति होती है। इसके लिए सपा और बसपा ही जिम्मेदार है। वहीं, अब यूपी चुनाव में सत्ता में आने के लिए कांग्रेस खुद नेताओं की जाति को तवज्जो देने लगी है। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर कांग्रेसी नेताओं का परिचय जब गांव में जाकर आम जनता से कराते हैं तो उनकी जाति बताना नहीं भूलते हैं। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती जातीय समीकरणों के चक्रव्यूह को भेदना है।

नई दिल्ली से शुरू हुई कांग्रेस की बस यात्रा को दो दिन बीत गए हैं। बता दें कि इस बस यात्रा में उन सभी जातीय नेताओं को आगे रखा गया है जो यूपी की सियासत को प्रभावित करती हैं। वैसे तो राज बब्बर इन नेताओं का परिचय खुद एक हीरो के रूप में कराते हैं, लेकिन जाति बताना नहीं भूलते हैं।


पेश है एक उदाहरण...
सोमवार को हरदोई के सांडी विधानसभा के मेंडू गांव में हुई जनसभा के दौरान भीड़ का मिजाज देखकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने बारी-बारी से मंच पर बैठे सभी नेताओं का परिचय जाति और उनके काम के आधार पर कराया। मसलन, पीएल पूनिया जी दलित समाज से आते हैं...दलितों के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है। अब भी लड़ रहे हैं। राजाराम पाल, प्रमोद तिवारी, विरेंद्र सिंह, जफर अली नकवी समेत सभी नेताओं का परिचय भी इसी तरह कराया गया।

यह नेता कांग्रेस के गुलदस्ते हैं
राज बब्बर ने सभी नेताओं की तरफ इशारा करते हुए कांग्रेस का गुलदस्ता बताया। कांग्रेस हाईकमान ने हर वर्ग को तवज्जो दी है। अपनी सभाओं में उन्होंने साफ कहा कि यह सभी नेता मिलकर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनवाने निकले हैं। अब बस आपका सहयोग चाहिए।

कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती जातीय सियासत
यूपी की सियासत में जातीय समीकरण कांग्रेस की नींद हराम किए हुए है। कांग्रेस के परंपरागत वोट अब छिटक कर दूसरी पार्टियों के पास चले गए हैं। ऐसे में इन वोटरों को दोबारा कांग्रेस की तरफ लाने की पीके टीम और कांग्रेस पार्टी पूरी कोशिश में लगी है। हिन्दुस्तान से बात करते हुए एआईसीसी के सचिव प्रकाश जोशी ने भी बड़ी साफगोई से स्वीकारा-यूपी में कांग्रेस के सामने सिर्फ एक ही चुनौती है-जातिगत सियासत। इससे पार कैसे पाया जाए इस पर मंथन हो रहा है। उम्मीद है कि 2017 के चुनाव से पहले हम ऐसी रणनीति तैयार कर लेंगे जिससे इस प्रदेश की जनता जाति-धर्म के बजाए विकास परक मुद्दों पर वोटिंग करे।

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