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यूपी सरकार गंगा, यमुना सहित सभी नदियों को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए प्रतिबद्ध

 Sabahat Vijeta |  2016-05-02 15:42:16.0


  • प्रदेश सरकार ने अपने संसाधनों से वृन्दावन में यमुना, वाराणसी में वरुणा तथा अयोध्या में सरयू नदी की साफ-सफाई और सौन्दर्यीकरण का फैसला लिया

  • लखनऊ में गोमती नदी रिवरफ्रण्ट परियोजना की सराहना अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश की सिंचाई एवं बाढ़ परियोजनाओं के लिए भारत सरकार के स्तर पर लम्बित 4367.12 करोड़ रुपये को यथाशीघ्र अवमुक्त किए जाने का अनुरोध

  • निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं के लिए नाबार्ड से 10,827.9 करोड़ रुपये की ऋण अनुमन्य कराने का भी अनुरोध

  • मुख्यमंत्री से केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री ने भेंट की


uma-akhileshलखनऊ. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि राज्य सरकार गंगा और यमुना सहित प्रदेश की सभी नदियों को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके दृष्टिगत प्रदेश सरकार ने अपने संसाधनों से वृन्दावन में यमुना, वाराणसी में वरुणा तथा अयोध्या में सरयू नदी की साफ-सफाई और सौन्दर्यीकरण कराने का फैसला लिया है।


मुख्यमंत्री ने यह बात रविवार को अपने सरकारी आवास पर केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती से मुलाकात के दौरान कही। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री से प्रदेश की सिंचाई एवं बाढ़ परियोजनाओं के लिए भारत सरकार के स्तर पर लम्बित 4367.12 करोड़ रुपये की धनराशि को यथाशीघ्र अवमुक्त कराने तथा निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं के लिए नाबार्ड से 10,827.9 करोड़ रुपये की ऋण अनुमन्य कराए जाने का अनुरोध भी किया। भेंट के दौरान सिंचाई और लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव भी उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर पर्यावरण सौंपने के लिए हमें अपनी नदियों पर ध्यान देना होगा। गंगा नदी को साफ बनाने के लिए उसकी सहायक नदियों को साफ-सुथरा बनाना जरूरी है। गंगा और उसकी सहायक नदियों की साफ-सफाई के प्रति राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।


श्री यादव ने कहा कि गंगा नदी को साफ करने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा जो भी पहल अथवा प्रयास किए जाएंगे, उनमें राज्य सरकार हर सम्भव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने गंगा की सहायक नदी काली नदी के प्रदूषण पर चिन्ता जताते हुए केन्द्र सरकार से अपेक्षा की कि इस नदी को भी साफ-सुथरा और निर्मल बनाने के लिए पहल की जाए।


मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि लखनऊ में गोमती नदी रिवरफ्रण्ट परियोजना की सराहना अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है। परियोजना की कंसल्टेन्ट कम्पनी ए.ई.काॅन ने अपने प्रस्तुतीकरण में बताया है कि परियोजना में 9 से 10 महीनों में जितना कार्य सम्पन्न हुआ, उतना कार्य मलेशिया और सिंगापुर की परियोजनाओं में 3 से 4 साल के दौरान सम्पादित कराया गया था। गोमती रिवरफ्रण्ट के लिए डायफ्राम वाॅल तथा पैरालल ड्रेन के निर्माण की रफ्तार भी एक मिसाल है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि गोमती नदी की तर्ज पर यमुना, वरुणा तथा सरयू नदियों के रिवरफ्रण्ट विकास की परियोजनाएं क्रियान्वित की जाएंगी। इन नदियों के सौन्दर्यीकरण कार्य में हरियाली पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, साइकिल तथा जाॅगिंग ट्रैक बनाए जाएंगे तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की प्रकाश सज्जा भी करवायी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इन परियोजनाओं के लिए वित्तीय प्रबन्ध करने के मकसद से मुख्य सचिव के स्तर पर सोमवार को एक बैठक आहूत की गई है।


भेंट के दौरान केन्द्रीय मंत्री ने भारत सरकार द्वारा गंगा एवं यमुना नदियों की सफाई के लिए शहरों में पीपीपी माॅडल के आधार पर स्थापित होने वाले सीवेज तथा एफफ्लूवेन्ट ट्रीटमेन्ट प्लान्ट हेतु प्रदेश सरकार की अनापत्ति का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने इस सम्बन्ध में राज्य सरकार के हर सम्भव सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा कि गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों पर बसे नगरों से होने वाले नदियों के प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपाय किए जा रहे हैं। नदियों की सफाई कार्य योजना में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि नालों का गन्दा पानी नदियों में न गिरने पाए।


इस अवसर पर सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि सिंचाई विभाग की परियोजनाओं के लिए नाबार्ड से 10827.9 करोड़ रुपये का ऋण अनुमन्य कराया जाना आवश्यक है। उन्होंने इस धनराशि पर 3 प्रतिशत की ऋण सीमा को शिथिल करते हुए अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराए जाने का अनुरोध किया।


सिंचाई मंत्री ने सरयू राष्ट्रीय परियोजना, बाण सागर, अर्जुन सहायक, मध्य गंगा तथा कनहर आदि परियोजनाओं के लिए लम्बित धनराशि को तत्काल अवमुक्त कराए जाने का अनुरोध करते हुए कहा कि इससे बारिश का मौसम शुरू होने से पहले वर्किंग सीजन का सदुपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बुन्देलखण्ड क्षेत्र की निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाना जरूरी है। उन्होंने बाढ़ परियोजनाओं के 139 करोड़ रुपये के लम्बित केन्द्रांश को भी भारत सरकार द्वारा तत्काल अवमुक्त किए जाने का अनुरोध किया।


इस अवसर पर मुख्य सचिव आलोक रंजन, केन्द्रीय जल संसाधन सचिव शशि शेखर, प्रमुख सचिव सिंचाई दीपक सिंघल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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